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अधिकारी ही गौरव पट्टों का कर रहे अनादर, गौरव पट्टों पर नहीं लिखा गांवों का गौरवमयी इतिहास

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 13 Feb 2022 01:57 AM IST
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The officers are disrespecting the pride plates, the proud history of the villages is not written on the pride plates
बिंजलपुर गांव में अधूरा पड़ा गौरव पट्ट - फोटो : Ambala
बराड़ा। राज्य सरकार द्वारा गांवों का गौरवमयी इतिहास दर्शाने के लिए क्षेत्र के गावों में बने गौरव पट्टों पर स्वर्णिम अक्षरों में लिखे जाने का कार्य विभाग व पंचायतों की लेट लतीफी के कारण अधूरा पड़ा है। गांवों में कई महीने पहले गौरव पट्ट तो बनवा दिए गए लेकिन इन पर लोग केवल विज्ञापन के लिए पोस्टर चस्पा रहे हैं। बराड़ा ब्लाक में 66 पंचायते हैं। अधिकतर गांवों में बने गौरव पट्टों पर गांव का इतिहास लिखने का कार्य अभी भी अधर में लटका हुआ है।
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हैरानी की बात यह है कि यह मामला बीडीपीओ के संज्ञान में ही नहीं है। इससे प्रशासन की कार्यशैली का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकार की योजनाओं के प्रति अधिकारी कितने गंभीर हैं। ग्रामीण रोहित, सोनू, विकास, मोहन, रमेश, गौरव कुमार, शुभम शर्मा व मनोज का कहना है कि राज्य सरकार द्वारा गांव के गौरवमयी इतिहास को गौरव पट्ट पर लिखे जाने की योजना सराहनीय है। यह हर गांव के लिए गर्व की बात है, ऐसे में विभाग व पंचायतों द्वारा की जा रही लेटलतीफी होने के कारण कहीं गौरव पट्ट पर गौरवगाथा लिखा जाना केवल सपना बनकर न रह जाए।
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ग्रामीणों का कहना है कि गांवों के प्रवेश द्वार पर बने गौरव पट्टों पर सामने वाली साइड पर केवल गांव की जनसंख्या व मंदिर इत्यादि के बारे में जरूर लिखा है। लेकिन गांवों की कोई बड़ी उपलब्धि के बारे में नहीं लिखा है। इन पर अंत में यह भी लिखा है कि इनका अनादर गांव का अनादर होगा। लेकिन इन पर गांव का गौरवमयी इतिहास न लिखा जाना भी तो अनादर करने की श्रेणी में होना चाहिए। उधर, अधिकारी भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं और उनकी उदासीनता के चलते गौरव पट्ट अधूरे पड़े हैं। ब्लाक बराड़ा के अंतर्गत आने वाले गांव जफरपुर, मुलाना, धीन, बिंजलपुर, धनौरा, धनौरी अलीपुर, जहांगीरपुर, टंगैल, सिम्बला, होली, रूकड़ी व सुभरी सहित अन्य गांवों में गौरव पट्टो पर गांव के इतिहास लिखे जाने का कार्य अधूरा पड़ा है।
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इन गांवों में ये उपलब्धियां
खंड के करीबन हर गांव में कोई न कोई उपलब्धि है। जैसे गांव मुलाना से फकीर चंद वर्ष 2002 में राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। धीन गांव के रहने वाले अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर निशानेबाज सरबजोत सिंह ने निशानेबाजी के वर्ल्ड कप में स्वर्ण पदक जीता है। इसके साथ ही धीन गांव के गुरबक्श सिंह विदेशों में भारतीय दूतावास में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। धनौरी गांव में फौजी प्रवीन सैनी शहीद हुए थे। इसी तरह कईं ऐसे गांव है जहां कईं उपलब्धियां है। जिनसे गांवों का नाम रोशन हुआ है। लेकिन किसी भी उपलब्धि को गौरव पट्ट पर अंकित नहीं किया गया है।
यह है गौरव पट्ट का उद्देश्य
प्रदेश सरकार के निर्देशानुसार गांवों के प्रवेश द्वार पर गौरव पट्ट बनाए गए है । इस पर गांव का गौरवमयी इतिहास सुनहरे अक्षरों में लिखा जाना है। गांव के मुख्य विकास कार्य, गांव की जनसंख्या, किसी ने यदि किसी भी क्षेत्र में गांव का नाम रोशन किया है, गांव के खिलाड़ियों के नाम, दानवीरों के नाम, गांव के शहीदों, स्वतंत्रता सेनानियों इत्यादि के नाम, इसके अलावा कोई बड़ी उपलब्धि के बारे में अंकित किया जाना है।

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बाक्स
मुझे यहां पर आए छह महीने हुए हैं। यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। इसके बारे में पता करवाकर ही कुछ बता सकता हूं कि आखिरकार इसमें देरी क्यों हो रही है।
- राजन सिंगला, बीडीपीओ, बराड़ा।
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