{"_id":"60cbb52e8ebc3e330a1c4992","slug":"three-times-target-ambala-news-knl734210143","type":"story","status":"publish","title_hn":"जीरी रोपाई रोकने के लिए मिला तीन गुणा लक्ष्य पर धान का रकबा जस का तस बरकरार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जीरी रोपाई रोकने के लिए मिला तीन गुणा लक्ष्य पर धान का रकबा जस का तस बरकरार
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तरुण अग्रवाल
अंबाला सिटी। पानी के दोहन को रोकने के लिए सरकार द्वारा शुरू की गई योजना मेरा पानी-मेरी विरासत के तहत जिले को पिछले साल से तीन गुणा लक्ष्य मिलने के बाद भी धान का रकबा ज्यादा कम नहीं हुआ है। अंबाला में करीब 80 हजार हेक्टेयर जमीन पर किसान धान की खेती करते आए हैं और इस बार भी किसानों ने रोपाई शुरू कर दी है। जिले में पिछले 5 सालों के भीतर अधिकतम 84 हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की रोपाई हुई है
इस बार भी सरकार ने धान की बजाय अन्य वैकल्पिक फसलें लगाने का लक्ष्य तय किया हुआ है। ये लक्ष्य पिछले साल करीब 3500 एकड़ था, जो कि इस बार 10 हजार एकड़ से अधिक है। इस लक्ष्य प्राप्ति के बाद कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ कृषि विज्ञान केंद्रों के कृषि विशेषज्ञों ने भी कमर कसी हुई है। कृषि विज्ञान केंद्र तेपला से डॉ. राजेंद्र सिंह व अन्य कृषि विशेषज्ञ गांव-गांव जाकर किसानों को धान छोड़कर दूसरी फसलें लगाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
खाली जमीन छोड़ने पर भी मिलेंगे 7 हजार रुपये प्रति एकड़
अंबाला को इस बार 10 हजार 85 एकड़ जमीन पर धान न रोपित करने का लक्ष्य मिला है। इसमें 6300 एकड़ में मक्का, 185 एकड़ में दालें, 100 एकड़ में तिलहन फसलें, 1000 एकड़ में चारा, 2500 एकड़ में सब्जियां व प्याज लगाने का लक्ष्य मिला है। कुल 10 हजार 85 एकड़ लक्ष्य में से करीब 2500 एकड़ का लक्ष्य बागवानी विभाग का है। कोई ऐसा किसान जिसने पिछले साल धान लगाई थी और वह अपनी जमीन को खाली छोड़ता है उसे भी इस योजना में शामिल किया जाएगा। ऐसे किसान भी 7 हजार रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि के हकदार होंगे।
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मैंने धान की फसल छोड़कर 7 एकड़ में दलहनी फसलों को लगाया हुआ है। खुद तो दलहनी फसल लगा रहा हूं साथ ही अन्य किसानों को भी प्रेरित कर रहा हूं कि वह धान को छोड़कर अन्य फसलों को रोपित करें। जिससे कि पानी का दोहन रोका जा सके और अधिक मुनाफा कमाया जा सके।
- जसमेर राणा।
हमें पानी के महत्व के बारे में पता है। इसीलिए हमने इस बार पानी की बचत के लिए 1 एकड़ में मूंग दाल की रोपाई करवाई है। साथ ही पानी की खपत कम से कम हो इसके लिए 5 एकड़ में धान की सीधी बिजाई की है। अन्य किसान भी इस ओर प्रोत्साहित हों।
- नीरज कुमार, किसान।
पहले मैं भी परंपरागत धान और गेहूं की फसलों को ही प्राथमिकता देता था। लेकिन उसके बाद कृषि विशेषज्ञों ने प्रोत्साहित किया कि दाल व अन्य फसलों को रोपित करें। इससे एक तो प्रति एकड़ 7 हजार रुपये भी मिलेंगे और पानी की बचत भी होगी। वहीं, जो फसल बिकेगी उसके भी अतिरिक्त रुपये मिलेंगे। इसीलिए इस समय 5 एकड़ में मक्का, दाल व अन्य फसल लगा रहा हूं।
- अशोक चौहान, किसान।
मैं 5 एकड़ में उड़द, मूंग, मक्का, सोयाबीन, व अन्य फसलों को रोपित कर रहा हूं। पिछले साल इन फसलों को लगाने से काफी मुनाफा भी हुआ है। इसीलिए इस बार भी खरीफ सीजन में दालों को ही रोपित किया है। पिछले साल तो अच्छी फसल पैदा हुई थी। उम्मीद है इस बार पिछले साल जितना ही फायदा हो।
- शुभम, किसान।
कृषि विभाग को धान की बजाय अन्य वैकल्पिक फसलें लगवाने का जो लक्ष्य मिला है। हम उस पर काम कर रहे हैं। पूरी टीम किसानों को जागरूक करने के लिए फील्ड में उतारी जा चुकी है। कृषि अफसर भी किसानों से रूबरू होकर उन्हें मेरा पानी-मेरी विरासत योजना का महत्व समक्ष रहे हैं। पिछले साल हमने लक्ष्य प्राप्ति कर ली थी। इस बार भी लक्ष्य को पूरा करने के लिए प्रयास हमारी ओर से जारी है।
