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आशा कार्यकर्ताओं की हड़ताल से लड़खड़ाया पोलियो अभियान, 58 प्रतिशत बच्चों को ही पिलाई गई दवा
Updated Mon, 29 Jan 2018 12:14 AM IST
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आशा कार्यकर्ताओं की हड़ताल से लड़खड़ाया पोलियो अभियान, 58 प्रतिशत बच्चों को ही पिलाई गई दवा
भिवानी। जिले में 2100 आशा वर्करों की हड़ताल के चलते रविवार को पल्स पोलियो अभियान पर असर दिखा। ग्रामीण अंचल में काफी प्रभाव देखने को मिला। पहले दिन स्वास्थ्य विभाग अपने लक्ष्य से 42 प्रतिशत पीछे रह गया। आशा वर्कर सत प्रतिशत हड़ताल पर होने पर 58 प्रतिशत बच्चों को ही दवा पिलाया जा सका।
स्वास्थ्य विभाग ने एक लाख 24 हजार बच्चों को दवा पिलाने का लक्ष्य रखा है। पहले दिन ग्रामीण एरिया में 14 हजार 580 बच्चों को दवा पिलाई गई, जबकि शहरी क्षेत्र में 19 हजार 839 बच्चों को दवा पिलाई गई। जिले में आशा वर्करों ने मांगों को लेकर रविवार को पूर्ण रूप से हड़ताल रखी। आशा वर्करों के कंधे पर चलने वाला पल्स पोलियो अभियान व अन्य नेशनल हेल्थ मिशन से जुड़ी सेवाएं हड़ताल के कारण प्रभावित होती नजर आई। सबसे ज्यादा हड़ताल का असर ग्रामीण अंचल में चलने वाले पोलियो अभियान पर पड़ा। हड़ताल से निपटने के लिए यूं तो स्वास्थ्य विभाग ने कुछ एरिया में वालिंटियर की सेवाएं ली हुई थी, लेकिन वालियिंटरों को ग्रामीण क्षेत्र की पूरी जानकारी ना होने के कारण उनका सहयोग ज्यादा कारगर दिखाई नहीं दिया। स्थिति यह थी कि जिन सेंटरों पर तीन या फिर पांच हेल्थ कर्मचारी तैनात होने चाहिए थे वहां पर केवल दो से ही काम चलाया जा रहा था। कई सेंटरों पर तो हेल्थ कर्मचारी ना होने से बच्चों के अभिभावक एक स्थान से दूसरे स्थान पर भटकते रहे।
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डोर टू डोर अभियान पर ज्यादा असर के आसार
पहले दिन सेंटरों पर ही दवा पिलाने का काम किया गया, जबकि तीसरे दिन पोलियो की दवा डोर टू डोर जाकर पिलाने का है। इस बार मददगार रहने वाली आशा वर्कर ना होने से डोर टू डोर का अभियान पर असफल होता दिखाई दे रहा है। अभियान लक्ष्य पूरा करने में स्वास्थ्य विभाग को काफी मशक्कत करनी पड़ेगी।
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हड़ताल का असर पोलियो अभियान के साथ ही अनेक नेशनल हेल्थ सेवाओं पर पड़ा है। यह आंदोलन की पहली सफलता है। ग्रामीण एरिया में अनेक ऐसे सेंटर थे जहां पर एक भी हेल्थ कर्मचारी नहीं था। यह हड़ताल 29 व 30 जनवरी को भी जारी रहेगी। अभी सरकार ने मांगे पूरी नहीं हुई तो यह हड़ताल अनिश्चितकालीन में तब्दील कर दी जाएगी।
कमलेश देवी, प्रधान जिला आशा वर्कर यूनियन
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आशा वर्कर बेशक आज पूरी तरह से हड़ताल पर थी, लेकिन विभाग ने इसके लिए पहले से ही वालिंटियर्स लगाए हुए थे। इसकी वजह पोलियो अभियान पर ज्यादा असर नहीं पड़ा।
-रणदीप सिंह पूनिया, सीएमओ
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बहल में 68 प्रतिशत बच्चों को पिलाई दवा
बहल। बहल खंड में पांच वर्ष तक के कुल 5293 बच्चों में से 3579 बच्चों को पोलियो की दवा पिलाकर 67.62 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया गया। आशा वर्कर के हड़ताल पर होने के कारण आंगनबाड़ी वर्कर्स के अलावा वालियंटर्स की मदद से इस लक्ष्य तक पहुंचा जा सका।
अपनी मांगों के समर्थन में बहल पीएचसी से जुड़ी 52 आशा वर्कर हड़ताल पर रही। पल्स पोलियो अभियान में कोई बाधा न आए इसलिए स्वास्थ्य विभाग ने पहले से तैयारियां की गई थी। हर बूथ पर पहले जहां दो आशा वर्कर की सेवाएं होती थी, आज वहां वालियंटर्स को लगाया गया था। अभियान को कामयाब बनाने के लिए बहल खंड के गांवों के लिए कुल 41 बूथ बनाए गए थे। इसके अलावा 1 ट्रांजिट व 2 मोबाइल टीमों में कार्यरत लोगों ने जगह-जगह जाकर बच्चों को दवा पिलाई। चिकित्सक डॉ. अजय श्योराण ने बताया कि बहल खंड में अभियान सही तरीके से चला तथा कहीं कोई बाधा नहीं हुई। कस्बे में अभियान की शुरुआत डॉ. अजय श्योराण, बीडीसी चेयरमैन प्रतिनिधि साधूराम पनिहार, हेल्थ इंस्पेक्टर शिवनारायण, एमपीएचडब्ल्यू संतोष एवं राजबीर, आंगनबाड़ी वर्कर रेणु सोनी ने किया।
