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13 हजार कुत्तों को रैबिज फ्री करने की कवायद

Sat, 27 Feb 2016 12:32 AM IST
भिवानी ब्यूरो ।
भिवानी ब्यूरो । Updated Sat, 27 Feb 2016 12:32 AM IST
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3 thousand dogs rabies free exercise of

भिवानी। शहर वासियों के लिए परेशानी बने गलियों के आवारा कुत्तों को रैबिज फ्री बनाने की कवायद शुरू हो गई है। सरकार से एमओयू साइन होने के बाद ह्ूमैन सोसायटी सदस्यों ने शुक्रवार को शहर की विभिन्न कॉलोनियों में आवारा कुत्तों को रैबिज के इंजेक्शन लगाये। जिलेभर में करीब 13 हजार कुत्तों को रैबिज फ्री करने के लिए इंजेक्शन लगाने की योजना है। अभियान की शुरूआत 19 फरवरी से होनी थी मगर जाट आरक्षण विवाद के चलते अभियान की शुरूआत नहीं हो पाई। अभियान की शुरूआत शुक्रवार को डीसी कॉलोनी से की गई। एनजीओ की चार टीमें एंटी रैबिज वैक्सीनेशन के अभियान में जुटी है।

... ऐसे तो नहीं होगा वैक्सीनेशन का लाभ

एंटी रैबिज अभियान में जुटे कर्मचारी पहले ही दिन अभियान में लापरवाही बरतते नजर आए। नियमानुसार एंटी रैबिज वैक्सीन को दो से आठ डिग्री तापमान में रखा जाता है। यानी आइस बैग में रखना जरूरी है। अन्यथा ये खराब हो जाती है। कुत्तों को लगाने के समय ही इन्हें बैग से निकाला जाता है और प्रयोग किया जाता है। मगर अभियान में जुटे कर्मचारी वैक्सीन को आइस बॉक्स से अलग रखे देखे गए। जब इस बाबत बात की तो जवाब रहा है कि कुत्तों को लगाने के लिए पहले ही बाहर निकालकर इंजेक्शन भरकर रखने होते है। इसी कारण वैक्सीन आइस बैग से बाहर है।

लाल रंग का निशान और साफ्टवेयर पर होगा फोटो

किस कुत्ते को इंजेक्शन लगा और किसे नहीं इसके लिए अभियान में जुटे कर्मचारी कुत्तों पर निशान लगाएंगे। इसके अलावा कुत्ते की फोटो व अन्य जानकारी भी सॉफ्टवेयर के माध्यम से ऑन लाइन की जाएगी।

वर्जन:::

शहर में रैबिज के खतरे को खत्म करने के लिए एंटी रैबिज अभियान शुरू किया गया है। पशुपालन विभाग की देखरेख में संस्था यह अभियान चलाए हुए है।

डॉ. जय सिंह, डिप्टी डायरेक्टर, पशु पालन विभाग

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वर्जन:::

हमारा प्रयास रहेगा कि कम से कम 70 फीसदी कुत्तों को एंटी रैबिज के इंजेक्शन जरूर लगाये जाए। वैक्सीन अगर बिना आईस बैग के है तो इसके लिए कर्मचारियों को अलर्ट किया जाएगा। अभियान में जुटे कर्मचारी लापरवाही नहीं करे इसके लिए एक साफ्टवेयर है, जिसमें इंजेक्शन लगाने के बाद कुत्ते की फोटो, उसके स्वास्थ्य संबंधित जानकारी ऑनलाइन करनी होगी।

डॉ. श्रीकांत, डिप्टी डायरेक्टर, पशु पालन विभाग

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