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तीन घंटे के हंगामे के बाद 55 सौ कर्मचारियों ने दी गिरफ्तारियां
Updated Wed, 31 Jan 2018 12:31 AM IST
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जेल भरो आंदोलन : लघु सचिवालय के अंदर जाने से रोका तो पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई धक्का-मुक्की
भिवानी। संयुक्त ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर मंगलवार को आशा वर्कर, आंगनबाड़ी वर्कर सहित मजदूर संगठनों के सदस्यों ने जेल भरो आंदोलन के तहत शहर में विरोध प्रदर्शन कर गिरफ्तारी दी। प्रदर्शनकारी भारी संख्या में मुख्य मार्गों से प्रदर्शन करते हुए लघु सचिवालय पहुंचे। यहां भारी संख्या में तैनात पुलिस बल प्रदर्शनकारियों ने लघु सचिवालय के अंदर घुसने नहीं दिया। इस बात पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच जमकर धक्का मुक्की हुई। इस दौरान पुलिस ने एक कर्मचारी का गिरेबान पकड़ा तो प्रदर्शनकारी बिफर गए। करीब तीन घंटे तक यहां रोड जाम किए रखा और अधिकारियों को लघु सचिवालय से बाहर तक नहीं आने दिया। कर्मचारियों की गिरफ्तारी के लिए यहां पर चार बसें बुलाई गई, लेकिन गिरफ्तारी देने वालों की संख्या ज्यादा होने पर डीएसपी ने 55 सौ कर्मचारियों की गिरफ्तारी वहीं दिखाई। मौके पर पहुंचे एसडीएम सतीश कुमार सैनी ने कर्मचारियों को रिहा करने की घोषणा की।
नेहरू पार्क में ट्रेड यूनियनों इंटक, एटक, एचएमएस, सीटू, ऑल इंडिया यूटीयूसीए सर्व कर्मचारी संघ, एवं हरियाणा कर्मचारी महासंघ के आह्वान पर गिरफ्तारी देने के लिए जिले भर से भारी संख्या में मजदूर, आशा वर्कर, आंगनबाड़ी महिलाएं एवं कर्मचारी एकत्रित हुए। प्रदर्शनकारी पुरुषोत्तम इंटक, ईश्वर शर्मा एटक, सूरजभान सिधनवा एचएमएस, अनिल कुमार सीटू, राजकुमार बासिया एआईयूटीयूसी, नरेंद्र दिनोद सर्व कर्मचारी संघ एवं सूरजमल कर्मचारी महासंघ की संयुक्त अध्यक्षता में प्रदर्शन करते हुए लघु सचिवालय पहुंचे। कर्मचारियों ने पुलिस को धकेल कर लघु सचिवालय के अंदर घुसने का प्रयास किया।
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कर्मचारी की गिरेबान पकड़ने पर हुआ हंगामा
प्रदर्शन के दौरान एक पुलिस वाले ने कर्मचारी की गिरेबान पकड़ ली जिससे बवाल खड़ा हो गया। इस दौरान पुलिस और कर्मचारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई। कर्मचारियों ने पुलिस को भी खरी-खोटी सुनाई। बाद में डीएसपी जगत सिंह मोर ने मौके पर पहुंचकर मामले को शांत कराया। एटक के बलदेव घनघस, एचएमएस के रतन लोहिया, माकपा के ओम प्रकाश, ऑल इंडिया यूटीयूसी के धर्मबीर, सर्व कर्मचारी संघ के सुखदर्शन सरोहा, हरियाणा कर्मचारी महासंघ के नेता वीरेंद्र धनखड़, आशा की कमलेश, कमल कांगड़ा, पुरुषोत्तम दानव,रामअवतार खोरड़ा आदि गिरफ्तारी देने वालों में मुख्य है।
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कर्मचारियों ने लगाया जाम
पुरुष और महिलाएं लघु प्रदर्शन के दौरान लघु सचिवालय के मुख्य मार्ग पर धरना देकर बैठ गई। यहां से एक भी वाहन को इधर से उधर नहीं जाने दिया। इसके बाद पुलिस को पंचायत भवन के पास से ही वाहनों का रूट डायवर्ट करना पड़ा।
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डीएसपी ने किया गिरफ्तार तो एसडीएम ने मौके पर ही किया रिहा
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों को डीएसपी हेडक्वाटर जगत सिंह मोर गिरफ्तार करने के आदेश दिए। इसके बाद पुलिस की चार बसें लघु सचिवालय बुलाई गई। चारों बसों में कर्मचारी भर गए और कर्मचारियों को ले जाने के लिए बसें कम पड़ गई। इसलिए 55 सौ मजदूर, कर्मचारी, महिलाओं को मौके पर ही गिरफ्तारी दिखाई गई। मौके पर पहुंचे एसडीएम भिवानी सतीश सैनी ने सभी को तत्काल रिहा कर दिया।
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ये रही मुख्य मांगें
- शिक्षा बोर्ड के घोटाले की जांच सीबीआई से करवाने
- 15 अगस्त 2017 में मारे गए सफाई कर्मचारी के परिजनों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने
- प्रेरकों को बकाया भुगतान करने
- आशा वर्करों का वेतन बढ़ाने
- कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने
