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प्रेरक शिक्षकों ने शुरू किया बेमियादी धरना
Updated Tue, 10 Oct 2017 12:39 AM IST
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भिवानी। तीन दिन से चल रहा प्रेरकों का धरना अनिश्चितकालीन धरने के रूप में बदल गया है। बाद में शिक्षा प्रेरकों ने प्रेरक संघ के राज्य प्रधान भगवत कौशिक के नेतृत्व में तहसीलदार के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा।
सोमवार को लघु सचिवालय के बाहर धरने की अध्यक्षता जिला प्रधान धर्मेंद्र श्योराण ने की। धरने को सर्व कर्मचारी संघ, पूर्व विधायक डा. शिव शंकर भारद्वाज, लोहारू पूर्व विधायक सोमबीर, इनेलो लीगल सेल अधिवक्ताओं ने धरने का समर्थन किया।
प्रेरक संघ के राज्य प्रधान भगवत कौशिक ने कहा कि अगर सरकार ने उनकी मांगों को अनसुना किया तो वे आगे की रणनीति बनाकर बड़ा आंदोलन खड़ा कर देंगे। जिसकी जिम्मेवारी सरकार की होगी। उन्होंने कहा कि प्रेरकों ने प्रोढ़ शिक्षा के साथ-साथ सरकार की निभिन्न योजनाओं को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया, लेकिन सरकार ने प्रेरकों का शोषण करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। सरकार विभिन्न तरीकों से गलत परियोजनाओं पर पानी की तरह पैसा बहा रही है, लेकिन प्रेरकों को मात्र 2 हजार रुपये देने के लिए नहीं हैं। प्रेरकों को बजट ना होने का बहाना बनाकर हटा दिया गया। पिछले 11 माह का मानदेय भी नहीं दिया गया है।
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इस अवसर पर जंगबीर कैरू, विनोद मांढी, सुरेश शर्मा, बिजेंद्र बवानीखेड़ा, अरचना तोशाम, संजय पंडित, सुनीता जींद, महाबीर, प्रमिला, कृष्ण, रमेश, विरेंद्र, विनिता, लक्ष्मी भाखड़ा, रणधीर आदि रहे।
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सोमवार को लघु सचिवालय के बाहर धरने की अध्यक्षता जिला प्रधान धर्मेंद्र श्योराण ने की। धरने को सर्व कर्मचारी संघ, पूर्व विधायक डा. शिव शंकर भारद्वाज, लोहारू पूर्व विधायक सोमबीर, इनेलो लीगल सेल अधिवक्ताओं ने धरने का समर्थन किया।
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प्रेरक संघ के राज्य प्रधान भगवत कौशिक ने कहा कि अगर सरकार ने उनकी मांगों को अनसुना किया तो वे आगे की रणनीति बनाकर बड़ा आंदोलन खड़ा कर देंगे। जिसकी जिम्मेवारी सरकार की होगी। उन्होंने कहा कि प्रेरकों ने प्रोढ़ शिक्षा के साथ-साथ सरकार की निभिन्न योजनाओं को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया, लेकिन सरकार ने प्रेरकों का शोषण करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। सरकार विभिन्न तरीकों से गलत परियोजनाओं पर पानी की तरह पैसा बहा रही है, लेकिन प्रेरकों को मात्र 2 हजार रुपये देने के लिए नहीं हैं। प्रेरकों को बजट ना होने का बहाना बनाकर हटा दिया गया। पिछले 11 माह का मानदेय भी नहीं दिया गया है।
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इस अवसर पर जंगबीर कैरू, विनोद मांढी, सुरेश शर्मा, बिजेंद्र बवानीखेड़ा, अरचना तोशाम, संजय पंडित, सुनीता जींद, महाबीर, प्रमिला, कृष्ण, रमेश, विरेंद्र, विनिता, लक्ष्मी भाखड़ा, रणधीर आदि रहे।