फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Ambala News ›   Nagar Panchayat elections - Elections will be challenging for the ruling party and the opposition

Ambala News: नप चुनाव - सत्ता और विपक्ष के लिए चुनौतीपूर्ण होंगे चुनाव

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 28 Dec 2024 01:32 AM IST
विज्ञापन
Nagar Panchayat elections - Elections will be challenging for the ruling party and the opposition
अंबाला। नगर परिषद के चुनावों के लिए बेशक अभी तारीख घोषित नहीं हुई है। लेकिन यह चुनाव सत्ता पक्ष सहित विपक्ष के लिए चुनौती पूर्ण होंगे। प्रत्येक पार्टी को इसके लिए पुरजोर प्रयास करना होगा। राजनैतिक पार्टियों के बहुमत का आजाद उम्मीदवार भी धूमिल करेंगे।
विज्ञापन

विधानसभा चुनावों में आजाद उम्मीदवार चित्रा सरवारा को मिले वोट से इसका आकलन किया जा सकता है। वहीं, राजनीति की समझ रखने वाले विशेषज्ञ भी इसके विश्लेषण में जुट गए हैं। जबकि चुनावों में अब महिलाओं को साधने में राजनैतिक पार्टियों के धुरंधर भी जुट गए हैं जो अंदरखाते महिला कार्यकर्ताओं से जानकारी जुटा रहे हैं।
विज्ञापन

2005 में हुए थे अंतिम चुनाव
नगर परिषद के पहले चुनावों में कांग्रेस पार्टी के हाथों में कमान रह चुकी है। नगर परिषद के अंतिम चुनाव पांच अप्रैल 2005 को हुए थे। इसका परिणाम 16 अप्रैल को आया था। इसमें किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं था। इन चुनावों में 13 कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी, छह बीजेपी के, छह विकास परिषद के और पांच संघर्ष वाहिनी से जुड़े प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

कांग्रेस समर्थित चेयरमैन
वर्ष 2005 के चुनावों में चेयरमैन का चयन वोटिंग से हुआ था। इसमें कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी नीलम शर्मा को चेयरमैन तो सुधीर जयसवाल को उप चेयरमैन बनाया गया था। यह कार्यवाही तत्कालीन कांग्रेस के विधायक देवेंद्र बंसल की निगरानी में हुई थी और इसमें तत्कालीन सांसद कुमारी सैलजा ने विशेष भूमिका निभाई थी।
2010 में बना नगर निगम
नगर परिषद सदर वर्ष 2010 में नगर निगम बन गया था। हालांकि इस दौरान पार्षदों का कार्यकाल दो महीने बचा हुआ था। लेकिन हुड्डा सरकार ने नप को भंग करके निगम बनाया। इसमें अंबाला कैंट, सिटी और नारायणगढ़ क्षेत्र को जोड़ा गया क्योंकि निगम बनाने के लिए तीन लाख की आबादी होना जरूरी है। इसमें 20 वार्ड निर्धारित किए गए। 2013 के चुनावों में भी कांग्रेस समर्थित रमेश मल को चेयरमैन के तौर पर चुना गया था।

बदलेंगे समीकरण
इस बार नगर परिषद के चुनावों कांटे की टक्कर होगी। कांग्रेस पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित चित्रा सरवारा का रुख बहुत कुछ तय करेगा। इससे कांग्रेस का वोट बंट जाएगा और इसका सता पक्ष को लाभ मिलेगा। अगर सभी इकट्ठे होकर लड़ेंगे तो कांग्रेस के साथ कांटे की टक्कर रहेगी। विधानसभा चुनावों में आजाद उम्मीदवार के तौर पर चित्रा सरवारा को 52 हजार वोट मिले थे। वहीं कांग्रेस को 14 हजार, जबकि सत्तापक्ष के विधायक को 60 के करीब वोट मिले थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed