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भगवान को पाने के लिए मन हो निर्मल : कामेश्वर
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श्रीमद्भागवत कथा का गुणगान करते महाराज। संस्था
अंबाला। श्री बांके बिहारी मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत ज्ञान कथा यज्ञ के दूसरे दिन श्री तुलसी मानस मंदिर हरिद्वार से आए स्वामी कामेश्वर पुरी महाराज ने बताया कि श्रीमद् भागवत कलयुग में एक किरण यानी उस रोशनी के समान है। ''
इसके माध्यम से हमारा जीवन भव पर उतर सकता है और जाने-अंजाने किए गए पाप नष्ट हो जाते हैं। भजनों के माध्यम से निर्मल मन जन, श्री राम जय राम जय जय राम,राम कथा, श्री मन नारायण नारायण, राम की कृपा से सब काम हो रहा है आदि कई भजनों से कथा में समय बांधते हुए भगवान को याद किया। महाराज ने बताया कि भगवान को पाने के लिए मन निर्मल होना चाहिए और मन को निर्मल बनाने के लिए माता जगदंबा के चरणों में चले जाओ, वहीं से मन निर्मल होगा। जहां भगवान को पाने का रास्ता मिलता है, जैसे संसार की भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए हम में से अधिकतर अपनी मां की शरण में जाते हैं।
इसी तरह माता जगदंबा को याद करते रहना चाहिए। सास-बहू के सामाजिक प्रसंग पर महाराज ने व्याख्यान करते हुए बताया कि अपना बचपन, अपनी यादें, अपने संबंधियों के परिवार को छोड़कर नया जीवन और वंश वृद्धि के लिए आई बहू के साथ कुठाराघात और इसी तरह बहू द्वारा परिवार के सदस्यों के साथ अमानवीय कृत्य इन दोनों के प्रति सचेत रहने की आवश्यकता पर बल दिया।
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उन्होंने बेटी और बहू में अंतर नहीं करने की नसीहत दी । शनिवार को कार्यक्रम में सभा के प्रधान दिनेश बहल, राकेश कुमार, प्रदीप भाटिया, अरुण कुमार गुप्ता, ओम प्रकाश शर्मा, लक्ष्मी प्रसाद, अश्विनी गुप्ता, संजय गोरी, अश्वनी वर्मा, उत्तम वर्मा और सुनील चोपड़ा मौजूद रहे।
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इसके माध्यम से हमारा जीवन भव पर उतर सकता है और जाने-अंजाने किए गए पाप नष्ट हो जाते हैं। भजनों के माध्यम से निर्मल मन जन, श्री राम जय राम जय जय राम,राम कथा, श्री मन नारायण नारायण, राम की कृपा से सब काम हो रहा है आदि कई भजनों से कथा में समय बांधते हुए भगवान को याद किया। महाराज ने बताया कि भगवान को पाने के लिए मन निर्मल होना चाहिए और मन को निर्मल बनाने के लिए माता जगदंबा के चरणों में चले जाओ, वहीं से मन निर्मल होगा। जहां भगवान को पाने का रास्ता मिलता है, जैसे संसार की भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए हम में से अधिकतर अपनी मां की शरण में जाते हैं।
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इसी तरह माता जगदंबा को याद करते रहना चाहिए। सास-बहू के सामाजिक प्रसंग पर महाराज ने व्याख्यान करते हुए बताया कि अपना बचपन, अपनी यादें, अपने संबंधियों के परिवार को छोड़कर नया जीवन और वंश वृद्धि के लिए आई बहू के साथ कुठाराघात और इसी तरह बहू द्वारा परिवार के सदस्यों के साथ अमानवीय कृत्य इन दोनों के प्रति सचेत रहने की आवश्यकता पर बल दिया।
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उन्होंने बेटी और बहू में अंतर नहीं करने की नसीहत दी । शनिवार को कार्यक्रम में सभा के प्रधान दिनेश बहल, राकेश कुमार, प्रदीप भाटिया, अरुण कुमार गुप्ता, ओम प्रकाश शर्मा, लक्ष्मी प्रसाद, अश्विनी गुप्ता, संजय गोरी, अश्वनी वर्मा, उत्तम वर्मा और सुनील चोपड़ा मौजूद रहे।

श्रीमद्भागवत कथा का गुणगान करते महाराज। संस्था