-डा. गिरीश नागपाल, डीडीए, अंबाला।
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अंबाला सिटी। पानी के दोहन को रोकने के लिए सरकार द्वारा शुरू की गई योजना मेरा पानी-मेरी विरासत के तहत जिले को पिछले साल से तीन गुणा लक्ष्य मिलने के बाद भी धान का रकबा ज्यादा कम नहीं हुआ है। अंबाला में करीब 80 हजार हेक्टेयर जमीन पर किसान धान की खेती करते आए हैं और इस बार भी किसानों ने रोपाई शुरू कर दी है। जिले में पिछले 5 सालों के भीतर अधिकतम 84 हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की रोपाई हुई है
इस बार भी सरकार ने धान की बजाय अन्य वैकल्पिक फसलें लगाने का लक्ष्य तय किया हुआ है। ये लक्ष्य पिछले साल करीब 3500 एकड़ था, जो कि इस बार 10 हजार एकड़ से अधिक है। इस लक्ष्य प्राप्ति के बाद कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ कृषि विज्ञान केंद्रों के कृषि विशेषज्ञों ने भी कमर कसी हुई है। कृषि विज्ञान केंद्र तेपला से डॉ. राजेंद्र सिंह व अन्य कृषि विशेषज्ञ गांव-गांव जाकर किसानों को धान छोड़कर दूसरी फसलें लगाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
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खाली जमीन छोड़ने पर भी मिलेंगे 7 हजार रुपये प्रति एकड़
अंबाला को इस बार 10 हजार 85 एकड़ जमीन पर धान न रोपित करने का लक्ष्य मिला है। इसमें 6300 एकड़ में मक्का, 185 एकड़ में दालें, 100 एकड़ में तिलहन फसलें, 1000 एकड़ में चारा, 2500 एकड़ में सब्जियां व प्याज लगाने का लक्ष्य मिला है। कुल 10 हजार 85 एकड़ लक्ष्य में से करीब 2500 एकड़ का लक्ष्य बागवानी विभाग का है। कोई ऐसा किसान जिसने पिछले साल धान लगाई थी और वह अपनी जमीन को खाली छोड़ता है उसे भी इस योजना में शामिल किया जाएगा। ऐसे किसान भी 7 हजार रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि के हकदार होंगे।
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मैंने धान की फसल छोड़कर 7 एकड़ में दलहनी फसलों को लगाया हुआ है। खुद तो दलहनी फसल लगा रहा हूं साथ ही अन्य किसानों को भी प्रेरित कर रहा हूं कि वह धान को छोड़कर अन्य फसलों को रोपित करें। जिससे कि पानी का दोहन रोका जा सके और अधिक मुनाफा कमाया जा सके।
- जसमेर राणा।
हमें पानी के महत्व के बारे में पता है। इसीलिए हमने इस बार पानी की बचत के लिए 1 एकड़ में मूंग दाल की रोपाई करवाई है। साथ ही पानी की खपत कम से कम हो इसके लिए 5 एकड़ में धान की सीधी बिजाई की है। अन्य किसान भी इस ओर प्रोत्साहित हों।
- नीरज कुमार, किसान।
पहले मैं भी परंपरागत धान और गेहूं की फसलों को ही प्राथमिकता देता था। लेकिन उसके बाद कृषि विशेषज्ञों ने प्रोत्साहित किया कि दाल व अन्य फसलों को रोपित करें। इससे एक तो प्रति एकड़ 7 हजार रुपये भी मिलेंगे और पानी की बचत भी होगी। वहीं, जो फसल बिकेगी उसके भी अतिरिक्त रुपये मिलेंगे। इसीलिए इस समय 5 एकड़ में मक्का, दाल व अन्य फसल लगा रहा हूं।
- अशोक चौहान, किसान।
मैं 5 एकड़ में उड़द, मूंग, मक्का, सोयाबीन, व अन्य फसलों को रोपित कर रहा हूं। पिछले साल इन फसलों को लगाने से काफी मुनाफा भी हुआ है। इसीलिए इस बार भी खरीफ सीजन में दालों को ही रोपित किया है। पिछले साल तो अच्छी फसल पैदा हुई थी। उम्मीद है इस बार पिछले साल जितना ही फायदा हो।
- शुभम, किसान।
कृषि विभाग को धान की बजाय अन्य वैकल्पिक फसलें लगवाने का जो लक्ष्य मिला है। हम उस पर काम कर रहे हैं। पूरी टीम किसानों को जागरूक करने के लिए फील्ड में उतारी जा चुकी है। कृषि अफसर भी किसानों से रूबरू होकर उन्हें मेरा पानी-मेरी विरासत योजना का महत्व समक्ष रहे हैं। पिछले साल हमने लक्ष्य प्राप्ति कर ली थी। इस बार भी लक्ष्य को पूरा करने के लिए प्रयास हमारी ओर से जारी है।
-डा. गिरीश नागपाल, डीडीए, अंबाला।