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Ambala News: श्री गोगा मंदिर में छड़ियों का मेला कल
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अंबाला। बब्याल के दलीपगढ़ स्थित प्राचीन श्री गोगा मंदिर में 20 अगस्त को छड़ियों को मेला लगाया जाएगा। गद्दी पर विराजमान योगी शमशेर नाथ ने बताया कि 19 अगस्त को पूर्णिमा के दिन सुबह 9 बजे महाराज गोगाजी के निशान चढ़ाएं जाएंगे। इस दिन एक बड़ा झंडा और कई छोटे झंडे चढ़ाए जाते हैं। इन निशानों की पूजा-अर्चना आरती के साथ ही मेले की शुरुआत होगी।
माड़ी से लोगों का कई वर्षों से विश्वास जुड़ा हुआ है और हर साल राखी के अगले दिन मेले का आयोजन किया जाता है जो इस बार 20 अगस्त को होगा। भगत अपनी मनोकामना अनुसार छड़ी चढ़ाते हैं। इनकी संतान नहीं होती है, वो यहां अपनी मनोकामना बाबा से करते हैं और जब गोगाजी उनकी अर्जी स्वीकार कर लेते हैं तो वह मेले वाले दिन आकर निशान चढ़ाते हैं और जाहर पीर बाबा का शुक्रिया अदा करते हैं।
मेला सारी रात चलता है। उन्होंने बताया कि 21 अगस्त को सुबह 4 बजे आरती की जाएगी और हलवे का भोग लगाया जाएगा। दोपहर 12 बजे भंडारे का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने बताया इस मेले में 10 से 12 हजार लोग माढी पर माथा टेकने के लिए पहुंचते हैं और उन सभी के लिए भोजन-चाय सहित रहने की व्यवस्था भी की जाती है। मंदिर में जयपुर से लाई गुरु गोरखनाथ की मूर्ति, माता काली, हनुमान, 60 साल पुरानी बाबा नाहरसिंह की मूर्ति, पीर की समाधि, महादेव का मंदिर, नगर खेड़ा, माता सुरियल की समाधि, काल भैरों स्थापित हैं। संवाद
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माड़ी से लोगों का कई वर्षों से विश्वास जुड़ा हुआ है और हर साल राखी के अगले दिन मेले का आयोजन किया जाता है जो इस बार 20 अगस्त को होगा। भगत अपनी मनोकामना अनुसार छड़ी चढ़ाते हैं। इनकी संतान नहीं होती है, वो यहां अपनी मनोकामना बाबा से करते हैं और जब गोगाजी उनकी अर्जी स्वीकार कर लेते हैं तो वह मेले वाले दिन आकर निशान चढ़ाते हैं और जाहर पीर बाबा का शुक्रिया अदा करते हैं।
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मेला सारी रात चलता है। उन्होंने बताया कि 21 अगस्त को सुबह 4 बजे आरती की जाएगी और हलवे का भोग लगाया जाएगा। दोपहर 12 बजे भंडारे का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने बताया इस मेले में 10 से 12 हजार लोग माढी पर माथा टेकने के लिए पहुंचते हैं और उन सभी के लिए भोजन-चाय सहित रहने की व्यवस्था भी की जाती है। मंदिर में जयपुर से लाई गुरु गोरखनाथ की मूर्ति, माता काली, हनुमान, 60 साल पुरानी बाबा नाहरसिंह की मूर्ति, पीर की समाधि, महादेव का मंदिर, नगर खेड़ा, माता सुरियल की समाधि, काल भैरों स्थापित हैं। संवाद
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