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Ambala News: इंटीग्रेटेड लैब का दर्जा पर ऑनलाइन नहीं मिल रही रिपोर्ट
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अंबाला कैंट की जिला इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैबोरेट्री : संवाद
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- कैंट के नागरिक अस्पताल की लैब में पुराने ढर्रे पर चल रही व्यवस्था
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। कैंट के नागरिक अस्पताल की लैब को जिला इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लेबोरेट्री का दर्जा तो दे दिया गया है लेकिन धरातल पर सुविधाएं आज भी पुराने ढर्रे पर चल रही हैं। जिस लैब को पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस होना चाहिए था, वहां मरीजों को लाइनों में लगकर कागज पर रिपोर्ट दी जा रही है।
ऑनलाइन रिपोर्ट की सुविधा न होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यहां तक कि अपनी रिपोर्ट के लिए अगले दिन पहले अस्पताल की चौथी मंजिल पर बनी लैब के चक्कर काटने पड़ते हैं। तब डॉक्टर को रिपोर्ट दिखाकर उपचार मिलता है।
ऑनलाइन से रिपोर्ट गुम होने का नहीं रहता खतरा
नियमों के अनुसार, इंटीग्रेटेड लैब के दर्जे का अर्थ है कि मरीज को जांच के बाद उसकी रिपोर्ट सीधे मोबाइल पर लिंक या व्हाट्सएप के जरिये मिलनी चाहिए। इससे न केवल समय की बचत होती है, बल्कि रिपोर्ट के गुम होने या फटने का डर नहीं रहता। उधर, अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि लैब से मरीजों को मैसेज भेजने की सुविधा है लेकिन अक्सर मरीज बिना व्हाट्सएप नंबर वाले छोटे फोन के नंबर देकर आते हैं। ऐसे में उन्हें रिपोर्ट दिखाई नहीं देती है। यहीं कारण है कि वह इसे अनियमित तौर पर नहीं देते। जिला इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लेबोरेट्री में जिलाभर से सैंपल जांच के लिए आते हैं।
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मोबाइल पर रिपोर्ट आने की प्रक्रिया
नागरिक अस्पताल में मोबाइल पर टेस्ट की रिपोर्ट उपलब्ध करवाने के लिए मरीज के नाम की पर्ची बनाते समय मोबाइल नंबर दर्ज कराना अनिवार्य है। अस्पताल के कंप्यूटर में मोबाइल नंबर दर्ज करते ही मरीज के नाम यूएचआईडी यानी यूनिक हेल्थ आइडेंटीफिकेशन आइडी बनेगी। इसके बाद जब वह लैब में पहुंचता है तो वहां पर यूएचआईडी के आधार पर एसआरएफ आइडी बनेगी। रिपोर्ट को एसआरएफ आइडी के साथ लिंक करते ही स्वयं यूआरएल कोड बन जाएगा। इसके बाद जो भी रजिस्टर्ड नंबर होगा उस पर लैब की रिपोर्ट पहुंचेगी। इसे मोबाइल पर ओपन करते ही पूरी जांच रिपोर्ट मोबाइल पर दिख जाती है।
केस-1 : अंबाला कैंट निवासी शीशपाल ने बताया कि वीरवार को वह अस्पताल की ओपीडी में जांच करवाने आया था। टेस्ट लिखे जाने के बाद वह सैंपल देकर चला गया था। शनिवार को वह रिपोर्ट लेने के लिए पहले ऊपर लैब में आया। रिपोर्ट मोबाइल में भी सीधा आ जाती है व संबंधित डॉक्टर के पास चली जाती है इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। ऐसा होता तो उनका चक्कर बच जाता। लैब से दो कागज पर ही रिपोर्ट दी जाती है।
केस-2 : ग्वालमंडी निवासी रामू ने बताया कि वह अपनी मां गुड्डी को लेकर अस्पताल आए थे। लैब से तो कागज पर ही रिपोर्ट मिलती है। यहीं रिपोर्ट दिखाने के बाद डॉक्टर ओपीडी में उपचार करते हैं। ऑनलाइन रिपोर्ट की सुविधा है तो उसका इस्तेमाल होना चाहिए।
यह मेरे संज्ञान में नहीं है कि ऑनलाइन रिपोर्ट नहीं दी जा रही है। अगर ऐसा है तो उसे जल्द शुरू करवाया जाएगा ताकि मरीजों को राहत मिल सके।
