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Ambala News: एक हजार बड़े बकाएदारों को दूसरा नोटिस जल्द
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संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला सिटी। बकाया संपत्ति कर जमा न करवाने वाले संपत्ति धारकों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। टॉप एक हजार बकाया संपत्ति कर के डिफाल्टरों को निगम की ओर से कर जमा न करवाने पर नोटिस दिए जा चुके हैं, लेकिन बकाया कर जमा न करवाने पर इन टॉप एक हजार डिफाल्टरों को दूसरी नोटिस देने की तैयारी चल रही है। निगम की ओर से नोटिस तैयार करवाए जा रहे हैं।
निगम की ओर से बकाया कर जमा करवाने के लिए 31 जुलाई तक 10 प्रतिशत की छूट दी गई थी। अब निगम ने बकाया कर वसूलने के लिए अपनी तैयारी शुरू कर दी है। अगर दूसरी नोटिस मिलने के बाद भी बकाया कर जमा नहीं करवाया तो निगम संपत्तिधारकों पर कार्रवाई हो सकती है। इन संपत्ति में रिहायशी, वाणिज्यिक, इंडस्ट्री, बैंक, सरकारी विभाग और निजी संपत्ति शामिल है।
सर्वे में मिलीं कई गलतियां : निगम की ओर से पहले किए गए सर्वे में कई गलतियां की गई है। कई लोग ऐसे भी निगम में पहुंचते हैं, जिनकी संपत्ति कर आईडी से दो से तीन संपत्ति से जुड़ी होती है। इस वजह से उनका संपत्ति कर भी हजारों की जगह लाखों में पहुंच जाता है।
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जब निगम कर्मचारी संपत्ति को सील करने के लिए जाते हैं तो वहां जाकर आईडी चेक पर हकीकत पता चलती है। यही समस्या लोगों के सामने भी बनी हुई है, लोगों को अपनी आईडी से दूसरे लोगों की आईडी का टैक्स हटवाने के लिए भी चक्कर काटने पड़ रहे हैं। शहर में निगम की 1 लाख 23 हजार संपत्ति हैं। इनमें से करीब 36 हजार संपत्ति की सत्यापित हो पाई है।
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अंबाला सिटी। बकाया संपत्ति कर जमा न करवाने वाले संपत्ति धारकों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। टॉप एक हजार बकाया संपत्ति कर के डिफाल्टरों को निगम की ओर से कर जमा न करवाने पर नोटिस दिए जा चुके हैं, लेकिन बकाया कर जमा न करवाने पर इन टॉप एक हजार डिफाल्टरों को दूसरी नोटिस देने की तैयारी चल रही है। निगम की ओर से नोटिस तैयार करवाए जा रहे हैं।
निगम की ओर से बकाया कर जमा करवाने के लिए 31 जुलाई तक 10 प्रतिशत की छूट दी गई थी। अब निगम ने बकाया कर वसूलने के लिए अपनी तैयारी शुरू कर दी है। अगर दूसरी नोटिस मिलने के बाद भी बकाया कर जमा नहीं करवाया तो निगम संपत्तिधारकों पर कार्रवाई हो सकती है। इन संपत्ति में रिहायशी, वाणिज्यिक, इंडस्ट्री, बैंक, सरकारी विभाग और निजी संपत्ति शामिल है।
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सर्वे में मिलीं कई गलतियां : निगम की ओर से पहले किए गए सर्वे में कई गलतियां की गई है। कई लोग ऐसे भी निगम में पहुंचते हैं, जिनकी संपत्ति कर आईडी से दो से तीन संपत्ति से जुड़ी होती है। इस वजह से उनका संपत्ति कर भी हजारों की जगह लाखों में पहुंच जाता है।
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जब निगम कर्मचारी संपत्ति को सील करने के लिए जाते हैं तो वहां जाकर आईडी चेक पर हकीकत पता चलती है। यही समस्या लोगों के सामने भी बनी हुई है, लोगों को अपनी आईडी से दूसरे लोगों की आईडी का टैक्स हटवाने के लिए भी चक्कर काटने पड़ रहे हैं। शहर में निगम की 1 लाख 23 हजार संपत्ति हैं। इनमें से करीब 36 हजार संपत्ति की सत्यापित हो पाई है।