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Ambala News: प्रधान से दुर्व्यवहार के विरोध में आज अदालत में रहेगी हड़ताल
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कैथल। जींद की डीएसपी की ओर से जिला बार एसोसिएशन जींद के प्रधान राकेश मलिक के साथ किए दुर्व्यवहार के विरोध में सोमवार को अदालतों का कामकाज बंद रहेगा। यह जानकारी जिला बार एसोसिएशन कैथल के प्रधान बलजिंद्र सिंह मलिक ने दी है।
उन्होंने बताया कि इस बारे में जींद में पूरे हरियाणा के जिला बार एसोसिएशन के प्रधानों की बैठक हुई थी। बैठक में डीएसपी के इस व्यवहार की निंदा की गई और सर्वसम्मति से फैसला लिया कि नौ सितंबर को पूरे प्रदेश में अदालतों का कामकाज ठप रखा जाएगा। साथ यह भी फैसला लिया कि यदि यह मामला नहीं सुलझा तो वर्क सस्पेंड को पूरे सप्ताह तक बढ़ाया जा सकता है। मलिक ने कहा कि वकीलों के आत्म सम्मान के लिए यह कदम उठाना जरूरी है। कहा कि पुलिस की ज्यादती वकीलों के खिलाफ लगातार बढ़ती जा रही है। वर्दी के रौब में पुलिस अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करती है। यह भी बताया कि कोई भी नोटरी पब्लिक या ओथ कमिश्नर किसी भी शपथ पत्र को अटेस्ट नहीं करेगा। साथ ही विधानसभा चुनाव में फॉर्म भरने के लिए जो उम्मीदवार एफिडेविट अटेस्ट करवाने आएंगे उन्हें भी अटेस्ट नहीं किया जाएगा। कोई भी वकील पुलिस की तरफ से अदालत में पेश नहीं होगा और न ही पुलिस का कोई एफिडेविट अटेस्ट करेगा। बताया कि उच्च न्यायालय या अन्य अदालतों में दिए जाने वाले एफिडेविट भी अटेस्ट नहीं किए जाएंगे। जो वकील इन फैसलों का उल्लंघन करेगा तो उस पर 11 हजार रुपये जुर्माना लगाया जाएगा।
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उन्होंने बताया कि इस बारे में जींद में पूरे हरियाणा के जिला बार एसोसिएशन के प्रधानों की बैठक हुई थी। बैठक में डीएसपी के इस व्यवहार की निंदा की गई और सर्वसम्मति से फैसला लिया कि नौ सितंबर को पूरे प्रदेश में अदालतों का कामकाज ठप रखा जाएगा। साथ यह भी फैसला लिया कि यदि यह मामला नहीं सुलझा तो वर्क सस्पेंड को पूरे सप्ताह तक बढ़ाया जा सकता है। मलिक ने कहा कि वकीलों के आत्म सम्मान के लिए यह कदम उठाना जरूरी है। कहा कि पुलिस की ज्यादती वकीलों के खिलाफ लगातार बढ़ती जा रही है। वर्दी के रौब में पुलिस अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करती है। यह भी बताया कि कोई भी नोटरी पब्लिक या ओथ कमिश्नर किसी भी शपथ पत्र को अटेस्ट नहीं करेगा। साथ ही विधानसभा चुनाव में फॉर्म भरने के लिए जो उम्मीदवार एफिडेविट अटेस्ट करवाने आएंगे उन्हें भी अटेस्ट नहीं किया जाएगा। कोई भी वकील पुलिस की तरफ से अदालत में पेश नहीं होगा और न ही पुलिस का कोई एफिडेविट अटेस्ट करेगा। बताया कि उच्च न्यायालय या अन्य अदालतों में दिए जाने वाले एफिडेविट भी अटेस्ट नहीं किए जाएंगे। जो वकील इन फैसलों का उल्लंघन करेगा तो उस पर 11 हजार रुपये जुर्माना लगाया जाएगा।
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