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जीआरपीएफ के सदस्यों ने दो बिछड़े बच्चों को मा बाप से मिलाया
Updated Sun, 25 Mar 2018 12:52 AM IST
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चाइल्ड हेल्पलाइन पर फोन कर बोला बच्चा, मेरा कोई नहीं है
भिवानी।
बामला गांव का 13 साल के बच्चे ने चाइल्ड हेल्पलाइन पर फोन कर बताया कि उसे माता और नानी से घर से निकाल दिया है और उसके माता-पिता की बनती नहीं है। इसके बाद बच्चा बाल कल्याण समिति के पास पहुंचा। समिति ने बच्चे को फिलहाल बाल आश्रम भेज दिया और परिजनों से संपर्क करने का प्रयास शुरू कर दिया। बच्चे ने बताया कि वह बामला गांव का रहने वाला है। उसके माता-पिता पिछले डेढ़ साल से अलग रह रहे हैं। इसलिए वह डेढ़ साल से अपनी माता के साथ ननिहाल में रह रहा है। 20 मार्च को उसकी माता और नानी ने यह कहते हुए घर से बाहर निकाल दिया कि अब तेरे पेपर हो गए हैं। अब तूं कहीं भी रह, उन्हें कोई मतलब नहीं। समिति की सदस्य मीना शर्मा ने बताया कि बच्चे ने अपने पिता, माता और नानी के मोबाइल नंबर दिए हैं। इन नंबरों पर संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन किसी पर बात नहीं हो पाई।
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दो बिछड़े बच्चों को मां बाप से मिलाया
भिवानी।
मामूली बात पर अपने परिजनों नाराज होकर घर से निकले दो बच्चे कानपुर से यहां पहुंच गए। कालिंदी एक्सप्रेस ट्रेन से यहां स्टेशन पर पहुंचे दोनों बच्चों को रेलवे पुलिस ने बाल कल्याण समिति के सुपुर्द कर दिया। समिति व पुलिस ने दोनों बच्चों के परिजनों को ढूंढा और शनिवार को माता-पिता को सौंप दिया।
दोनों बच्चे तीन दिन पहले यहां पहुंचे थे। बाल कल्याण समिति व तीन शाखा भिवानी के प्रयास से उनके माता पिता को खोजा गया। वहीं राज्य अपराध शाखा के धर्मेंद्र सिंह ने उनके माता पिता से संपर्क करते हुए उन्हें बुलाया। समिति ने उनके माता पिता से जानकारी व पहचान करवाते हुए बच्चों को सौंप दिया। समिति की सदस्य मीना शर्मा ने बताया कि अपराध शाखा के सहयोग से यह संभव हो पाया है। समिति की सदस्या समिता यादव, सुमन बजाज, प्रदीप कुमार की उपस्थिति में बच्चों को भेजा गया।
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भिवानी।
बामला गांव का 13 साल के बच्चे ने चाइल्ड हेल्पलाइन पर फोन कर बताया कि उसे माता और नानी से घर से निकाल दिया है और उसके माता-पिता की बनती नहीं है। इसके बाद बच्चा बाल कल्याण समिति के पास पहुंचा। समिति ने बच्चे को फिलहाल बाल आश्रम भेज दिया और परिजनों से संपर्क करने का प्रयास शुरू कर दिया। बच्चे ने बताया कि वह बामला गांव का रहने वाला है। उसके माता-पिता पिछले डेढ़ साल से अलग रह रहे हैं। इसलिए वह डेढ़ साल से अपनी माता के साथ ननिहाल में रह रहा है। 20 मार्च को उसकी माता और नानी ने यह कहते हुए घर से बाहर निकाल दिया कि अब तेरे पेपर हो गए हैं। अब तूं कहीं भी रह, उन्हें कोई मतलब नहीं। समिति की सदस्य मीना शर्मा ने बताया कि बच्चे ने अपने पिता, माता और नानी के मोबाइल नंबर दिए हैं। इन नंबरों पर संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन किसी पर बात नहीं हो पाई।
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दो बिछड़े बच्चों को मां बाप से मिलाया
भिवानी।
मामूली बात पर अपने परिजनों नाराज होकर घर से निकले दो बच्चे कानपुर से यहां पहुंच गए। कालिंदी एक्सप्रेस ट्रेन से यहां स्टेशन पर पहुंचे दोनों बच्चों को रेलवे पुलिस ने बाल कल्याण समिति के सुपुर्द कर दिया। समिति व पुलिस ने दोनों बच्चों के परिजनों को ढूंढा और शनिवार को माता-पिता को सौंप दिया।
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दोनों बच्चे तीन दिन पहले यहां पहुंचे थे। बाल कल्याण समिति व तीन शाखा भिवानी के प्रयास से उनके माता पिता को खोजा गया। वहीं राज्य अपराध शाखा के धर्मेंद्र सिंह ने उनके माता पिता से संपर्क करते हुए उन्हें बुलाया। समिति ने उनके माता पिता से जानकारी व पहचान करवाते हुए बच्चों को सौंप दिया। समिति की सदस्य मीना शर्मा ने बताया कि अपराध शाखा के सहयोग से यह संभव हो पाया है। समिति की सदस्या समिता यादव, सुमन बजाज, प्रदीप कुमार की उपस्थिति में बच्चों को भेजा गया।
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