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Ambala News: रामशरण माजरा में एथलेटिक्स को बढ़ावा दे रही हैं स्वीटी, युवाओं को सिखा रहीं खेल का हुनर
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कुरुक्षेत्र/बाबैन। गांव रामशरण माजरा की युवा प्रतिभाओं को एथलेटिक्स में आगे बढ़ाने का बीड़ा स्वीटी ने उठाया है। वह गांव के बच्चों को नियमित प्रशिक्षण देकर उनकी खेल प्रतिभा को निखार रही हैं। वर्तमान में करीब 45 खिलाड़ी उनकी देखरेख में एथलेटिक्स का प्रशिक्षण ले रहे हैं। इनमें लड़के और लड़कियों की संख्या लगभग बराबर है।
स्वीटी ने दो साल पहले अपने अथक प्रयासों से गांव में एथलेटिक्स नर्सरी शुरू करवाई थी। इससे पहले उन्होंने दो साल डीएवी पुलिस पब्लिक स्कूल में नर्सरी का संचालन किया था। गांव में नर्सरी मिलने के बाद बच्चों का रुझान खेलों की ओर तेजी से बढ़ा है। गांव में एक पंचायती मैदान है, लेकिन उसकी हालत खस्ता है। खिलाड़ियों और कोच स्वीटी ने मिलकर मैदान की कुछ हालत सुधारे हैं। मैदान की हालत अभी भी ठीक नहीं है। खिलाड़ियों को मूलभूत सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद युवा खिलाड़ी कड़ी मेहनत कर अपनी पहचान बनाने में जुटे हैं। स्वीटी का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। उन्हें सही दिशा और प्रशिक्षण देने की जरूरत है।
खिलाड़ियों की सफलता और प्रेरणा
नियमित अभ्यास और अनुशासन से खिलाड़ी राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच सकते हैं। गांव के दो खिलाड़ी पहले ही स्टेट एथलेटिक्स प्रतियोगिता में अपनी प्रतिभा दिखा चुके हैं। दीवेश कुमार ने स्टेट कीडस प्रतियोगिता में 60 मीटर दौड़ और 80 मीटर हर्डल में रजत पदक हासिल किया है। बाबैन की तमना सैनी का साई पटियाला में चयन हुआ है। इन सफलताओं से अन्य बच्चों का भी उत्साह बढ़ा है। वे खेलों को कॅरिअर के विकल्प के रूप में देखने लगे हैं। एथलेटिक्स नर्सरी में बच्चों को दौड़, लंबी कूद और ऊंची कूद सहित विभिन्न स्पर्धाओं का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
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स्वीटी ने दो साल पहले अपने अथक प्रयासों से गांव में एथलेटिक्स नर्सरी शुरू करवाई थी। इससे पहले उन्होंने दो साल डीएवी पुलिस पब्लिक स्कूल में नर्सरी का संचालन किया था। गांव में नर्सरी मिलने के बाद बच्चों का रुझान खेलों की ओर तेजी से बढ़ा है। गांव में एक पंचायती मैदान है, लेकिन उसकी हालत खस्ता है। खिलाड़ियों और कोच स्वीटी ने मिलकर मैदान की कुछ हालत सुधारे हैं। मैदान की हालत अभी भी ठीक नहीं है। खिलाड़ियों को मूलभूत सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद युवा खिलाड़ी कड़ी मेहनत कर अपनी पहचान बनाने में जुटे हैं। स्वीटी का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। उन्हें सही दिशा और प्रशिक्षण देने की जरूरत है।
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खिलाड़ियों की सफलता और प्रेरणा
नियमित अभ्यास और अनुशासन से खिलाड़ी राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच सकते हैं। गांव के दो खिलाड़ी पहले ही स्टेट एथलेटिक्स प्रतियोगिता में अपनी प्रतिभा दिखा चुके हैं। दीवेश कुमार ने स्टेट कीडस प्रतियोगिता में 60 मीटर दौड़ और 80 मीटर हर्डल में रजत पदक हासिल किया है। बाबैन की तमना सैनी का साई पटियाला में चयन हुआ है। इन सफलताओं से अन्य बच्चों का भी उत्साह बढ़ा है। वे खेलों को कॅरिअर के विकल्प के रूप में देखने लगे हैं। एथलेटिक्स नर्सरी में बच्चों को दौड़, लंबी कूद और ऊंची कूद सहित विभिन्न स्पर्धाओं का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
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