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गोशालाओं में चारे की नहीं, हमारी भावनाओं की कमी
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प्रवचन करते संत।
- फोटो : Ambala
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नारायणगढ़। गो पर्यावरण और अध्यात्म चेतना महायात्रा का रविवार को शहजादपुर के कालड़ा मैदान में गो भक्तों ने जोरदार स्वागत किया। यात्रा में शामिल संतों ने बताया कि गो माता को राष्ट्र माता का सर्वोच्च स्थान दिलाने जन-जन के हृदय में गो माता के प्रति मातृत्व और देवत्व का भाव पैदा करने के उद्देश्य से यह यात्रा आरंभ हुई थी।
उन्होंने बताया कि स्वामी गोपालानंद सरस्वती के सानिध्य में चल रही यह यात्रा राजस्थान, मध्यप्रदेश और गुजरात के अनेकों शहरों में गो माता के प्रति प्रेम जगा रही है। अब तक यह यात्रा हरियाणा प्रदेश के 17 जिलों को पार कर चुकी है और कुछ जिले ही शेष रह गए हैं। देश की गोशालाओं में चारे की कमी के बारे में बताते हुए महंत ने कहा कि चारे की नहीं, बल्कि हमारी भावनाओं की कमी है।
साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि दानी सज्जन और गोशालाओं की देख-रेख करने वालों को चारे की कमी दूर करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि गोशालाएं वृद्धाश्रम के समान हैं। इसलिए देश में गोशालाएं होनी ही नहीं चाहिए। 135 करोड़ की जनसंख्या होते हुए भी भारत देश की जनता 4-5 करोड़ गोवंश को नहीं संभाल सकती, यह बड़े शर्म की बात है। उन्होंने कहा कि घर-घर में गाय माता हो और उसकी सेवा वृद्ध माता-पिता के समान हो तो ही गाय सुरक्षित रह सकती है।
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गो माता की सेवा से मिलता सुख
संतों ने कहा कि यदि हम अपने आने वाले समय को सुखी देखना चाहते हैं तो हमें गो माता को सुखी रखना होगा। इसके अतिरिक्त ब्रह्मांड में कोई भी ऐसा संसाधन नहीं है जो हमें सुखी रख सके। इस अवसर पर आसपास क्षेत्र के सैकड़ों गो भक्त उपस्थित रहे और सारा क्षेत्र गो माता के जयकारों से गूंज उठा।
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उन्होंने बताया कि स्वामी गोपालानंद सरस्वती के सानिध्य में चल रही यह यात्रा राजस्थान, मध्यप्रदेश और गुजरात के अनेकों शहरों में गो माता के प्रति प्रेम जगा रही है। अब तक यह यात्रा हरियाणा प्रदेश के 17 जिलों को पार कर चुकी है और कुछ जिले ही शेष रह गए हैं। देश की गोशालाओं में चारे की कमी के बारे में बताते हुए महंत ने कहा कि चारे की नहीं, बल्कि हमारी भावनाओं की कमी है।
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साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि दानी सज्जन और गोशालाओं की देख-रेख करने वालों को चारे की कमी दूर करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि गोशालाएं वृद्धाश्रम के समान हैं। इसलिए देश में गोशालाएं होनी ही नहीं चाहिए। 135 करोड़ की जनसंख्या होते हुए भी भारत देश की जनता 4-5 करोड़ गोवंश को नहीं संभाल सकती, यह बड़े शर्म की बात है। उन्होंने कहा कि घर-घर में गाय माता हो और उसकी सेवा वृद्ध माता-पिता के समान हो तो ही गाय सुरक्षित रह सकती है।
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गो माता की सेवा से मिलता सुख
संतों ने कहा कि यदि हम अपने आने वाले समय को सुखी देखना चाहते हैं तो हमें गो माता को सुखी रखना होगा। इसके अतिरिक्त ब्रह्मांड में कोई भी ऐसा संसाधन नहीं है जो हमें सुखी रख सके। इस अवसर पर आसपास क्षेत्र के सैकड़ों गो भक्त उपस्थित रहे और सारा क्षेत्र गो माता के जयकारों से गूंज उठा।

प्रवचन सुनते गो भक्त ।- फोटो : Ambala