- कर्मचारियों को समय पर वेतन देने
- सभी विभागों में नई भर्ती करने
- निजीकरण व ठेका प्रथा बंद करने
- आंगनबाड़ी कर्मचारियों को स्थायी कर्मचारी घोषित करने
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भिवानी। संयुक्त ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर मंगलवार को आशा वर्कर, आंगनबाड़ी वर्कर सहित मजदूर संगठनों के सदस्यों ने जेल भरो आंदोलन के तहत शहर में विरोध प्रदर्शन कर गिरफ्तारी दी। प्रदर्शनकारी भारी संख्या में मुख्य मार्गों से प्रदर्शन करते हुए लघु सचिवालय पहुंचे। यहां भारी संख्या में तैनात पुलिस बल प्रदर्शनकारियों ने लघु सचिवालय के अंदर घुसने नहीं दिया। इस बात पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच जमकर धक्का मुक्की हुई। इस दौरान पुलिस ने एक कर्मचारी का गिरेबान पकड़ा तो प्रदर्शनकारी बिफर गए। करीब तीन घंटे तक यहां रोड जाम किए रखा और अधिकारियों को लघु सचिवालय से बाहर तक नहीं आने दिया। कर्मचारियों की गिरफ्तारी के लिए यहां पर चार बसें बुलाई गई, लेकिन गिरफ्तारी देने वालों की संख्या ज्यादा होने पर डीएसपी ने 55 सौ कर्मचारियों की गिरफ्तारी वहीं दिखाई। मौके पर पहुंचे एसडीएम सतीश कुमार सैनी ने कर्मचारियों को रिहा करने की घोषणा की।
नेहरू पार्क में ट्रेड यूनियनों इंटक, एटक, एचएमएस, सीटू, ऑल इंडिया यूटीयूसीए सर्व कर्मचारी संघ, एवं हरियाणा कर्मचारी महासंघ के आह्वान पर गिरफ्तारी देने के लिए जिले भर से भारी संख्या में मजदूर, आशा वर्कर, आंगनबाड़ी महिलाएं एवं कर्मचारी एकत्रित हुए। प्रदर्शनकारी पुरुषोत्तम इंटक, ईश्वर शर्मा एटक, सूरजभान सिधनवा एचएमएस, अनिल कुमार सीटू, राजकुमार बासिया एआईयूटीयूसी, नरेंद्र दिनोद सर्व कर्मचारी संघ एवं सूरजमल कर्मचारी महासंघ की संयुक्त अध्यक्षता में प्रदर्शन करते हुए लघु सचिवालय पहुंचे। कर्मचारियों ने पुलिस को धकेल कर लघु सचिवालय के अंदर घुसने का प्रयास किया।
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कर्मचारी की गिरेबान पकड़ने पर हुआ हंगामा
प्रदर्शन के दौरान एक पुलिस वाले ने कर्मचारी की गिरेबान पकड़ ली जिससे बवाल खड़ा हो गया। इस दौरान पुलिस और कर्मचारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई। कर्मचारियों ने पुलिस को भी खरी-खोटी सुनाई। बाद में डीएसपी जगत सिंह मोर ने मौके पर पहुंचकर मामले को शांत कराया। एटक के बलदेव घनघस, एचएमएस के रतन लोहिया, माकपा के ओम प्रकाश, ऑल इंडिया यूटीयूसी के धर्मबीर, सर्व कर्मचारी संघ के सुखदर्शन सरोहा, हरियाणा कर्मचारी महासंघ के नेता वीरेंद्र धनखड़, आशा की कमलेश, कमल कांगड़ा, पुरुषोत्तम दानव,रामअवतार खोरड़ा आदि गिरफ्तारी देने वालों में मुख्य है।
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कर्मचारियों ने लगाया जाम
पुरुष और महिलाएं लघु प्रदर्शन के दौरान लघु सचिवालय के मुख्य मार्ग पर धरना देकर बैठ गई। यहां से एक भी वाहन को इधर से उधर नहीं जाने दिया। इसके बाद पुलिस को पंचायत भवन के पास से ही वाहनों का रूट डायवर्ट करना पड़ा।
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डीएसपी ने किया गिरफ्तार तो एसडीएम ने मौके पर ही किया रिहा
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों को डीएसपी हेडक्वाटर जगत सिंह मोर गिरफ्तार करने के आदेश दिए। इसके बाद पुलिस की चार बसें लघु सचिवालय बुलाई गई। चारों बसों में कर्मचारी भर गए और कर्मचारियों को ले जाने के लिए बसें कम पड़ गई। इसलिए 55 सौ मजदूर, कर्मचारी, महिलाओं को मौके पर ही गिरफ्तारी दिखाई गई। मौके पर पहुंचे एसडीएम भिवानी सतीश सैनी ने सभी को तत्काल रिहा कर दिया।
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ये रही मुख्य मांगें
- शिक्षा बोर्ड के घोटाले की जांच सीबीआई से करवाने
- 15 अगस्त 2017 में मारे गए सफाई कर्मचारी के परिजनों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने
- प्रेरकों को बकाया भुगतान करने
- आशा वर्करों का वेतन बढ़ाने
- कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने
- कर्मचारियों को समय पर वेतन देने
- सभी विभागों में नई भर्ती करने
- निजीकरण व ठेका प्रथा बंद करने
- आंगनबाड़ी कर्मचारियों को स्थायी कर्मचारी घोषित करने