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दो बसों की भिड़ंत में पांच की मौत, विधायक व उपायुक्त ने जाना हाल
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अंबाला में नेशनल हाइवे स्थित सुल्तानपुर के पास अल सुबह हुए सड़क हादसे के बाद क्षतिग्रस्त बस को क्
- फोटो : Ambala
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अंबाला सिटी। अगर बस सड़क पर खड़ी न होती तो शायद इस बस अड्डे पर पांच यात्रियों की जान ना जाती। दरअसल चंडीगढ़-अंबाला नेशनल हाईवे सुल्तानपुर स्थित एक दुकान पर चाय पीने के लिए टूरिस्ट बसों के चालक परिचालक चाय पीने के लिए रुकते हैं। यहीं पर सोमवार तड़के तीन बजे तीन बसों की भिड़ंत हुई। इस हादसे में पांच यात्रियों की जान चल गई करीब 12 यात्री जख्मी हो गए।
इस जगह पर शिमला, धर्मशाला, मनाली व अन्य दूर के क्षेत्रों से आने वाली टूरिस्ट बसों के चालक व परिचालक चाय पीने के लिए रुकते हैं। यहां पर एक सर्विस लेन भी बनाई गई है। मगर अधिकतर बस चालक रात को सर्विस लेन पर जाने के स्थान पर सड़क पर ही अपनी बस को लगा देते हैं। कई बार तो आधा दर्जन वॉल्वो बसें यहां पर खड़ी हो जाती हैं। वहीं पीछे से तेज रफ्तार में आ रही बसों को यह बसें दिखाई नहीं देती और हादसा होने का डर बना रहता है। मुख्य रूप से धुंध के दिनों में स्थिति और भी संवेदनशील हो जाती है।
इसके बाद भी पुलिस की ओर से यहां पर दुर्घटनाओं को रोकने की कोई व्यवस्था नहीं बनाई गई है। लोगों का कहना है कि अगर मुख्य मार्ग पर एक अन्य बस न खड़ी होतीं तो शायद यह हादसा होने से बच सकता था। इस हादसे में पांच लोगों की मौत हुई है। देर शाम तक भी पांचवें मृतक की पहचान नहीं हो सकी है। घटना में घायल हुए लोगों का अस्पताल में उपचार चल रहा है। इनमें से गाजियाबाद निवासी नवनीत निशांत व चंडीगढ़ निवासी खिरत को उपचार के लिए चंडीगढ़ रेफर किया गया है।
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घायलों का इलाज प्राथमिकता से करने निर्देश दिया
हादसे की सूचना मिलते ही विधायक असीम गोयल भी अस्पताल में मौके पर पहुंचे और सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्तियों व उनके परिजनों से बातचीत की। उन्होंने डॉक्टरों को उनका इलाज प्राथमिकता के आधार पर करने के निर्देश दिया। उन्होंने घायल व्यक्तियों व उनके परिजनों को जलपान व खाना भी उपलब्ध करवाया। इस दौरान उन्होंने घटना में लोगों की मृत्यु पर शोक व्यक्त किया और परिजनों को सांत्वना भी दी। मौके पर पहुंचे उपायुक्त विक्रम सिंह ने भी घायलों और अन्य का हाल-चाल जाना और हर संभव मदद करने का आश्वासन दिया। ट्रैफिक पुलिस के एएसआई श्रवण कुमार का कहना है कि रात के समय ट्रैफिक पुलिस नहीं होती। जो घटना हुई है,उसके बाद खोखे वाले को चेतावनी दी गई है कि वहां बसों को खड़ा नहीं होने दिया जाएगा।
राहुल को मिठाई बनाने का काम सिखाने जम्मू से लाया था सोनू
