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हनीप्रीत की रिहाई से जेल अफसरों की टेंशन खत्म, मुलाकात के लिए बंद करनी पड़ती थी जेल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 07 Nov 2019 01:21 AM IST
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vailed honeypreet
डेरा सच्चा सौदा प्रमुख संत गुरमीत राम रहीम की मुंह बोली बेटी हनीप्रीत की रिहाई होते ही अंबाला सेंट्रल जेल के अधिकारियों ने भी राहत की सांस ली। जेल में उसकी सुरक्षा को लेकर अधिकारी हर समय अलर्ट रहते थे। वे जेल की पहली ऐसी महिला बंदी थी जिसकी मुलाकात के लिए जेल बंद करनी पड़ती थी। देशद्रोह के आरोप खारिज होने के बाद से हनीप्रीत खुश थी। दूसरी बंदियों के प्रति उसके व्यवहार में भी काफी तब्दीली आ गई थी। उसने कई बंदियों को यह बात कही थी कि अब जल्द ही जेल की चारीदवारी से बाहर निकल जाएगी।
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खुद को फिट रखने के लिए करती थी योग
जेल में शुरूआती दिनों में हनीप्रीत बेहद दुखी रहती थी। तब पुलिस को भी उस पर कड़ी नजर रखनी पड़ी थी। हालांकि समय बीतने के साथ ही हनीप्रीत ने खुद की सेहत पर ध्यान देना शुरू कर दिया। फिट रहने के लिए वह रोज योग करती थी। दूसरी महिला बंदियों को भी उसने योग करना सिखाया था। निरंतर उसके व्यवहार में आ रहे परिवर्तन से जेल अधिकारी भी बेहद खुश थे। फिर भी उसकी सुरक्षा को लेकर जेल प्रबंधन ने किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती।
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करनी पड़ती थी पूरी जेल बंद
हनीप्रीत की सुरक्षा को लेकर जेल अधिकारी अक्सर परेशान रहते थे। खासकर नाभा जेल में डेरा समर्थक की हत्या के बाद अधिकारियों को उसकी सुरक्षा के बंदोबस्त और कड़े करने पड़े थे। हनीप्रीत हर समय अधिकारियों की नजर में रहती थी। परिवार से मुलाकात के दौरान अधिकारियों को जेल बंद करनी पड़ती थी। तब जेल में किसी और की मुलाकात नहीं होती थी। इसको लेकर भी अधिकारी तंग थे।
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भाई से मिला था रिहाई का आशीर्वाद
इस भैैया दूज पर भाई साहिल तनेजा ने हनीप्रीत से मुलाकात कर तिलक करवाया था। बताते हैं कि इस बार साहिल ने बहन को जेल से रिहाई का आशीर्वाद दिया था। इसके बाद देशद्रोह के आरोप खारिज होने से हनीप्रीत को जेल से अपनी रिहाई होने के संकेत मिल गए थे। इस बात को लेकर पिछले 2 दिन से वह बेहद खुश थी। दूसरी बंदियों से भी हंसकर बात करती दिख रही थी। खुद जेल अधिकारी भी उसके रवैये में अचानक आए परिवर्तन से हैरान थे।

इसमें कोई शक नहीं कि हनीप्रीत की सुरक्षा को लेकर हम हर समय अलर्ट रहते थे। उसके आसपास रहने वाली बंदियों की गतिविधियों पर पैनी नजर रखनी पड़ती थी। उसकी रिहाई के बाद ये चिंता खत्म हो गई है। उसका व्यवहार नार्मल था। रोज योग करती थी। देशद्रोह के आरोप खारिज होने के बाद उसे रिहा होने की उम्मीद हो गई थी। जमानत के आदेश मिलने के बाद ही उसे रिहा किया गया है।
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