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बच्चे की हालत में सुधार, पीया दूध
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अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी। सामान्य अस्पताल परिसर में पॉलिथीन में लिपटे मिले नवजात की हालत में 24 घंटे बाद सुधार हुआ है। बुधवार को बच्चा सामान्य बच्चों की तरह हरकतें करता नजर आया। रोया और उसे दूध भी पिलाया गया। बच्चे को पांच से छह दिन तक चिकित्सकों की निगरानी में रखा जाएगा। समाचार पत्रों में लावारिस बच्चा मिलने की सूचना पर अनेक लोग अस्पताल में उसे गोद लेने पहुंचे। जिससे चिकित्सकों को भी परेशानी झेलनी पड़ी।
उल्लेखनीय है कि मंगलवार सुबह करीब आठ बजे सामान्य अस्पताल में नीकू वार्ड के पास बने डीआईसी सेंटर के साथ दीवार के कोने में एक काले रंग की पॉलिथीन में नवजात बच्चा मिला था। चिकित्सकों के अनुसार बच्चे का जन्म 12 से 14 घंटे के दौरान ही हुआ था। ठंड से उसके शरीर का तापमान काफी कम 25 डिग्री तक पहुंच गया था।
बुधवार को चिकित्सकों की 24 घंटे की मेहनत के कारण बच्चे की हालत में सुधार हुआ। बुधवार को बच्चा सामान्य बच्चों की तरह नजर आया। हाथ-पांव हिलाए वहीं रोया भी। चिकित्सकों और स्टाफ टीम ने उसे दूध भी पिलाया। वहीं सीडब्ल्यूसी चेयरमैन सुभाष जिंदल, लीगल प्रोबेशन ऑफिसर मनोज कुमार ने भी पहुंचकर बच्चे की हालत जानी।
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रवि या मंगल नाम रखने पर विचार
स्टाफ सदस्यों ने बच्चे का नाम भी सोचने पर विचार किया। बच्चा मंगलवार सुबह मिला इस लिए मंगल नाम रखने की सलाह दी गई। वहीं इस दिन रविदास जयंती थी तो रवि नाम रखने की भी बात आई।
गोद लेने वाले बने परेशानी
समाचार पत्रों में लावारिस बच्चा मिलने की सूचना पर काफी संख्या में लोग अस्पताल में बच्चे को गोद लेने पहुंचे। चिकित्सकों के सामने गुहार लगाई। अनेक नेताओं के फोन भी करवाए। सभी को बताया गया कि यहां से बच्चे को गोद नहीं दिया जा सकता।
बच्चे की हालत में अब सुधार हुआ है। आज उसने सामान्य बच्चों की तरह एक्टिविटी की है। बच्चा रोया भी है और दूध भी पीया है। कुछ दिन उसे चिकित्सकों की निगरानी में रखा जाएगा।
डॉ. राज महता, बाल रोग विशेषज्ञ
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भिवानी। सामान्य अस्पताल परिसर में पॉलिथीन में लिपटे मिले नवजात की हालत में 24 घंटे बाद सुधार हुआ है। बुधवार को बच्चा सामान्य बच्चों की तरह हरकतें करता नजर आया। रोया और उसे दूध भी पिलाया गया। बच्चे को पांच से छह दिन तक चिकित्सकों की निगरानी में रखा जाएगा। समाचार पत्रों में लावारिस बच्चा मिलने की सूचना पर अनेक लोग अस्पताल में उसे गोद लेने पहुंचे। जिससे चिकित्सकों को भी परेशानी झेलनी पड़ी।
उल्लेखनीय है कि मंगलवार सुबह करीब आठ बजे सामान्य अस्पताल में नीकू वार्ड के पास बने डीआईसी सेंटर के साथ दीवार के कोने में एक काले रंग की पॉलिथीन में नवजात बच्चा मिला था। चिकित्सकों के अनुसार बच्चे का जन्म 12 से 14 घंटे के दौरान ही हुआ था। ठंड से उसके शरीर का तापमान काफी कम 25 डिग्री तक पहुंच गया था।
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बुधवार को चिकित्सकों की 24 घंटे की मेहनत के कारण बच्चे की हालत में सुधार हुआ। बुधवार को बच्चा सामान्य बच्चों की तरह नजर आया। हाथ-पांव हिलाए वहीं रोया भी। चिकित्सकों और स्टाफ टीम ने उसे दूध भी पिलाया। वहीं सीडब्ल्यूसी चेयरमैन सुभाष जिंदल, लीगल प्रोबेशन ऑफिसर मनोज कुमार ने भी पहुंचकर बच्चे की हालत जानी।
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रवि या मंगल नाम रखने पर विचार
स्टाफ सदस्यों ने बच्चे का नाम भी सोचने पर विचार किया। बच्चा मंगलवार सुबह मिला इस लिए मंगल नाम रखने की सलाह दी गई। वहीं इस दिन रविदास जयंती थी तो रवि नाम रखने की भी बात आई।
गोद लेने वाले बने परेशानी
समाचार पत्रों में लावारिस बच्चा मिलने की सूचना पर काफी संख्या में लोग अस्पताल में बच्चे को गोद लेने पहुंचे। चिकित्सकों के सामने गुहार लगाई। अनेक नेताओं के फोन भी करवाए। सभी को बताया गया कि यहां से बच्चे को गोद नहीं दिया जा सकता।
बच्चे की हालत में अब सुधार हुआ है। आज उसने सामान्य बच्चों की तरह एक्टिविटी की है। बच्चा रोया भी है और दूध भी पीया है। कुछ दिन उसे चिकित्सकों की निगरानी में रखा जाएगा।
डॉ. राज महता, बाल रोग विशेषज्ञ