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29 घंटे बाद घर आया जिगर का टुकड़ा
ब्यूरो/ अमर उजाला, भिवानी
Updated Mon, 06 Oct 2014 12:34 AM IST
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शहर के नामी स्कूल के बाहर से अपहृत बच्चा करीब 29 घंटे बाद रविवार दोपहर करीब एक बजे घर लौट आया। बच्चे ने बताया कि चार युवकों ने उसका अपहरण किया और दिनोद गांव के खेतों में बंधक बनाकर रखा। मौका पाकर वह वहां से भाग निकला।
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पुलिस को बच्चे के अपहरण की कहानी संदिग्ध लग रही है। मौके का मुआयना करने भी पर अपहरण की कहानी का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है। 22 घंटे बच्चे की खोजबीन में जुटे परिवार वालाें के चेहरों पर भी अपना लाल मिलने की खुशी है।
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मामला शनिवार सुबह का है। डाबर कॉलोनी वासी मनोज कुमार के दो लड़के सूरज व साहिल हलवासिया स्कूल में पढ़ते है। हर रोज की तरह ऑटो से दोनों स्कूल पहुंचे। साहिल तो स्कूल में गया मगर सूरज संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया। करीब तीन बजे ऑटो चालक उन्हें घर के लिए लेने आया तो सूरज नहीं मिला।
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जिसके बाद घरवालों से संपर्क किया। परिजनों ने सूरज के स्कूल में आने के बाबत स्कूल स्टाफ से जानकारी जुटाई। करीब साढे़ सात बजे इसकी सूचना पुलिस को दी गई। परिजन रातभर सूरज को खोजते रहे, मगर कोई सुराग नहीं लगा। सुबह भी पुलिस व परिजनों ने खोजबीन की।
दोपहर करीब एक बजे डीएसपी अमित भाटिया सिविल लाइन थाना में परिजनों से बातचीत के बाद पुलिस कर्मियों की बच्चे की खोजबीन के लिए अलग-अलग ड्यूटी लगा रहे थे तो फोन आया कि सूरज घर लौट आया हैै। जिसके बाद परिजन व पुलिस मनोज के घर पहुंचे।
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चार युवकों ने खेत में बने कमरे में रखा बंद
घर लौटे सातवीं कक्षा के छात्र सूरज ने बताया कि उसके छोटे भाई साहिल को कॉपी लेनी थी। वह स्कूल के बाहर बनी दुकान पर गए। दुकान बंद थी। इसी दौरान उसे उसका दोस्त आता दिखाई दिया। जिसके चलते साहिल को उसने स्कूल में चलने के लिए कहा। इसी दौरान एक ओमनी वैन आकर रूकी और उसमें सवार चार युवकाें ने उसका मुंह बंदकर अंदर खींच लिया।
शोर मचाने पर जान से मारने की धमकी दी। वे उसे दिनोद रोड पर ले गए और खेत में बने एक कमरे में बंद रखा। रास्ते में उससे नाम पूछा और कुछ सूंघाकर बेहोश कर दिया। दिन व रात को खाने के लिए कुछ नहीं दिया। रात को भी कुछ सूंघाकर बेहोश किया गया। सुबह वह किसी तरह बाहर की कुंडी खोलकर वहां से निकला।
भागकर अपहरणकर्ताओं को चकमा दिया। रास्ते में एक मोटरसाइकिल वाले भैया के फोन से घर फोन किया और उन्होंने ही उसे ऑटो मार्केट के पास बने पेट्रोल पंप तक छोड़ा।
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संदिग्ध है बच्चे के अपहरण की कहानी
बच्चे सूरज के अपहरण की कहानी को पुलिस संदिग्ध मान रही है। पुलिस बच्चे को लेकर दिनोद गांव के खेतों में भी गई। बच्चे ने पहले एक कमरा दिखाया और बताया कि इसमें उसे रखा गया। कमरे के पास जाकर देखा तो कमरा पूरी तरह तूड़े (पशुचारे) से भरा था और बाहर ताला लगा था।
ताले पर भी मकड़ी का जाल लगा था। इसके बाद बच्चे ने कहा कि यह नहीं दूसरा कमरा है। दूसरा कमरा दिखाया, वहां भी पहले जैसे हालात मिले। कमरा पूरी तरह तूड़ा से भरा था और बाहर ताला लगा था। दोनोें जगह गलत होने के बाद पुलिस बच्चे को लेकर उसके स्कूल गई।
जहां प्रिंसिपल से बच्चे की पढ़ाई के बारे में बात की तो प्रिंसिपल ने बताया कि सूरज पढ़ाई में ठीक है। बच्चे ने बताया कि स्कूल के पास से उसका अपहरण किया गया। स्कूल लगने के समय स्कूल के पास काफी भीड़ रहती है मगर किसी ने बच्चे का अपहरण होते नहीं देखा।
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लाल को पाकर परिवार वालों के चेहरे खिले
29 घंटे बाद अपने लाल को पाकर माता-पिता के साथ परिवार वाले भी खुश हैं। सूरज की माता रेणु ने मिलते ही उसे गले लगा लिया। बच्चे के पिता मनोज ने बताया कि वह गुड़गांव में जॉब करता है। शनिवार सायं उसे सूरज के नहीं लौटने की खबर मिली। जिसके बाद रात को ही घर लौटा और खोजबीन शुरू की। परिवार वाले शनिवार सायं साढे़ तीन बजे के बाद से ही सूरज को खोजने में जुटे थे। अब सूरज मिल गया है, पूरा परिवार तनाव में था, अब राहत मिली है।