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तहसीलदारों और शिक्षा विभाग के अफसरों को भी किया गुमराह
ब्यूरो
Updated Fri, 10 Feb 2017 12:42 AM IST
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अंबाला कैंटोनमेंट। सेना में भर्ती के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए जाने के मामले में कई ऐसे हैरतअंगेज खुलासे हुए हैं, जिसे लेकर सैन्य अफसर तक खुद हैरान हैं। सैन्य भर्ती के लिए जो फर्जी दस्तावेज आवेदक युवाओं ने तैयार करवाए हैं, उसमें न केवल संबंधित जिलों के तहसीलदारों, शिक्षा अधिकारियों, उनके कार्यालय के स्टाफ कर्मियों को बल्कि ओपन स्कूल बोर्ड तक गुमराह कर दिया गया। अंबाला कैंट पुलिस फिलहाल इस मामले की जांच में जुटी है।
अंबाला में स्थित सेना के रीजनल भर्ती मुख्यालय ने इसी बाबत अंबाला, पंचकूला, यमुनानगर, करनाल, कुरुक्षेत्र, कैथल और चंडीगढ़ के उपायुक्तों को पत्र भेजकर भर्ती के लिए चयनित युवाओं की सीरियस वेरिफिकेशन के लिए पत्र भी लिखे थे। सैन्य अफसरों का कहना है कि संबंधित जिलों के डीसी ने सेना के इस आग्रह पर अपने निचले अफसरों को सेना के लिए चयनित आवेदकों की ओर से जमा करवाए दस्तावेज की गंभीरता से जांच करने के आदेश भी दिए थे। इसके बाद तहसील व शिक्षा विभाग ने संबंधित दस्तावेज की गंभीरता से जांच की और अभी तक ऐसे 24 मामले सामने आ गए। अभी कई जिलों से वेरिफिकेशन रिपोर्ट आना बाकी है, उम्मीद है फर्जी दस्तावेज के जरिये सैन्य भर्ती के मामलों की संख्या और बढ़ सकती है।
600 आवेदकों की हो रही है वैरिफिकेशन
उल्लेखनीय है कि सेना ने 15 से लेकर 22 सितंबर 2016 तक मुलाना मैदान में सेना की भर्ती के लिए रैली का आयोजन किया था। उसके बाद 23 अक्तूबर और 29 नवंबर 2016 में इसी भर्ती को लेकर लिखित परीक्षा भी हुई। इसके बाद 600 युवाओं को सेना में भर्ती के लिए शार्टलिस्ट कर लिया गया। अब सेना इन सभी 600 युवाओं के तमाम दस्तावेज को खंगाल रही है, उसमें से 24 युवा आवेदकों के फर्जी दस्तावेज पकड़े जा चुके हैं और बाकी के वेरिफिकेशन रिपोर्ट आनी अभी बाकी है।
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इस तरह से अफसरों को किया गुमराह
सेना में भर्ती के लिए युवाओं ने जिस तरह से फर्जी दस्तावेज तैयार करवाए हैं, उनमें विभिन्न विभागों के अफसरों व उनके स्टाफ को भी गुमराह किया गया है। सेना की जांच के मुताबिक कुछ युवाओं ने स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट और स्कूल ट्रांसफर सर्टिफिकेट में बड़ा खेल खेला। इन युवाओं ने पहले तो फर्जी ढंग से इन स्कूल लिविंग व स्कूल ट्रांसफर सर्टिफिकेट तैयार किए और उसमें अपनी उम्र कुछेक एक साल कम भर दी, उसके बाद इन छात्रों ने ओपन बोर्ड से दसवीं कक्षा का फर्जी सर्टिफिकेट भी बनवा लिया। इस पर युवाओं ने अपनी उम्र कम लिखवा ली, ताकि सैन्य भर्ती रैलियों में वे ओवर एज होने के बावजूद भी भाग लिया जा सके।