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भिवानी। जिले में 2100 आशा वर्करों की हड़ताल के चलते रविवार को पल्स पोलियो अभियान पर असर दिखा। ग्रामीण अंचल में काफी प्रभाव देखने को मिला। पहले दिन स्वास्थ्य विभाग अपने लक्ष्य से 42 प्रतिशत पीछे रह गया। आशा वर्कर सत प्रतिशत हड़ताल पर होने पर 58 प्रतिशत बच्चों को ही दवा पिलाया जा सका।
स्वास्थ्य विभाग ने एक लाख 24 हजार बच्चों को दवा पिलाने का लक्ष्य रखा है। पहले दिन ग्रामीण एरिया में 14 हजार 580 बच्चों को दवा पिलाई गई, जबकि शहरी क्षेत्र में 19 हजार 839 बच्चों को दवा पिलाई गई। जिले में आशा वर्करों ने मांगों को लेकर रविवार को पूर्ण रूप से हड़ताल रखी। आशा वर्करों के कंधे पर चलने वाला पल्स पोलियो अभियान व अन्य नेशनल हेल्थ मिशन से जुड़ी सेवाएं हड़ताल के कारण प्रभावित होती नजर आई। सबसे ज्यादा हड़ताल का असर ग्रामीण अंचल में चलने वाले पोलियो अभियान पर पड़ा। हड़ताल से निपटने के लिए यूं तो स्वास्थ्य विभाग ने कुछ एरिया में वालिंटियर की सेवाएं ली हुई थी, लेकिन वालियिंटरों को ग्रामीण क्षेत्र की पूरी जानकारी ना होने के कारण उनका सहयोग ज्यादा कारगर दिखाई नहीं दिया। स्थिति यह थी कि जिन सेंटरों पर तीन या फिर पांच हेल्थ कर्मचारी तैनात होने चाहिए थे वहां पर केवल दो से ही काम चलाया जा रहा था। कई सेंटरों पर तो हेल्थ कर्मचारी ना होने से बच्चों के अभिभावक एक स्थान से दूसरे स्थान पर भटकते रहे।
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डोर टू डोर अभियान पर ज्यादा असर के आसार
पहले दिन सेंटरों पर ही दवा पिलाने का काम किया गया, जबकि तीसरे दिन पोलियो की दवा डोर टू डोर जाकर पिलाने का है। इस बार मददगार रहने वाली आशा वर्कर ना होने से डोर टू डोर का अभियान पर असफल होता दिखाई दे रहा है। अभियान लक्ष्य पूरा करने में स्वास्थ्य विभाग को काफी मशक्कत करनी पड़ेगी।
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हड़ताल का असर पोलियो अभियान के साथ ही अनेक नेशनल हेल्थ सेवाओं पर पड़ा है। यह आंदोलन की पहली सफलता है। ग्रामीण एरिया में अनेक ऐसे सेंटर थे जहां पर एक भी हेल्थ कर्मचारी नहीं था। यह हड़ताल 29 व 30 जनवरी को भी जारी रहेगी। अभी सरकार ने मांगे पूरी नहीं हुई तो यह हड़ताल अनिश्चितकालीन में तब्दील कर दी जाएगी।
कमलेश देवी, प्रधान जिला आशा वर्कर यूनियन
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आशा वर्कर बेशक आज पूरी तरह से हड़ताल पर थी, लेकिन विभाग ने इसके लिए पहले से ही वालिंटियर्स लगाए हुए थे। इसकी वजह पोलियो अभियान पर ज्यादा असर नहीं पड़ा।
-रणदीप सिंह पूनिया, सीएमओ
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बहल में 68 प्रतिशत बच्चों को पिलाई दवा
बहल। बहल खंड में पांच वर्ष तक के कुल 5293 बच्चों में से 3579 बच्चों को पोलियो की दवा पिलाकर 67.62 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया गया। आशा वर्कर के हड़ताल पर होने के कारण आंगनबाड़ी वर्कर्स के अलावा वालियंटर्स की मदद से इस लक्ष्य तक पहुंचा जा सका।
अपनी मांगों के समर्थन में बहल पीएचसी से जुड़ी 52 आशा वर्कर हड़ताल पर रही। पल्स पोलियो अभियान में कोई बाधा न आए इसलिए स्वास्थ्य विभाग ने पहले से तैयारियां की गई थी। हर बूथ पर पहले जहां दो आशा वर्कर की सेवाएं होती थी, आज वहां वालियंटर्स को लगाया गया था। अभियान को कामयाब बनाने के लिए बहल खंड के गांवों के लिए कुल 41 बूथ बनाए गए थे। इसके अलावा 1 ट्रांजिट व 2 मोबाइल टीमों में कार्यरत लोगों ने जगह-जगह जाकर बच्चों को दवा पिलाई। चिकित्सक डॉ. अजय श्योराण ने बताया कि बहल खंड में अभियान सही तरीके से चला तथा कहीं कोई बाधा नहीं हुई। कस्बे में अभियान की शुरुआत डॉ. अजय श्योराण, बीडीसी चेयरमैन प्रतिनिधि साधूराम पनिहार, हेल्थ इंस्पेक्टर शिवनारायण, एमपीएचडब्ल्यू संतोष एवं राजबीर, आंगनबाड़ी वर्कर रेणु सोनी ने किया।