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विधानसभा उपसचिव ने उपायुक्त भिवानी को दिए जांच के आदेश
Updated Sun, 28 Oct 2018 01:03 AM IST
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चांग। हलका बवानीखेड़ा विधायक बिशंबर वाल्मीकि अपने मकान के निर्माण के लिए चर्चा में है। आरोप है कि जो जगह दिखाकर लोन लिया गया वहां मकान नहीं बनाया। 40 लाख रुपये का लोन लेकर उसका दुरुपयोग किया गया है। शिकायत के बाद विधानसभा उप सचिव ने डीसी को पत्र लिखकर जांच के निर्देश दिए हैं। वहीं, विधायक ने आरोपों को नकारते हुए कहा कि उन्होंने लोन में कुछ भी गलत नहीं किया और नोटिस का जवाब भी दे दिया है। लोन की किस्त का समय पर भुगतान किया जा रहा है। कुछ लोग उनकी छवि खराब करना चाहते हैं।
विधानसभा उप सचिव की ओर से भेजे गए पत्र में लिखा गया है कि विधायक वाल्मीकि ने मकान निर्माण के लिए लोन लिया था। जो जगह दिखाई थी, तहसीलदार व संबंधित पटवारी ने प्लॉट की रिपोर्ट दी थी। जिसके बाद 14 जुलाई 2015 को 20 लाख और तीन सितंबर 2015 को 20 लाख रुपये की राशि लोन स्वरूप दी गई। गांव खरक निवासी प्रदीप ने मामले में 10 मार्च 2018 को आरटीआई में जानकारी मांगी थी कि विधायक ने मकान निर्माण के लिए कौन-सी जगह दर्शाई है। आरटीआई में यह भी पूछा था कि वह जगह लाल डोरे में आती है या नहीं। आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार विधायक ने जिस जगह को मकान निर्माण के लिए लोन में दर्शाया गया था, वह लाल डोरे की जमीन है। प्रदीप ने मामले में गड़बड़ झाले का अंदेशा होने पर आरटीआई की जानकारी को साथ संलग्न करके विधानसभा स्पीकर को शिकायत दी थी। विधानसभा के उप सचिव ने मामले में संज्ञान लेते हुए उपायुक्त भिवानी को जांच करके जल्द रिपोर्ट करने के आदेश जारी किए हैं।
29 अक्तूबर को विधायक कार्यालय की पैमाईश
गांव खरक निवासी शिकायतकर्ता प्रदीप ने बताया कि लोन जिस जगह को दिखाकर लिया गया है, वहां मकान नहीं बनाया गया। पंचायती भूमि पर भी कब्जे के आरोप लगाए। प्रदीप ने बताया कि मामले में गांव की पंचायती भूमि की पैमाईश करवाने के लिए वह कई बार अधिकारियों से मिल चुका था लेकिन किसी अधिकारी ने सुनवाई नहीं की। इस मामले में कोई कार्रवाई न होता देख उसने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। जिसकी सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने बीडीपीओ भिवानी को आदेश देते हुए 29 अक्तूबर को गांव खरक में स्थित विधायक के कार्यालय की पैमाईश करने के लिए कहा है।
विधानसभा उप सचिव की ओर से भेजे गए पत्र में लिखा गया है कि विधायक वाल्मीकि ने मकान निर्माण के लिए लोन लिया था। जो जगह दिखाई थी, तहसीलदार व संबंधित पटवारी ने प्लॉट की रिपोर्ट दी थी। जिसके बाद 14 जुलाई 2015 को 20 लाख और तीन सितंबर 2015 को 20 लाख रुपये की राशि लोन स्वरूप दी गई। गांव खरक निवासी प्रदीप ने मामले में 10 मार्च 2018 को आरटीआई में जानकारी मांगी थी कि विधायक ने मकान निर्माण के लिए कौन-सी जगह दर्शाई है। आरटीआई में यह भी पूछा था कि वह जगह लाल डोरे में आती है या नहीं। आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार विधायक ने जिस जगह को मकान निर्माण के लिए लोन में दर्शाया गया था, वह लाल डोरे की जमीन है। प्रदीप ने मामले में गड़बड़ झाले का अंदेशा होने पर आरटीआई की जानकारी को साथ संलग्न करके विधानसभा स्पीकर को शिकायत दी थी। विधानसभा के उप सचिव ने मामले में संज्ञान लेते हुए उपायुक्त भिवानी को जांच करके जल्द रिपोर्ट करने के आदेश जारी किए हैं।
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29 अक्तूबर को विधायक कार्यालय की पैमाईश
गांव खरक निवासी शिकायतकर्ता प्रदीप ने बताया कि लोन जिस जगह को दिखाकर लिया गया है, वहां मकान नहीं बनाया गया। पंचायती भूमि पर भी कब्जे के आरोप लगाए। प्रदीप ने बताया कि मामले में गांव की पंचायती भूमि की पैमाईश करवाने के लिए वह कई बार अधिकारियों से मिल चुका था लेकिन किसी अधिकारी ने सुनवाई नहीं की। इस मामले में कोई कार्रवाई न होता देख उसने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। जिसकी सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने बीडीपीओ भिवानी को आदेश देते हुए 29 अक्तूबर को गांव खरक में स्थित विधायक के कार्यालय की पैमाईश करने के लिए कहा है।
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