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Ambala News: खिलाड़ियों के लिए संसाधन और अच्छी खुराक जरूरी
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अंबाला। छावनी के वार हीरोज स्टेडियम में अमर उजाला की ओर से हालात से लड़ बने सूरमा अभियान के तहत संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में कोच, बॉक्सिंग, जिम्नास्टिक, फुटबाल और स्वीमिंग के खिलाड़ियों ने भाग लिया।
उन्होंने एक स्वर में कहा कि खेलों को लेकर हरियाणा के खिलाड़ियों ने देश ही नहीं विदेशों में भी अपनी धाक बनाई हैं। अक्सर देखा गया है कि अच्छा खिलाड़ी बेहतर संसाधन और खुराक की कमी के चलते आगे नहीं बढ़ पाता। कहीं न कहीं उसकी काबिलियत दम तोड़ देती है।
एक अच्छा खिलाड़ी बनने के लिए जिम्नास्टिक में पांच से छह साल लग जाते हैं। कई बार देखा गया है कि जरूरतमंद परिवार से ही अच्छे खिलाड़ी निकलकर सामने आते हैं, मगर उनके पास सीमित संसाधन होते हैं। कई बार तो कोच खुद मदद करते हैं। ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि खिलाड़ियों का किसी का मोहताज न होना पड़े। सतपाल, जिम्नास्टिक कोच
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मेरे पास 40 से 50 बच्चे बॉक्सिंग का अभ्यास करते हैं। कई बच्चे ऐसे हैं, जो जरूरतमंद परिवार से आते हैं। कई बार इन परिवारों के बच्चों को सही मात्रा में खुराक उपलब्ध नहीं हो पाती। जिसके कारण वह आगे बढ़ने से वंचित रह जाते हैं। किसी और खिलाड़ी के साथ ऐसा नहीं होना चाहिए। संजय, बॉक्सिंग कोच
खिलाड़ियों को सबसे पहले अपने घर से खेल को लेकर साथ मिलना चाहिए। अच्छा खेलने वाले खिलाड़ियों के लिए सरकार द्वारा खेल नर्सरी बनाई गई है। इस खेल नर्सरी के माध्यम से खिलाड़ियों के लिए खुराक का इंतजाम करवाया जाता है। पूनम, बॉक्सिंग कोच
खेल से जुड़े संसाधन पूरे होंगे तो हर खिलाड़ी देश के लिए पदक लाने में जी जान लगा देगा। कई खिलाडि़यों के सामने तैयारी में प्रयोग होने वाली चीजें भी नहीं होती। यह समस्या नहीं होनी चाहिए । साहिल, खिलाड़ी
अगर किसी खिलाड़ी को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का सपना पूरा करना है तो उसकी सुविधाएं भी उसी स्तर की हों। खेल अगर बॉक्सिंग का है तो रिंग भी अंतरराष्ट्रीय स्तर का हो। यश, खिलाड़ी
हमारे पास अलग से हॉल नहीं हैं। अभी खुले में बॉक्सिंग की प्रैक्टिस करने को मजबूर होना पड़ता है। यह संसाधन पूरे होने चाहिए। मानव, खिलाड़ी
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उन्होंने एक स्वर में कहा कि खेलों को लेकर हरियाणा के खिलाड़ियों ने देश ही नहीं विदेशों में भी अपनी धाक बनाई हैं। अक्सर देखा गया है कि अच्छा खिलाड़ी बेहतर संसाधन और खुराक की कमी के चलते आगे नहीं बढ़ पाता। कहीं न कहीं उसकी काबिलियत दम तोड़ देती है।
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एक अच्छा खिलाड़ी बनने के लिए जिम्नास्टिक में पांच से छह साल लग जाते हैं। कई बार देखा गया है कि जरूरतमंद परिवार से ही अच्छे खिलाड़ी निकलकर सामने आते हैं, मगर उनके पास सीमित संसाधन होते हैं। कई बार तो कोच खुद मदद करते हैं। ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि खिलाड़ियों का किसी का मोहताज न होना पड़े। सतपाल, जिम्नास्टिक कोच
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मेरे पास 40 से 50 बच्चे बॉक्सिंग का अभ्यास करते हैं। कई बच्चे ऐसे हैं, जो जरूरतमंद परिवार से आते हैं। कई बार इन परिवारों के बच्चों को सही मात्रा में खुराक उपलब्ध नहीं हो पाती। जिसके कारण वह आगे बढ़ने से वंचित रह जाते हैं। किसी और खिलाड़ी के साथ ऐसा नहीं होना चाहिए। संजय, बॉक्सिंग कोच
खिलाड़ियों को सबसे पहले अपने घर से खेल को लेकर साथ मिलना चाहिए। अच्छा खेलने वाले खिलाड़ियों के लिए सरकार द्वारा खेल नर्सरी बनाई गई है। इस खेल नर्सरी के माध्यम से खिलाड़ियों के लिए खुराक का इंतजाम करवाया जाता है। पूनम, बॉक्सिंग कोच
खेल से जुड़े संसाधन पूरे होंगे तो हर खिलाड़ी देश के लिए पदक लाने में जी जान लगा देगा। कई खिलाडि़यों के सामने तैयारी में प्रयोग होने वाली चीजें भी नहीं होती। यह समस्या नहीं होनी चाहिए । साहिल, खिलाड़ी
अगर किसी खिलाड़ी को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का सपना पूरा करना है तो उसकी सुविधाएं भी उसी स्तर की हों। खेल अगर बॉक्सिंग का है तो रिंग भी अंतरराष्ट्रीय स्तर का हो। यश, खिलाड़ी
हमारे पास अलग से हॉल नहीं हैं। अभी खुले में बॉक्सिंग की प्रैक्टिस करने को मजबूर होना पड़ता है। यह संसाधन पूरे होने चाहिए। मानव, खिलाड़ी