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महिला की मौत पर निजी अस्पताल के बाहर हंगामा
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अस्पताल के बाहर खड़े मृतका के परिजन व पुलिस।
- फोटो : Ambala
आपरेशन के दौरान सुल्तानपुर निवासी महिला की मौत से गुस्साए परिजनों ने एक निजी अस्पताल के बाहर जमकर हंगामा किया। इस दौरान परिजनों ने अस्पताल के संचालक पर आपरेशन में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। हंगामे की सूचना पर एसजीपीसी सदस्य हरपाल सिंह पाली और पूर्व मेयर रमेशमल मौके पर पहुंचे। उन्होंने परिजनों को भीतर ले जाकर प्रबंधन के साथ बातचीत करवाई तब जाकर विवाद शांत हुआ और परिजन शव को लेकर वापस लौट गए।
सुलतानपुर निवासी मृतक महिला के पति नरेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि उनकी पत्नी के बच्चादानी का आपरेशन किया जाना था। 26 अगस्त की सुबह उसने पत्नी 39 वर्षीय हरप्रीत कौर को अस्पताल में भर्ती करवाया। शाम करीब सात बजे परिजनों को बताया गया कि आज ही आपरेशन कर दिया जाएगा। आपरेशन रात 11 बजे तक चला। परिजनों का आरोप हैं कि आपरेशन से पहले सारे टेस्ट किए गए थे। डाक्टर ने बताया था कि हरप्रीत के शरीर में 10 ग्राम खून है लेकिन आपरेशन के दौरान बताया गया कि हरप्रीत में खून 5.5 ग्राम रह गया है। परिजनों ने 4 यूनिट रक्त व्यवस्था करवाई। आपरेशन के बाद महिला की हालत खराब होने लगी तो उसे डेराबस्सी के एक निजी अस्पताल में रेफर कर दिया गया। जहां डाक्टर ने बताया कि ओवर फ्लूड के चलते महिला का बीपी नियंत्रित नहीं हो रहा है। परिजनों ने आरोप यह भी लगाए कि डाक्टर ने यह भी बताया कि आपरेशन भी सही नहीं हुआ है। इसी कारण वहां इलाज के दौरान हरप्रीत की मौत हो गई।
डाक्टर को बहार बुलाने की मांग पर अड़े परिजन
डेरा बस्सी के अस्पताल से शव लेकर परिजन अंबाला शहर के निजी अस्पताल पहुंचे। गुस्साए अभिभावकों ने डाक्टर को बाहर बुलाने की मांग कर दी लेकिन डाक्टर नहीं आए। इससे मामले ने तूल पकड़ लिया। परिजनों ने कहा कि डाक्टर ने ही वहां से शव लाने के लिए एंबुलेंस भेजी थी और माफी मांगते हुए मुुआवजा देने की बात भी उन्हें कही। गुस्साए परिजनों ने आरोप लगाया कि उन्हें पैसे नहीं चाहिए उनका तो बसा बसाया घर ही उजड़ गया है। परिजनों के बवाल को शांत करने के लिए भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा और अस्पताल परिसर पुलिस छावनी में तब्दील हो गया।
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सुलतानपुर निवासी मृतक महिला के पति नरेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि उनकी पत्नी के बच्चादानी का आपरेशन किया जाना था। 26 अगस्त की सुबह उसने पत्नी 39 वर्षीय हरप्रीत कौर को अस्पताल में भर्ती करवाया। शाम करीब सात बजे परिजनों को बताया गया कि आज ही आपरेशन कर दिया जाएगा। आपरेशन रात 11 बजे तक चला। परिजनों का आरोप हैं कि आपरेशन से पहले सारे टेस्ट किए गए थे। डाक्टर ने बताया था कि हरप्रीत के शरीर में 10 ग्राम खून है लेकिन आपरेशन के दौरान बताया गया कि हरप्रीत में खून 5.5 ग्राम रह गया है। परिजनों ने 4 यूनिट रक्त व्यवस्था करवाई। आपरेशन के बाद महिला की हालत खराब होने लगी तो उसे डेराबस्सी के एक निजी अस्पताल में रेफर कर दिया गया। जहां डाक्टर ने बताया कि ओवर फ्लूड के चलते महिला का बीपी नियंत्रित नहीं हो रहा है। परिजनों ने आरोप यह भी लगाए कि डाक्टर ने यह भी बताया कि आपरेशन भी सही नहीं हुआ है। इसी कारण वहां इलाज के दौरान हरप्रीत की मौत हो गई।
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डाक्टर को बहार बुलाने की मांग पर अड़े परिजन
डेरा बस्सी के अस्पताल से शव लेकर परिजन अंबाला शहर के निजी अस्पताल पहुंचे। गुस्साए अभिभावकों ने डाक्टर को बाहर बुलाने की मांग कर दी लेकिन डाक्टर नहीं आए। इससे मामले ने तूल पकड़ लिया। परिजनों ने कहा कि डाक्टर ने ही वहां से शव लाने के लिए एंबुलेंस भेजी थी और माफी मांगते हुए मुुआवजा देने की बात भी उन्हें कही। गुस्साए परिजनों ने आरोप लगाया कि उन्हें पैसे नहीं चाहिए उनका तो बसा बसाया घर ही उजड़ गया है। परिजनों के बवाल को शांत करने के लिए भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा और अस्पताल परिसर पुलिस छावनी में तब्दील हो गया।
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