अब संबंधित जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों ने जब सेना द्वारा भेजे गए स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट, ओपन बोर्ड सर्टिफिकेट व स्कूल ट्रांसफर सर्टिफिकेट की गंभीरता से जांच करवाई, तो ये बात सामने आई कि ये दस्तावेज तो बोर्ड व शिक्षा विभाग ने जारी ही नहीं किए हैं।
उधर, इन्ही फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज के आधार पर युवाओं ने कई तहसीलों से अपने फर्जी डोमिसाइल भी बनवा लिए थे। लेकिन अब जब गहनता से जांच हुई, तो ये भी सामने आई कि जब डोमिसाइल के लिए प्रस्तुत दस्तावेज ही फर्जी थे, तो तहसील कार्यालय से तैयार डोमिसाइल कैसे ठीक हो सकते हैं। डोमिसाइल पर पता कुछ और था और अब जब जांच हुई तो मालूम चला कि आवेदक तो उस पते पर रहता ही नहीं। इसके चलते कुछ जिलों के तहसीलों ने जांच के बाद तैयार करवाए गए डोमिसाइल को भी फर्जी करार देकर सेना कार्यालय को रिपोर्ट भेज दी है।
अब दलालों का नेटवर्क खंगालने की तैयारी
आवेदक युवाओं ने इन फर्जी दस्तावेज को दलालों की मदद से तैयार किया है। लिहाजा पुलिस पहले तो युवा आवेदकों पर दबिश देगी और फिर उनकी मदद से उन दलालों तक पहुंचेंगी, जिनकी मदद से उन्होंने इन फर्जी दस्तावेज को तैयार किया है। क्योंकि सैन्य अफसरों ने भी साफ कर दिया है कि इस तरह के फर्जी दस्तावेज पकड़े जाना बड़ी बात नहीं है, बड़ी बात तभी है जब दलालों पर पुलिस शिकंजा कसे। सैन्य अफसरों ने इस बाबत अंबाला पुलिस अधीक्षक से भी मदद मांगी है कि वे इस मामले में दलालों पर भी नकेल कसवाए।
इस मामले में कैंट पुलिस ने परचा दर्ज कर लिया है। सेना से कुछ और दस्तावेज लेने अभी बाकी हैं। उसके बाद आगामी प्रक्रिया अमल में लाई जाएगी। पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है।
-बलवंत सिंह, बीसी बाजार, चौकी प्रभारी
अंबाला में स्थित सेना के रीजनल भर्ती मुख्यालय ने इसी बाबत अंबाला, पंचकूला, यमुनानगर, करनाल, कुरुक्षेत्र, कैथल और चंडीगढ़ के उपायुक्तों को पत्र भेजकर भर्ती के लिए चयनित युवाओं की सीरियस वेरिफिकेशन के लिए पत्र भी लिखे थे। सैन्य अफसरों का कहना है कि संबंधित जिलों के डीसी ने सेना के इस आग्रह पर अपने निचले अफसरों को सेना के लिए चयनित आवेदकों की ओर से जमा करवाए दस्तावेज की गंभीरता से जांच करने के आदेश भी दिए थे। इसके बाद तहसील व शिक्षा विभाग ने संबंधित दस्तावेज की गंभीरता से जांच की और अभी तक ऐसे 24 मामले सामने आ गए। अभी कई जिलों से वेरिफिकेशन रिपोर्ट आना बाकी है, उम्मीद है फर्जी दस्तावेज के जरिये सैन्य भर्ती के मामलों की संख्या और बढ़ सकती है।
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600 आवेदकों की हो रही है वैरिफिकेशन
