भतीजे का फर्ज उसके साथ, मेरा संघर्ष पूर्व सैनिकों के साथ
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वन रैंक, वन पेंशन को लेकर इंडिया के वर्तमान चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ दलबीर सुहाग के सगे चाचा कैप्टन सुरेंद्र सुहाग भी आंदोलन में कूद चुके हैं। वे अंबाला में महासंग्राम रैली में भाग लेने आए हुए थे, जबकि वे दिल्ली में भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं। अमर उजाला से बातचीत में कैप्टन सुहाग ने बताया कि वे सच के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। यह अलग बात है कि उनके भतीजे चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ है। लेकिन उनका समर्थन अपने पूर्व सैनिकों के साथ है। जब सरकार ने वन रैंक, वन पेंशन देने का वायदा किया है तो सरकार अपना वायदा पूरा करे।
इस मसले पर राजनीति करने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता। पूर्व सैनिकों को इस कदर अपने हक के लिए सड़कों पर भूखे बैठने के लिए विवश करना बहुत ही दुर्भाग्य की बात है। उनके अनुसार वे दिल्ली में जाकर अपना समर्थन पूर्व सैनिकों को दे चुके हैं और अब इसी मांग को लेकर भूख हड़ताल पर दिल्ली में बैठ चुके हैं। वे अंबाला सिर्फ इस रैली में भाग लेने आए थे।
सुपर बाइकर्स ने दिया समर्थन
पूर्व सैनिकों को युवा शक्ति का समर्थन हासिल करने की दिशा में रविवार को अंबाला में हुई महासंग्राम रैली में चंडीगढ़ से आए सुपर बाइकर्स ने अपने खास अंदाज में पूर्व सैनिकों को अपना समर्थन दिया। चंडीगढ़ से आई स्वर्गीय विंग कमांडर बीएस सिद्धू की पत्नी मिनी सिद्धू व सार्जेंट खुशबीर सिंह दत्त ने बताया कि चंडीगढ़ से सुपर बाइकर्स इस रैली और पूर्व सैनिकों को समर्थन देने के लिए अंबाला में पहुंचे थे।
सभी पचास सुपर बाइकर्स अमेरिका की सुपर बाइक पर सवार थे, जिन्होंने बाइक रैली निकाली और मेजर जनरल सतबीर सिंह की ओपन जीत की अगुवाई की। उनके अनुसार इनमें से अधिकतर सुपर बाइकर्स पूर्व सैनिकों के ही बच्चे हैं, जो अपने अंदाज में पूर्व सैनिकों को समर्थन देने अंबाला पहुंचे।
पूर्व आर्मी चीफ जनरल वीके सिंह पर भी उतरा गुस्सा
मंच पर सूबेदार अतर सिंह मुल्तानी व कर्नल कामेश्वर पांडेय समेत अन्य वक्ताओं ने जनरल वीके सिंह पर भी अपना गुस्सा उतारा। सूबेदार अतर सिंह मुल्तानी ने कहा कि अंबाला के इसी गांधी मैदान में पूर्व जनरल वीके सिंह को बुलाकर उनके चुनाव में लड़ने और पूर्व सैनिकों का समर्थन बीजेपी को दिए जाने की घोषणा की गई थी। लेकिन पूर्व जनरल वीके सिंह सांसद बनने और फिर मंत्री बनने के बाद सरकार से ही मिल गए।
जिसके बाद उन्होंने अपने पूर्व फौजी भाइयों के संघर्ष को भुला दिया है। उन्होंने कहा कि पूर्व जनरल ये जान लें कि यदि उनके फौजी भाई उन्हें मंत्री की कुर्सी तक पहुंचा सकते हैं, तो अगली बार उन्हें कुर्सी से उतार भी सकते हैं। महासंग्राम रैली में पूर्व जनरल वीके सिंह को मंत्री पद से इस्तीफा देकर पूर्व सैनिकों की कतार में बैठकर भूखहड़ताल में शामिल होने का न्यौता दिया गया।