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Ambala News: 111 अस्वीकृत पैच में से 56 ही हुए पास
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अंबाला सिटी। नगर निगम के क्षेत्र में अस्वीकृत एरिया को लेकर निगम कार्य कर रहा है। इसको लेकर निगम ने सर्वे भी किया। निगम के सर्वे में कई ऐसी संपत्ति भी आई, जो निर्धारित मापदंड पूरे नहीं कर पाई। इस वजह से वह अस्वीकृत हो गई।
निगम कार्यालय में ऐसी कई शिकायत पहुंच रही हैं। साथ ही समाधान शिविर में भी ऐसी शिकायत आ रही हैं। शिकायतों को लेकर निगम ने सर्वे भी करवाया है। वहीं, कई ऐसी भी संपत्ति हैं, जो वह पहले रिहायशी थी लेकिन उनको बाद में निगम ने कॉमर्शियल बना दिया। इनमें से ऐसी कई संपत्ति को निगम ने अयोग्य कर दिया है, क्योंकि वह निर्धारित मापदंड पूरा नहीं कर पाई।
नगर निगम के सर्वे में 56 संपत्ति हुई पास
नगर निगम डीएमसी दीपक सूरा ने बताया कि शहर में अस्वीकृत एरिया के 111 पैच थे। इनमें से 56 पैच पास हो गए हैं। इसको लेकर सर्वे करवाया गया था। सर्वे में जो आपत्ति लगकर आई थे, उसको पूरा करवाया गया है। इसको लेकर कंपनी को पत्र भी लिखा गया था। कई ऐसी भी संपत्ति थी, जो पहले रिहायशी थी, लेकिन उनको कॉमर्शियल बना दिया गया। यह संपत्ति कॉमर्शियल स्वीकृत नहीं है।
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दरअसल, निगम में लोग शिकायत लेकर आते हैं कि उनका एरिया पहले स्वीकृत था लेकिन बाद में उसे निगम ने अस्वीकृत कर दिया। यह शिकायत अधिकारियों के पास पहुंच रही हैं। समाधान शिविर में भी ऐसी शिकायत आती हैं।
नगर निगम के मनोनीत पार्षद अधिवक्ता संदीप सचदेवा ने बताया कि लोग सरकार की नीतियों का फायदा नहीं उठाते। अगर किसी का पहले मकान था लेकिन बाद में उसने नीचे दुकान और ऊपर मकान बना लिया है तो इसके लिए सरकार ने पॉलिसी बनाई है। ऐसे में रिहायशी व कॉमर्शियल एरिया का अलग-अलग टैक्स लगता है। अगर कोई ऐसा करता है तो उनको रिवाइज नक्शा निगम में जमा करवाना चाहिए।
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निगम कार्यालय में ऐसी कई शिकायत पहुंच रही हैं। साथ ही समाधान शिविर में भी ऐसी शिकायत आ रही हैं। शिकायतों को लेकर निगम ने सर्वे भी करवाया है। वहीं, कई ऐसी भी संपत्ति हैं, जो वह पहले रिहायशी थी लेकिन उनको बाद में निगम ने कॉमर्शियल बना दिया। इनमें से ऐसी कई संपत्ति को निगम ने अयोग्य कर दिया है, क्योंकि वह निर्धारित मापदंड पूरा नहीं कर पाई।
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नगर निगम के सर्वे में 56 संपत्ति हुई पास
नगर निगम डीएमसी दीपक सूरा ने बताया कि शहर में अस्वीकृत एरिया के 111 पैच थे। इनमें से 56 पैच पास हो गए हैं। इसको लेकर सर्वे करवाया गया था। सर्वे में जो आपत्ति लगकर आई थे, उसको पूरा करवाया गया है। इसको लेकर कंपनी को पत्र भी लिखा गया था। कई ऐसी भी संपत्ति थी, जो पहले रिहायशी थी, लेकिन उनको कॉमर्शियल बना दिया गया। यह संपत्ति कॉमर्शियल स्वीकृत नहीं है।
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दरअसल, निगम में लोग शिकायत लेकर आते हैं कि उनका एरिया पहले स्वीकृत था लेकिन बाद में उसे निगम ने अस्वीकृत कर दिया। यह शिकायत अधिकारियों के पास पहुंच रही हैं। समाधान शिविर में भी ऐसी शिकायत आती हैं।
नगर निगम के मनोनीत पार्षद अधिवक्ता संदीप सचदेवा ने बताया कि लोग सरकार की नीतियों का फायदा नहीं उठाते। अगर किसी का पहले मकान था लेकिन बाद में उसने नीचे दुकान और ऊपर मकान बना लिया है तो इसके लिए सरकार ने पॉलिसी बनाई है। ऐसे में रिहायशी व कॉमर्शियल एरिया का अलग-अलग टैक्स लगता है। अगर कोई ऐसा करता है तो उनको रिवाइज नक्शा निगम में जमा करवाना चाहिए।