- डॉ. राकेश सहल, सीएमओ अंबाला
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संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। कैंट के नागरिक अस्पताल की लैब को जिला इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लेबोरेट्री का दर्जा तो दे दिया गया है लेकिन धरातल पर सुविधाएं आज भी पुराने ढर्रे पर चल रही हैं। जिस लैब को पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस होना चाहिए था, वहां मरीजों को लाइनों में लगकर कागज पर रिपोर्ट दी जा रही है।
ऑनलाइन रिपोर्ट की सुविधा न होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यहां तक कि अपनी रिपोर्ट के लिए अगले दिन पहले अस्पताल की चौथी मंजिल पर बनी लैब के चक्कर काटने पड़ते हैं। तब डॉक्टर को रिपोर्ट दिखाकर उपचार मिलता है।
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ऑनलाइन से रिपोर्ट गुम होने का नहीं रहता खतरा
नियमों के अनुसार, इंटीग्रेटेड लैब के दर्जे का अर्थ है कि मरीज को जांच के बाद उसकी रिपोर्ट सीधे मोबाइल पर लिंक या व्हाट्सएप के जरिये मिलनी चाहिए। इससे न केवल समय की बचत होती है, बल्कि रिपोर्ट के गुम होने या फटने का डर नहीं रहता। उधर, अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि लैब से मरीजों को मैसेज भेजने की सुविधा है लेकिन अक्सर मरीज बिना व्हाट्सएप नंबर वाले छोटे फोन के नंबर देकर आते हैं। ऐसे में उन्हें रिपोर्ट दिखाई नहीं देती है। यहीं कारण है कि वह इसे अनियमित तौर पर नहीं देते। जिला इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लेबोरेट्री में जिलाभर से सैंपल जांच के लिए आते हैं।
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मोबाइल पर रिपोर्ट आने की प्रक्रिया
नागरिक अस्पताल में मोबाइल पर टेस्ट की रिपोर्ट उपलब्ध करवाने के लिए मरीज के नाम की पर्ची बनाते समय मोबाइल नंबर दर्ज कराना अनिवार्य है। अस्पताल के कंप्यूटर में मोबाइल नंबर दर्ज करते ही मरीज के नाम यूएचआईडी यानी यूनिक हेल्थ आइडेंटीफिकेशन आइडी बनेगी। इसके बाद जब वह लैब में पहुंचता है तो वहां पर यूएचआईडी के आधार पर एसआरएफ आइडी बनेगी। रिपोर्ट को एसआरएफ आइडी के साथ लिंक करते ही स्वयं यूआरएल कोड बन जाएगा। इसके बाद जो भी रजिस्टर्ड नंबर होगा उस पर लैब की रिपोर्ट पहुंचेगी। इसे मोबाइल पर ओपन करते ही पूरी जांच रिपोर्ट मोबाइल पर दिख जाती है।
केस-1 : अंबाला कैंट निवासी शीशपाल ने बताया कि वीरवार को वह अस्पताल की ओपीडी में जांच करवाने आया था। टेस्ट लिखे जाने के बाद वह सैंपल देकर चला गया था। शनिवार को वह रिपोर्ट लेने के लिए पहले ऊपर लैब में आया। रिपोर्ट मोबाइल में भी सीधा आ जाती है व संबंधित डॉक्टर के पास चली जाती है इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। ऐसा होता तो उनका चक्कर बच जाता। लैब से दो कागज पर ही रिपोर्ट दी जाती है।
केस-2 : ग्वालमंडी निवासी रामू ने बताया कि वह अपनी मां गुड्डी को लेकर अस्पताल आए थे। लैब से तो कागज पर ही रिपोर्ट मिलती है। यहीं रिपोर्ट दिखाने के बाद डॉक्टर ओपीडी में उपचार करते हैं। ऑनलाइन रिपोर्ट की सुविधा है तो उसका इस्तेमाल होना चाहिए।
यह मेरे संज्ञान में नहीं है कि ऑनलाइन रिपोर्ट नहीं दी जा रही है। अगर ऐसा है तो उसे जल्द शुरू करवाया जाएगा ताकि मरीजों को राहत मिल सके।
- डॉ. राकेश सहल, सीएमओ अंबाला

अंबाला कैंट की जिला इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैबोरेट्री : संवाद

अंबाला कैंट की जिला इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैबोरेट्री : संवाद