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तीज की तैयारियां: बाजारों में रौनक, गांवों में पड़ गए झूले
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teej festiwal
- फोटो : AMBALA
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तीज पर्व को लेकर महिलाओं ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। बाजार भी गुलजार हो गए हैं। उधर हलवाइयों ने भी ग्राहकों को लुभाने के लिए दुकानों पर मिठाइयां सजा ली हैं। तीज पर्व को लेकर बाजारों में बड़ी संख्या में लोग पहुंचने लगे हैं।
कल तीज के पर्व को लेकर जिले के बाजारों में जबरदस्त रौनकों का माहौल है। बाजारों में जहां हलवाइयों की दुकानें विभिन्न तरह के मिष्ठानों से सजी रही, वहीं बाजारों में महिलाओं खासकर नवविवाहितों में मेहंदी लगाने का क्रेज भी दिखाई दिया। शहर व छावनी के बाजारों में महिलाओं के इसी क्रेज को देखते हुए कई कलाकार अस्थायी रूप से बाजारों में ही मेहंदी लगाने को लेकर बैठे हुए थे। इस दौरान महिलाओं ने बंगाली, गुजराती व अरेबियन मेहंदी के खूब डिजाइन अपने हाथों में सजाए।
दूसरी ओर, अंबाला कैंट व सिटी के हलवाई बाजारों में जबरदस्त भीड़ का आलम रहा। दुकानदार सतविंद्र सिंह साहनी व तरुण अग्रवाल ने बताया कि इन दिनों घेवर और मालपुओं की जबरदस्त बिक्री हो रही है। इसके अलावा फैनियां व अदरसे भी लोग खासी मात्रा में अपने रिश्तेदारों को देने के लिए खरीद रहे हैं। उन्होंने बताया चूंकि इस दिन भाइयों द्वारा अपने बहनों के घर सिंधारा देने का रिवाज है, इसलिए अपने बहनों के ससुराल में मिठाइयों को एक आकर्षक टोकरी में सजाकर भी भाई ले जा रहे हैं।
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गांवों में भी पड़ गए झूले
तीज पर्व को लेकर गांवों में भी झूले डालने की परंपरा बहुत पुरानी है। ग्रामीण महिला पूनम चौहान, शिक्षा देवी व दीपिका ने बताया कि गांवों में घरों के आंगन में झूले तो कुछ दिन पहले ही पड़ जाते हैं। तीज वाले दिन महिलाएं एक जगह एकत्रित होकर झूले पर पींगे लेती हुई तीज के पारंपरिक गीत गाती है और माहौल पूरा हर्षोल्लास से भर जाता है। इस दिन ग्रामीण नव विवाहिताओं में बहुत ज्यादा क्रेज रहता है।
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कल तीज के पर्व को लेकर जिले के बाजारों में जबरदस्त रौनकों का माहौल है। बाजारों में जहां हलवाइयों की दुकानें विभिन्न तरह के मिष्ठानों से सजी रही, वहीं बाजारों में महिलाओं खासकर नवविवाहितों में मेहंदी लगाने का क्रेज भी दिखाई दिया। शहर व छावनी के बाजारों में महिलाओं के इसी क्रेज को देखते हुए कई कलाकार अस्थायी रूप से बाजारों में ही मेहंदी लगाने को लेकर बैठे हुए थे। इस दौरान महिलाओं ने बंगाली, गुजराती व अरेबियन मेहंदी के खूब डिजाइन अपने हाथों में सजाए।
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दूसरी ओर, अंबाला कैंट व सिटी के हलवाई बाजारों में जबरदस्त भीड़ का आलम रहा। दुकानदार सतविंद्र सिंह साहनी व तरुण अग्रवाल ने बताया कि इन दिनों घेवर और मालपुओं की जबरदस्त बिक्री हो रही है। इसके अलावा फैनियां व अदरसे भी लोग खासी मात्रा में अपने रिश्तेदारों को देने के लिए खरीद रहे हैं। उन्होंने बताया चूंकि इस दिन भाइयों द्वारा अपने बहनों के घर सिंधारा देने का रिवाज है, इसलिए अपने बहनों के ससुराल में मिठाइयों को एक आकर्षक टोकरी में सजाकर भी भाई ले जा रहे हैं।
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गांवों में भी पड़ गए झूले
तीज पर्व को लेकर गांवों में भी झूले डालने की परंपरा बहुत पुरानी है। ग्रामीण महिला पूनम चौहान, शिक्षा देवी व दीपिका ने बताया कि गांवों में घरों के आंगन में झूले तो कुछ दिन पहले ही पड़ जाते हैं। तीज वाले दिन महिलाएं एक जगह एकत्रित होकर झूले पर पींगे लेती हुई तीज के पारंपरिक गीत गाती है और माहौल पूरा हर्षोल्लास से भर जाता है। इस दिन ग्रामीण नव विवाहिताओं में बहुत ज्यादा क्रेज रहता है।

teej festiwal- फोटो : AMBALA