युवक को डेंगू, अस्पताल में कराया गया दाखिल
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अंबाला में डेंगू का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। बुधवार को अंबाला सिटी सिविल अस्पताल में डेंगू पीड़ित एक मरीज को दाखिल कराया गया है। बताया जाता है कि यह मरीज गांव जटवाड़ का रहने वाला है और यह पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहा था। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग ने मरीज का इलाज शुरू कर दिया है, जबकि उसकी हालत पर नजर रखी जा रही है।
जटवाड़ का रहने वाला कैप्टन बीते दिनों पटियाला में अपनी रिश्तेदारी में गया हुआ था। वहां पर वह बीमार हो गया और उसने वहीं पर एक क्लीनिक में अपना इलाज भी कराया। यहां पर मरीज के लैब टेस्ट किए गए, जिसमें उसे डेंगू की संभावना बताई गई। इसके बाद यह मरीज अपने घर लौट आया, लेकिन उसकी तबीयत में सुधार नहीं हुआ। इसके चलते अंबाला सिटी सिविल अस्पताल में मरीज ने अपना ब्लड टैस्ट कराया, जबकि यह मरीज दवा लेकर अपने घर चला गया। इसी दौरान स्वास्थ्य विभाग ने मरीज को फोन किया और बताया कि मरीज को डेंगू है और उसे अस्पताल में एडमिट कराना होगा। यह सुनकर परिवार के भी होश उड़ गए और तुरंत उसे अंबाला सिटी के सिविल अस्पताल में लाया गया। यहां पर मरीज को दाखिल कर लिया गया और उसकी सेहत पर नजर रखी जा रही है।
रोजाना हो सकता है मरीज का टेस्ट चिकित्सकों की मानें, तो मरीज को फिलहाल अंडर ऑब्जर्वेशन रखा गया है। मरीज की हालत पर नजर रखी जा रही है, जबकि रूटीन में रोजाना ही मरीज के ब्लड टेस्ट किए जाएंगे, ताकि पता चल सके कि मरीज की प्लेटलेट्स काउंट का स्तर कितना है। इसी आधार पर आगे की ट्रीटमेंट चलेगी।
अंबाला में लगातार सामने आ रहे मामला डेंगू के मरीजों के मामले अब लगातार सामने आने लगे हैं। निजी क्लीनिकों व अस्पतालों की मानें, तो जिसे भी बुखार है, उसे डेंगू टेस्ट के लिए कहा जा रहा है, जबकि सिविल अस्पताल में भी ऐसे मरीजों का डेंगू टेस्ट कराया जा रहा है।
सिटी सिविल अस्पताल में जटवाड़ गांव के रहने वाले एक युवक को एडमिट किया गया है। इस युवक का डेंगू टेस्ट पाजीटिव आया है। मरीज की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। घबराने की आवश्यकता नहीं है, मरीज को लेकर डाक्टर पूरी तरह से सतर्क हैं। -डॉ. विनोद गुप्ता, सीएमओ, अंबाला
निजी अस्पतालों की रिपोर्ट पर स्वास्थ्य विभाग को भरोसा नहीं डेंगू को लेकर स्वास्थ्य विभाग की कसरत तेज होती जा रही है। अलर्ट जारी होने के बाद विभाग पूरी तरह से हरकत में आ गया है और निजी अस्पतालों को भी निर्देश जारी कर दिए गए हैं। लेकिन खास बात है कि निजी अस्पतालों की रिपोर्ट पर स्वास्थ्य विभाग को ज्यादा भरोसा नहीं है। प्राइवेट अस्पतालों व क्लीनिकों को निर्देश भेजे गए हैं कि डेंगू के मरीज (संभावित या पॉजीविट) के बारे में स्वास्थ्य विभाग को जानकारी दें। ऐसे में विभाग चाहता है कि सिविल अस्पताल अंबाला सिटी में किए जा रहे एलाइजा टेस्ट से ही मरीज की जांच की जाए। उल्लेखनीय है कि संदिग्ध डेंगू से अंबाला में जहां दो लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं सात केस सामने आ चुके हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के भी हाथ पांव फूल चुके हैं। इसी को देखते हुए विभाग अब निजी अस्पतालों व क्लीनिकों से तालमेल बिठाने में जुट गया है। इसके लिए इन सभी अस्पतालों व क्लीनिकों को निर्देश भेजे गए हैं। यदि इन अस्पतालों या क्लीनिकों के पास कोई डेंगू पाजीटिव या संभावित मरीज की सूचना स्वास्थ्य विभाग को दी जाए।