उल्लेखनीय है कि सेना ने 15 से लेकर 22 सितंबर 2016 तक मुलाना मैदान में सेना की भर्ती के लिए रैली का आयोजन किया था। उसके बाद 23 अक्तूबर और 29 नवंबर 2016 में इसी भर्ती को लेकर लिखित परीक्षा भी हुई। इसके बाद 600 युवाओं को सेना में भर्ती के लिए शार्टलिस्ट कर लिया गया। अब सेना इन सभी 600 युवाओं के तमाम दस्तावेज को खंगाल रही है, उसमें से 24 युवा आवेदकों के फर्जी दस्तावेज पकड़े जा चुके हैं और बाकी के वेरिफिकेशन रिपोर्ट आनी अभी बाकी है।
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इस तरह से अफसरों को किया गुमराह
सेना में भर्ती के लिए युवाओं ने जिस तरह से फर्जी दस्तावेज तैयार करवाए हैं, उनमें विभिन्न विभागों के अफसरों व उनके स्टाफ को भी गुमराह किया गया है। सेना की जांच के मुताबिक कुछ युवाओं ने स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट और स्कूल ट्रांसफर सर्टिफिकेट में बड़ा खेल खेला। इन युवाओं ने पहले तो फर्जी ढंग से इन स्कूल लिविंग व स्कूल ट्रांसफर सर्टिफिकेट तैयार किए और उसमें अपनी उम्र कुछेक एक साल कम भर दी, उसके बाद इन छात्रों ने ओपन बोर्ड से दसवीं कक्षा का फर्जी सर्टिफिकेट भी बनवा लिया। इस पर युवाओं ने अपनी उम्र कम लिखवा ली, ताकि सैन्य भर्ती रैलियों में वे ओवर एज होने के बावजूद भी भाग लिया जा सके।
अब संबंधित जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों ने जब सेना द्वारा भेजे गए स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट, ओपन बोर्ड सर्टिफिकेट व स्कूल ट्रांसफर सर्टिफिकेट की गंभीरता से जांच करवाई, तो ये बात सामने आई कि ये दस्तावेज तो बोर्ड व शिक्षा विभाग ने जारी ही नहीं किए हैं।
उधर, इन्ही फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज के आधार पर युवाओं ने कई तहसीलों से अपने फर्जी डोमिसाइल भी बनवा लिए थे। लेकिन अब जब गहनता से जांच हुई, तो ये भी सामने आई कि जब डोमिसाइल के लिए प्रस्तुत दस्तावेज ही फर्जी थे, तो तहसील कार्यालय से तैयार डोमिसाइल कैसे ठीक हो सकते हैं। डोमिसाइल पर पता कुछ और था और अब जब जांच हुई तो मालूम चला कि आवेदक तो उस पते पर रहता ही नहीं। इसके चलते कुछ जिलों के तहसीलों ने जांच के बाद तैयार करवाए गए डोमिसाइल को भी फर्जी करार देकर सेना कार्यालय को रिपोर्ट भेज दी है।
अब दलालों का नेटवर्क खंगालने की तैयारी
आवेदक युवाओं ने इन फर्जी दस्तावेज को दलालों की मदद से तैयार किया है। लिहाजा पुलिस पहले तो युवा आवेदकों पर दबिश देगी और फिर उनकी मदद से उन दलालों तक पहुंचेंगी, जिनकी मदद से उन्होंने इन फर्जी दस्तावेज को तैयार किया है। क्योंकि सैन्य अफसरों ने भी साफ कर दिया है कि इस तरह के फर्जी दस्तावेज पकड़े जाना बड़ी बात नहीं है, बड़ी बात तभी है जब दलालों पर पुलिस शिकंजा कसे। सैन्य अफसरों ने इस बाबत अंबाला पुलिस अधीक्षक से भी मदद मांगी है कि वे इस मामले में दलालों पर भी नकेल कसवाए।
इस मामले में कैंट पुलिस ने परचा दर्ज कर लिया है। सेना से कुछ और दस्तावेज लेने अभी बाकी हैं। उसके बाद आगामी प्रक्रिया अमल में लाई जाएगी। पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है।
-बलवंत सिंह, बीसी बाजार, चौकी प्रभारी