मृतक राहुल के भाई सोनू ने बताया कि कश्मीर में वह मिठाई बनाने का काम करते थे। वह पिछले काफी समय से काम कर रहा था, जहां उन्हें अच्छा वेतन मिल जाता था। इसी को देखते हुए वह अपने छोटे भाई राहुल को भी मिठाई का ही काम सिखाने के लिए कश्मीर ले आया था, अभी छह माह पहले ही वह दोनों लॉकडाउन के बाद कश्मीर काम करने के लिए गए थे। परिवार के कहने पर वह वापस बिहार अपने घर जा रहे थे। मगर अब यह हादसा हो गया।
बढ़ती सर्दी को देख वापस लौट रहे थे घर
मृतक प्रदीप के साथी अरविंद पटेल और रामरत्न ने बताया कि वह कश्मीर में शटरिंग का काम करते थे। वह चार साथी हैं अब आने वाले दिनों में भीषण सर्दी पड़ने वाली थी। इसीलिए वापस लौट रहे थे, क्योंकि इन दिनों में काम पूरी तरह से खत्म हो जाता था। उसके बाद फरवरी में वापस कश्मीर आने का सोच रखा था। वहीं परिवार भी पिछले काफी समय से राह देख रहा था। मगर यह हादसा हो गया और हमारे साथी प्रदीप की इसमें मौत हो गई। यह हादसा में हमें जिंदगी भर नहीं भूलेगा।
मजदूरी कर पाल रहे थे बच्चे, पति की मौत से सदमे में पत्नी लक्ष्मी
इस हादसे में रोहित की भी मौत हो गई। रोहित व उनकी पत्नी लक्ष्मी दोनों ही जम्मू में मजदूरी का काम करते हुए परिवार पाल रहे थे। जिनके पास एक चार साल की और एक साल की बेटी भी है। मगर पति की मौत की खबर सुनने के बाद लक्ष्मी सदमे में हैं। वहीं अब दोनों बेटियों की जिम्मेदारी भी सारी उन्हीं पर आ गई है।
शटरिंग के काम के लिए खंभों पर छत पर चढ़ते हैं, टांग टूटने से कामकाज के लिए हो जाएंगे लाचार
मनोज ने बताया कि इस हादसे ने उनकी टांग छीन ली है। वह शटरिंग का काम करते हैं और जम्मू कश्मीर में शटरिंग के लिए कभी खंभों तो कभी छत पर चढ़ना पड़ता है। मगर अब उनकी इस हादसे में टांग टूट गई है और अब हालात ऐसे नहीं लग रहे हैं कि वह भविष्य में यह काम कर भी पाएंगे कि नहीं उनकी रोजी रोटी का साधन तक खत्म हो गया है।
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इस जगह पर शिमला, धर्मशाला, मनाली व अन्य दूर के क्षेत्रों से आने वाली टूरिस्ट बसों के चालक व परिचालक चाय पीने के लिए रुकते हैं। यहां पर एक सर्विस लेन भी बनाई गई है। मगर अधिकतर बस चालक रात को सर्विस लेन पर जाने के स्थान पर सड़क पर ही अपनी बस को लगा देते हैं। कई बार तो आधा दर्जन वॉल्वो बसें यहां पर खड़ी हो जाती हैं। वहीं पीछे से तेज रफ्तार में आ रही बसों को यह बसें दिखाई नहीं देती और हादसा होने का डर बना रहता है। मुख्य रूप से धुंध के दिनों में स्थिति और भी संवेदनशील हो जाती है।
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इसके बाद भी पुलिस की ओर से यहां पर दुर्घटनाओं को रोकने की कोई व्यवस्था नहीं बनाई गई है। लोगों का कहना है कि अगर मुख्य मार्ग पर एक अन्य बस न खड़ी होतीं तो शायद यह हादसा होने से बच सकता था। इस हादसे में पांच लोगों की मौत हुई है। देर शाम तक भी पांचवें मृतक की पहचान नहीं हो सकी है। घटना में घायल हुए लोगों का अस्पताल में उपचार चल रहा है। इनमें से गाजियाबाद निवासी नवनीत निशांत व चंडीगढ़ निवासी खिरत को उपचार के लिए चंडीगढ़ रेफर किया गया है।
