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Ambala News: संत नागा बाबा का एतिहासिक मेला नौ को
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अंबाला। अंबाला छावनी के वायुसेना क्षेत्र में लगने वाले एतिहासिक संत नागा बाबा के मेले को लेकर गुरुद्वारा श्री सिंह सभा के पदाधिकारियों ने तैयारियां शुरू कर दी है। इस बार यह मेला नौ फरवरी को लगाया जाएगा। सात फरवरी से गुरुद्वारा श्री सिंह सभा धूलकोट में श्री अखंड पाठ साहिब शुरू होगा। इसके लिए वर्ष में एक बार एयरफोर्स स्टेशन का गेट श्रद्धालुओं के लिए खोला जाता है। यहां पर चप्पे चप्पे पर पुलिस और वायु सेना की निगरानी रहती है।
तीन दिनों तक चलने वाले पाठ में नौ फरवरी को भोग डाले जाएंगे। मुख्य दिवस नौ फरवरी को संत नागा बाबा के दर्शन के लिए एयरफोर्स स्टेशन का गेट सुबह सात बजे से लेकर शाम चार बजे तक ही खोला जाएगा। सबसे पहले गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी ही पूजा करेगी। इसके बाद अन्य श्रद्धालुओं को दर्शन होंगे। इस दौरान गुरुद्वारा में गुरु का लंगर भी अटूट बरताया जाएगा।
वर्षों पुराना है मेले का इतिहास
गुरुद्वारा श्री सिंह सभा धूलकोट प्रबंधन कमेटी के प्रधान सुरजीत सिंह ने बताया कि प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष भी संत नागा बाबा मेले का आयाेजन धूमधाम से किया जाएगा। सात फरवरी से पाठ शुरू हो जाएंगे। इसी दौरान लंगर भी पूरा दिन चलेगा। उन्होंने बताया कि संत नागा बाबा की समाधि पर संतरी रंग की चादर चढ़ाई जाती है। इसलिए श्रद्धालु हरी चादर लेकर न आएं। यह मेला कई वर्षों से चलता आ रहा है। ऐसी मान्यता है कि 1965 और 1971 की भारत-पाक लड़ाई में वायु सेना स्टेशन के पास गिराया गया एक भी बम संत बाबा ने फटने नहीं दिया था। इसलिए संत बाबा की समाधि पर माथा टेकने के लिए अंबाला सहित पंजाब के क्षेत्रों से भी हजारों श्रद्धालु यहां पर पहुंचते हैं।
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गांव से ही लेते हैं चंदा
मुख्य ग्रंथी गुरदयाल सिंह ने बताया कि इस मेले के लिए गांव के लोग ही आपस में चंदा इकट्ठा करके मेले का आयोजन करते हैं। उन्होंने कहा कि कई लोग संत नागा बाबा के लंगर के नाम पर पर्ची काट रहे हैं लेकिन गुरुद्वारा की ओर से गांव से बाहर कहीं भी पर्ची नहीं काटी जाती। इसलिए जिस श्रद्धालु को दान देना है वह गुरुद्वारा में ही जाकर दान कर सकता है।
यह वस्तुएं रहेंगी वर्जित
एयरफोर्स स्टेशन में बनी संत नागा बाबा की समाधि पर जाने के लिए श्रद्धालु मोबाइल, कैमरा, कीमती सामान, इलेक्ट्रॉनिक घड़ी या अन्य उपकरण, बाहरी खाने-पीने की वस्तु पूरी तरह से वर्जित रहेंगी।
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तीन दिनों तक चलने वाले पाठ में नौ फरवरी को भोग डाले जाएंगे। मुख्य दिवस नौ फरवरी को संत नागा बाबा के दर्शन के लिए एयरफोर्स स्टेशन का गेट सुबह सात बजे से लेकर शाम चार बजे तक ही खोला जाएगा। सबसे पहले गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी ही पूजा करेगी। इसके बाद अन्य श्रद्धालुओं को दर्शन होंगे। इस दौरान गुरुद्वारा में गुरु का लंगर भी अटूट बरताया जाएगा।
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वर्षों पुराना है मेले का इतिहास
गुरुद्वारा श्री सिंह सभा धूलकोट प्रबंधन कमेटी के प्रधान सुरजीत सिंह ने बताया कि प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष भी संत नागा बाबा मेले का आयाेजन धूमधाम से किया जाएगा। सात फरवरी से पाठ शुरू हो जाएंगे। इसी दौरान लंगर भी पूरा दिन चलेगा। उन्होंने बताया कि संत नागा बाबा की समाधि पर संतरी रंग की चादर चढ़ाई जाती है। इसलिए श्रद्धालु हरी चादर लेकर न आएं। यह मेला कई वर्षों से चलता आ रहा है। ऐसी मान्यता है कि 1965 और 1971 की भारत-पाक लड़ाई में वायु सेना स्टेशन के पास गिराया गया एक भी बम संत बाबा ने फटने नहीं दिया था। इसलिए संत बाबा की समाधि पर माथा टेकने के लिए अंबाला सहित पंजाब के क्षेत्रों से भी हजारों श्रद्धालु यहां पर पहुंचते हैं।
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गांव से ही लेते हैं चंदा
मुख्य ग्रंथी गुरदयाल सिंह ने बताया कि इस मेले के लिए गांव के लोग ही आपस में चंदा इकट्ठा करके मेले का आयोजन करते हैं। उन्होंने कहा कि कई लोग संत नागा बाबा के लंगर के नाम पर पर्ची काट रहे हैं लेकिन गुरुद्वारा की ओर से गांव से बाहर कहीं भी पर्ची नहीं काटी जाती। इसलिए जिस श्रद्धालु को दान देना है वह गुरुद्वारा में ही जाकर दान कर सकता है।
यह वस्तुएं रहेंगी वर्जित
एयरफोर्स स्टेशन में बनी संत नागा बाबा की समाधि पर जाने के लिए श्रद्धालु मोबाइल, कैमरा, कीमती सामान, इलेक्ट्रॉनिक घड़ी या अन्य उपकरण, बाहरी खाने-पीने की वस्तु पूरी तरह से वर्जित रहेंगी।