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Ambala News: मानवाधिकार आयोग का धूलकोट हादसे पर संज्ञान, रिपोर्ट तलब
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- निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत गिरने से सात श्रमिकों की गई थी जान
माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला। धूलकोट में तीन मंजिला निर्माणाधीन गोदाम गिरने के मामले में मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लिया है। आयोग ने इस मामले में उपायुक्त, एसपी और नगर निगम के आयुक्त से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। प्रत्येक अधिकारी से अलग-अलग स्तर पर रिपोर्ट को तलब किया गया है।
मामले की अगली सुनवाई 12 नवंबर तय की गई है। 27 सितंबर को धूलकोट में तीन मंजिला इमारत जमींदोज हो गई थी। इस हादसे में सात श्रमिकों की मौत और 12 गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
शिकायतकर्ता अमरदीप सिंह भाटिया की ओर से आयोग के समक्ष उठाए गए गंभीर मुद्दों के बाद यह बात सामने आई है कि इमारत का निर्माण नियमों को ताक पर रखकर किया जा रहा था। यह हादसा सुरक्षा मानकों की भारी अनदेखी का परिणाम माना जा रहा है।
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उन्होंने पूछा कि क्या इमारत का नक्शा सक्षम प्राधिकारी द्वारा विधिवत स्वीकृत था। क्या निर्माण कार्य तय किए गए बिल्डिंग बायलॉज और सुरक्षा मानकों के तहत हो रहा था। निर्माण स्थल की समय-समय पर जांच क्यों नहीं की गई। इन गंभीर सवालों के घेरे में अब मकान मालिक, बिल्डर, ठेकेदार, इंजीनियर और संबंधित प्रशासनिक अधिकारी आ गए हैं।
एसपी देंगे कार्रवाई का ब्योरा
हरियाणा मानव अधिकार आयोग के न्यायिक सदस्य कुलदीप जैन ने मामले में कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने इसमें जिला प्रशासन से हादसे में जान गंवाने वालों और घायलों की सटीक संख्या, मृतकों के परिजनों को दी गई राहत व मुआवजे तथा प्रशासनिक या मजिस्ट्रेटी जांच के निष्कर्षों पर रिपोर्ट मांगी गई है। नगर निगम कमिश्नर से स्वीकृत नक्शे की कॉपी, एनओसी, निर्माण अनुमति और पूर्व में हुई चेकिंग या नोटिस से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड तलब किया गया है। वहीं एसपी से दर्ज प्राथमिकी, लगाई गई धाराओं, पुलिस जांच की प्रगति और दोषी पाए गए लोगों के खिलाफ की गई कार्रवाई का ब्योरा देने को कहा गया है। मानवाधिकार आयोग ने तकनीकी और संरचनात्मक विशेषज्ञ मूल्यांकन की रिपोर्ट भी मांगी है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
जिम्मेदारी होगी तय
आयोग के असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉक्टर पुनीत अरोड़ा ने बताया कि धूलकोट का यह हादसा गंभीर मानवीय मामला है। दूसरी ओर इससे निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों के पालन और सक्षम अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। अब आयोग के समक्ष प्रस्तुत होने वाली रिपोर्टों से यह स्पष्ट होगा कि संबंधित भवन का निर्माण किन स्वीकृतियों के आधार पर किया जा रहा था, क्या स्वीकृत योजना और सुरक्षा मानकों का पालन हुआ, निर्माण स्थल का निरीक्षण किया गया था या नहीं तथा हादसे के लिए किसी व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी बनती है या नहीं।
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माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला। धूलकोट में तीन मंजिला निर्माणाधीन गोदाम गिरने के मामले में मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लिया है। आयोग ने इस मामले में उपायुक्त, एसपी और नगर निगम के आयुक्त से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। प्रत्येक अधिकारी से अलग-अलग स्तर पर रिपोर्ट को तलब किया गया है।
मामले की अगली सुनवाई 12 नवंबर तय की गई है। 27 सितंबर को धूलकोट में तीन मंजिला इमारत जमींदोज हो गई थी। इस हादसे में सात श्रमिकों की मौत और 12 गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
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शिकायतकर्ता अमरदीप सिंह भाटिया की ओर से आयोग के समक्ष उठाए गए गंभीर मुद्दों के बाद यह बात सामने आई है कि इमारत का निर्माण नियमों को ताक पर रखकर किया जा रहा था। यह हादसा सुरक्षा मानकों की भारी अनदेखी का परिणाम माना जा रहा है।
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उन्होंने पूछा कि क्या इमारत का नक्शा सक्षम प्राधिकारी द्वारा विधिवत स्वीकृत था। क्या निर्माण कार्य तय किए गए बिल्डिंग बायलॉज और सुरक्षा मानकों के तहत हो रहा था। निर्माण स्थल की समय-समय पर जांच क्यों नहीं की गई। इन गंभीर सवालों के घेरे में अब मकान मालिक, बिल्डर, ठेकेदार, इंजीनियर और संबंधित प्रशासनिक अधिकारी आ गए हैं।
एसपी देंगे कार्रवाई का ब्योरा
हरियाणा मानव अधिकार आयोग के न्यायिक सदस्य कुलदीप जैन ने मामले में कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने इसमें जिला प्रशासन से हादसे में जान गंवाने वालों और घायलों की सटीक संख्या, मृतकों के परिजनों को दी गई राहत व मुआवजे तथा प्रशासनिक या मजिस्ट्रेटी जांच के निष्कर्षों पर रिपोर्ट मांगी गई है। नगर निगम कमिश्नर से स्वीकृत नक्शे की कॉपी, एनओसी, निर्माण अनुमति और पूर्व में हुई चेकिंग या नोटिस से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड तलब किया गया है। वहीं एसपी से दर्ज प्राथमिकी, लगाई गई धाराओं, पुलिस जांच की प्रगति और दोषी पाए गए लोगों के खिलाफ की गई कार्रवाई का ब्योरा देने को कहा गया है। मानवाधिकार आयोग ने तकनीकी और संरचनात्मक विशेषज्ञ मूल्यांकन की रिपोर्ट भी मांगी है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
जिम्मेदारी होगी तय
आयोग के असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉक्टर पुनीत अरोड़ा ने बताया कि धूलकोट का यह हादसा गंभीर मानवीय मामला है। दूसरी ओर इससे निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों के पालन और सक्षम अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। अब आयोग के समक्ष प्रस्तुत होने वाली रिपोर्टों से यह स्पष्ट होगा कि संबंधित भवन का निर्माण किन स्वीकृतियों के आधार पर किया जा रहा था, क्या स्वीकृत योजना और सुरक्षा मानकों का पालन हुआ, निर्माण स्थल का निरीक्षण किया गया था या नहीं तथा हादसे के लिए किसी व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी बनती है या नहीं।