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बंद कमरों की नीतियों से कुछ नहीं होगा, स्कूलों के हालात देखे सरकार

Sat, 12 Sep 2015 12:28 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/अंबाला
ब्यूरो/अमर उजाला/अंबाला Updated Sat, 12 Sep 2015 12:28 AM IST
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polycies are not enough, implement them for result in education

पीकेआर जैन सीनियर सेकेंडरी स्कूल में सरकार द्वारा नई शिक्षा नीति के संबंध में आयोजित की गई सुझाव सभा में उस वक्त जमकर बहस हो गई, जब शिक्षक, अभिभावकों, प्राचार्यों और पार्षदों से नई शिक्षा नीति पर सुझाव मांगे जा रहे थे। 

लेकिन जब इन लोगों से बेहतर शिक्षा नीति के बारे में पूछा गया तो पार्षदों, अभिभावकों व अन्य लोगों ने जमकर भड़ास निकाली। उन्होंने बैठक में साफ कहा कि इन बंद कमरों में बैठकर शिक्षा नीति कभी बेहतर नहीं बन सकती है, इसके लिए सरकारी स्कूलों मे जाकर और वहां के हालातों का जमीनी जायजा लेकर ही बात बनेगी।

क्योंकि आज सरकारी स्कूलों में अव्यवस्थाओं का इस कद्र बोलबाला है कि कोई भी व्यक्ति जल्दी से अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाने को तैयार ही नहीं होता। आज जरूरतमंद लोग ही अपने बच्चों को कम फीस की वजह से सरकारी स्कूलों में भेजते हैं। इसलिए यदि शिक्षा का स्तर बढ़ाना है तो सरकारी स्कूलों में व्यवस्थाओं का स्तर बढ़ाना होगा। इस दौरान कई मसलों पर लोगों, जनप्रतिनिधियों व अफसरों की बहस होती रही। इस अवसर पर डीईओ धर्मवीर कादियान, सीनियर डिप्टी मेयर दुर्गा सिंह अत्री, पार्षद दलजीत भाटिया, पार्षद जसविंद्र सिंह जस्सी मास्टर ट्रेनर डाक्टर सोनिका, जितेंद्र समेत विभिन्न स्कूलों के प्राचार्य, जनप्रतिनिधि, समाज सेवी व अभिभावक मौजूद रहे।

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पार्षद बोला, प्राइवेट स्कूलों से क्यों नहीं सीखता विभाग

बैठक में उपस्थित पार्षद दलजीत सिंह भाटिया सीटू ने वहां मौजूद अफसरों के समक्ष साफ कहा कि शिक्षा विभाग को प्राइवेट स्कूलों से आज भी बहुत कुछ सीखने की जरूरत है। उनके अनुसार सरकार इतना ज्यादा बजट सरकारी स्कूलों के लिए जारी करती है, लेकिन उसके बावजूद भी सरकारी स्कूलों की हालत बद से बदत्तर है। इसी वजह से लोगों द्वारा इन स्कूलों के प्रति बेरुखी रहती है। सरकारी टीचर काफी ज्यादा वेतन लेते हैं, फिर भी उनका रिजल्ट फिसड्डी रहता है, इसकी वजह यह है कि शिक्षा विभाग खराब रिजल्ट आने वाले शिक्षकों के खिलाफ आज तक कोई कड़ी कार्रवाई नहीं करता। यही वजह से हैं कि सरकारी स्कूल पिछड़ रहे हैं।

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सरकारी टीचर ने खोली शिक्षा विभाग की पोल

सुझाव बैठक में एक सरकारी टीचर भी मौजूद था। इस शिक्षक में भी सरकारी स्कूलों में व्याप्त अव्यवस्थाओं को लेकर इतनी ज्यादा टीस थी कि उसने सभा में ही जमकर अपनी भड़ास निकाल दी। इस सरकारी टीचर ने कहा कि सरकार ने सभी सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर तो दे दिए, लेकिन अधिकतर ग्रामीण स्कूलों में तो दिन में लाइट ही नहीं होती। इसलिए इन कंप्यूटरों का क्या फायदा। सरकारी स्कूल हॉटलाइन से जुड़े होने चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में जनरेटर सुविधा भी नहीं है, जहां है वहां खराब पड़े हैं, जो अरसे से ठीक ही नहीं हुए। सरकारी स्कूल के शिक्षक ने ये भी माना कि सभी सरकारी टीचर बच्चों की पढ़ाई को लेकर भी गंभीर नहीं है और न ही स्कूलों में नियमित रूप से निरीक्षण होता है, जिस वजह से स्कूलों की कार्यप्रणाली ढुलमुल रहती है। उन्होंने आठवीं कक्षा में बोर्ड परीक्षा होनी की भी मांग की।

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सीनियर डिप्टी मेयर बोले, सख्ती से सुधरेंगे स्कूल

सीनियर डिप्टी मेयर दुर्गा सिंह अत्री ने कहा कि जब तक सरकार स्कूलों की व्यवस्थाओं में गंभीरता और कार्यप्रणाली में सख्ती नहीं लाएगी, तब तक सरकारी स्कूलों के हालात सुधरने वाले नहीं है। टीचर समय पर स्कूल नहीं आते, समय से पहले ही फरलो कर चले जाते हैं, स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई पर न तो ज्यादा गंभीरता बरती जाती है और न ही खराब रिजल्ट आने वाले शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई होती है। सरकार तो सिर्फ शिक्षा बजट जारी कर देती है, उस बजट का इस्तेमाल सही ढंग से हो रहा है या नहीं, देखने वाला कोई नहीं होता। सरकार को शिक्षा प्रणाली में थोड़ी सख्ती करनी होगी, तभी सरकारी स्कूल प्राइवेट स्कूलों का मुकाबला कर सकेंगे।


सुरक्षित नहीं बेटियां, इसलिए नहीं पढ़ाते 

सुझाव सभा में सरकारी स्कूलों में पढने वाली लड़कियों की सुरक्षा का सवाल भी खड़ा हुआ। तो ये बात प्रमुखता से उठाई गई कि सरकारी स्कूलों में बेटियां सुरक्षित नहीं है। अभिभावकों का कहना था कि स्कूलों से छुट्टी के वक्त स्कूलों के बाहर ईव टीजिंग की घटनाएं होती है, बच्चियां घर आकर ये बताती है। इसलिए गांवों में तो बहुत से अभिभावक ऐसे हैं, जो इसी वजह से अपनी बेटियों की पढ़ाई छुड़वा देते हैं। इसलिए स्कूलों के बाहर शरारती तत्वों पर भी लगाम कसने की व्यवस्था होनी चाहिए।

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