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घायलों का इलाज प्राथमिकता से करने निर्देश दिया
हादसे की सूचना मिलते ही विधायक असीम गोयल भी अस्पताल में मौके पर पहुंचे और सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्तियों व उनके परिजनों से बातचीत की। उन्होंने डॉक्टरों को उनका इलाज प्राथमिकता के आधार पर करने के निर्देश दिया। उन्होंने घायल व्यक्तियों व उनके परिजनों को जलपान व खाना भी उपलब्ध करवाया। इस दौरान उन्होंने घटना में लोगों की मृत्यु पर शोक व्यक्त किया और परिजनों को सांत्वना भी दी। मौके पर पहुंचे उपायुक्त विक्रम सिंह ने भी घायलों और अन्य का हाल-चाल जाना और हर संभव मदद करने का आश्वासन दिया। ट्रैफिक पुलिस के एएसआई श्रवण कुमार का कहना है कि रात के समय ट्रैफिक पुलिस नहीं होती। जो घटना हुई है,उसके बाद खोखे वाले को चेतावनी दी गई है कि वहां बसों को खड़ा नहीं होने दिया जाएगा।
राहुल को मिठाई बनाने का काम सिखाने जम्मू से लाया था सोनू
मृतक राहुल के भाई सोनू ने बताया कि कश्मीर में वह मिठाई बनाने का काम करते थे। वह पिछले काफी समय से काम कर रहा था, जहां उन्हें अच्छा वेतन मिल जाता था। इसी को देखते हुए वह अपने छोटे भाई राहुल को भी मिठाई का ही काम सिखाने के लिए कश्मीर ले आया था, अभी छह माह पहले ही वह दोनों लॉकडाउन के बाद कश्मीर काम करने के लिए गए थे। परिवार के कहने पर वह वापस बिहार अपने घर जा रहे थे। मगर अब यह हादसा हो गया।
बढ़ती सर्दी को देख वापस लौट रहे थे घर
मृतक प्रदीप के साथी अरविंद पटेल और रामरत्न ने बताया कि वह कश्मीर में शटरिंग का काम करते थे। वह चार साथी हैं अब आने वाले दिनों में भीषण सर्दी पड़ने वाली थी। इसीलिए वापस लौट रहे थे, क्योंकि इन दिनों में काम पूरी तरह से खत्म हो जाता था। उसके बाद फरवरी में वापस कश्मीर आने का सोच रखा था। वहीं परिवार भी पिछले काफी समय से राह देख रहा था। मगर यह हादसा हो गया और हमारे साथी प्रदीप की इसमें मौत हो गई। यह हादसा में हमें जिंदगी भर नहीं भूलेगा।
मजदूरी कर पाल रहे थे बच्चे, पति की मौत से सदमे में पत्नी लक्ष्मी
इस हादसे में रोहित की भी मौत हो गई। रोहित व उनकी पत्नी लक्ष्मी दोनों ही जम्मू में मजदूरी का काम करते हुए परिवार पाल रहे थे। जिनके पास एक चार साल की और एक साल की बेटी भी है। मगर पति की मौत की खबर सुनने के बाद लक्ष्मी सदमे में हैं। वहीं अब दोनों बेटियों की जिम्मेदारी भी सारी उन्हीं पर आ गई है।
शटरिंग के काम के लिए खंभों पर छत पर चढ़ते हैं, टांग टूटने से कामकाज के लिए हो जाएंगे लाचार
मनोज ने बताया कि इस हादसे ने उनकी टांग छीन ली है। वह शटरिंग का काम करते हैं और जम्मू कश्मीर में शटरिंग के लिए कभी खंभों तो कभी छत पर चढ़ना पड़ता है। मगर अब उनकी इस हादसे में टांग टूट गई है और अब हालात ऐसे नहीं लग रहे हैं कि वह भविष्य में यह काम कर भी पाएंगे कि नहीं उनकी रोजी रोटी का साधन तक खत्म हो गया है।