रिपोर्ट को लेकर भी शंका डेंगू को लेकर जहां प्रदेश में अलर्ट जारी किया गया है, वहीं डेंगू की रिपोर्ट को लेकर भी शंकाएं हैं। विभाग की मानें, तो निजी अस्पतालों अथवा क्लीनिकों द्वारा करवाए जा रहे कार्ड टैस्ट की रिपोर्ट कारगर नहीं है। इसे स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से सही नहीं मान रहा है। यही कारण है कि विभाग डेंगू संभावित या फिर पाजीटिव मरीज की रिपोर्ट के लिए एलाइजा टेस्ट ही कारगर मान रहा है। विभाग का दावा है कि एलाइजा टेस्ट में ही पूरी तरह से कनफर्म हो सकता है। यदि मरीज कार्ड टेस्ट करवाने के बाद भी सिविल अस्पताल आता है, तो भी एलाइजा टेस्ट के बाद ही डेंगू कनफर्म किया जा रहा है।
ग्रामीण इलाकों में हालात बुरे ग्रामीण इलाकों में हालात बुरे हैं, जबकि स्वास्थ्य केंद्र दूरदराज क्षेत्रों में होने के कारण मरीज इन तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। ऐसे में मरीज निजी चिकित्सकों व क्लीनिकों पर निर्भर हैं। यदि चिकित्सक डेंगू कनफर्मेशन के लिए टेस्ट लिखकर देता है, तो मरीज को कईं किलोमीटर दूर तक जाना पड़ता है। मरीज भी अपने आसपास के क्लीनिकों अथवा लैब में ही यह टेस्ट करवा रहे हैं।
डेंगू कार्ड टेस्ट की कीमत 700 रुपये किसी भी बुखार से पीड़ित मरीज का डेंगू कनफर्मेशन टेस्ट कराया जा रहा है। मार्केट में यह कार्ड टेस्ट 700 रुपये से शुरु होकर, लैब के अनुसार, 1000 रुपये तक किया जा रहा है। प्राइवेट लैब में ऐसे कई मरीज आ रहे हैं, जो बुखार से पीड़ित हैं और डेंगू टेस्ट करवा रहे हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग सिटी सिविल अस्पताल में निशुल्क करवा रहा है, लेकिन फिर भी प्राइवेट लैब में टेस्ट करवाने के लिए मरीज ज्यादा जा रहे हैं।
ऐसे बढ़ता है खतरा स्वास्थ्य विभाग के अनुसार यदि मरीज को डेंगू होता है, तो यह वायरस ब्लड की प्लेटलेट्स पर हमला करके उसे कम करना शुरु कर देता है। नार्मल स्थिति में प्लेटलेट्स की संख्या 50000 से लेकर 2 लाख के बीच होनी चाहिए। यदि यह संख्या 50000 से नीचे आ जाती है, तो मरीज को अस्पताल में दाखिल करने की नौबत आती है और उसे प्लेटलेट्स (ब्लड कंपोनेंट) चढ़ाने की जरूरत पड़ती है।
निजी अस्पतालों व क्लीनिकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे किसी भी स्तर पर डेंगू मरीज की सूचना स्वास्थ्य विभाग को दें। मार्केट में डेंगू के लिए कार्ड टेस्ट किए जा रहे हैं, जो ज्यादा भरोसेमंद नहीं हैं। एलाइजा टेस्ट के जरिये ही सही स्थिति का पता लगता है, जो स्वास्थ्य विभाग नि:शुल्क कर रहा है। फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, विभाग के पास इलाज के पूरे इंतजाम हैं। -डॉ. विनोद गुप्ता, सिविल सर्जन, अंबाला