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दीक्षा समारोह में उपस्थित रहेंगे प्रशासन के अधिकारी
Updated Mon, 23 Apr 2018 01:32 AM IST
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25 अप्रैल को ही होगा मुकुल जैन का दीक्षा समारोह
अमर उजाला ब्यूरो
तोशाम।
25 अप्रैल को प्रस्तावित मुकुल जैन के दीक्षा समारोह को लेकर बाल अधिकार सरंक्षण आयोग की टीम ने लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह में दीक्षार्थी व अभिभावकों से बातचीत की। इसके साथ ही दीक्षा समारोह को लेकर मामले का पटाक्षेप हो गया। कार्यक्रम का आयोजन तय समय पर होगा। बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम के फैसले के मुताबिक दीक्षा समारोह प्रशासन की मौजूदगी में होगा और बच्चे को कोई पीड़ा न दी जाए, इसकी निगरानी रहेगी। समारोह के दौरान बच्चे के केश लोचन की प्रकिया प्रतिबंधित रहेगी। परंपराओं के निर्वहन के तौर पर पांच केश ही हस्तलोचन होंगे।
उल्लेखनीय है कि 14 अप्रैल को ईमेल के माध्यम से बिशन स्वरूप केडिया ने बाल अधिकार संरक्षण आयोग को शिकायत की थी कि नाबालिग बच्चे को गैरकानूनी तरीके से जैन मुनि बनाया जा रहा है। केडिया ने शिकायत में बताया था कि इससे बच्चे के अधिकारों का हनन हो रहा है। शिकायत के माध्यम से कार्यक्रम पर रोक लगाने की शिकायत थी। शिकायत पर बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ज्योति बैंदा ने आयोग के सदस्य सुशील वर्मा को जांच का जिम्मा सौंपा और पांच दिन में रिपोर्ट मांगी गई। आयोग सदस्य सुशील वर्मा 19 अप्रैल को जांच के लिए लोकनिर्माण विभाग के विश्राम गृह पंहुचे थे, लेकिन दीक्षार्थी मुकुल जैन व परिजन बाहर होने के कारण बातचीत नहीं हो सकी थी।
इसके मद्देनजर जांच अधिकारी सुशील वर्मा ने प्रशासन को 22 अप्रैल तक कार्यक्रम की अनुमति न देने की बात कही थी। इसके बाद मुकुल ने आयोग सदस्य सुशील वर्मा को बताया कि वह पढ़ाई से भी विमुख नहीं है। वह अक्षर ज्ञान की बजाए आध्यात्मिक ज्ञान पाना चाहता है। वह अपने आप को सुदृढ़ व सक्षम इंसान बनाकर समाज की सेवा करना चाहता है। गहन पड़ताल के बाद बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम ने कहा कि बच्चा दीक्षा ग्रहण कर सकता है, लेकिन दीक्षा समारोह के दौरान कोई पीड़ा दीक्षार्थी को नहीं दी जाएगी। दीक्षांत समारोह प्रशासन की मौजूदगी में होगा। बाल अधिकार संरक्षण आयोग के जांच अधिकारी सुशील वर्मा ने बताया कि बच्चे के बालिग होने तक उसके अधिकारों का ध्यान रखना होगा।
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अमर उजाला ब्यूरो
तोशाम।
25 अप्रैल को प्रस्तावित मुकुल जैन के दीक्षा समारोह को लेकर बाल अधिकार सरंक्षण आयोग की टीम ने लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह में दीक्षार्थी व अभिभावकों से बातचीत की। इसके साथ ही दीक्षा समारोह को लेकर मामले का पटाक्षेप हो गया। कार्यक्रम का आयोजन तय समय पर होगा। बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम के फैसले के मुताबिक दीक्षा समारोह प्रशासन की मौजूदगी में होगा और बच्चे को कोई पीड़ा न दी जाए, इसकी निगरानी रहेगी। समारोह के दौरान बच्चे के केश लोचन की प्रकिया प्रतिबंधित रहेगी। परंपराओं के निर्वहन के तौर पर पांच केश ही हस्तलोचन होंगे।
उल्लेखनीय है कि 14 अप्रैल को ईमेल के माध्यम से बिशन स्वरूप केडिया ने बाल अधिकार संरक्षण आयोग को शिकायत की थी कि नाबालिग बच्चे को गैरकानूनी तरीके से जैन मुनि बनाया जा रहा है। केडिया ने शिकायत में बताया था कि इससे बच्चे के अधिकारों का हनन हो रहा है। शिकायत के माध्यम से कार्यक्रम पर रोक लगाने की शिकायत थी। शिकायत पर बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ज्योति बैंदा ने आयोग के सदस्य सुशील वर्मा को जांच का जिम्मा सौंपा और पांच दिन में रिपोर्ट मांगी गई। आयोग सदस्य सुशील वर्मा 19 अप्रैल को जांच के लिए लोकनिर्माण विभाग के विश्राम गृह पंहुचे थे, लेकिन दीक्षार्थी मुकुल जैन व परिजन बाहर होने के कारण बातचीत नहीं हो सकी थी।
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इसके मद्देनजर जांच अधिकारी सुशील वर्मा ने प्रशासन को 22 अप्रैल तक कार्यक्रम की अनुमति न देने की बात कही थी। इसके बाद मुकुल ने आयोग सदस्य सुशील वर्मा को बताया कि वह पढ़ाई से भी विमुख नहीं है। वह अक्षर ज्ञान की बजाए आध्यात्मिक ज्ञान पाना चाहता है। वह अपने आप को सुदृढ़ व सक्षम इंसान बनाकर समाज की सेवा करना चाहता है। गहन पड़ताल के बाद बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम ने कहा कि बच्चा दीक्षा ग्रहण कर सकता है, लेकिन दीक्षा समारोह के दौरान कोई पीड़ा दीक्षार्थी को नहीं दी जाएगी। दीक्षांत समारोह प्रशासन की मौजूदगी में होगा। बाल अधिकार संरक्षण आयोग के जांच अधिकारी सुशील वर्मा ने बताया कि बच्चे के बालिग होने तक उसके अधिकारों का ध्यान रखना होगा।
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