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संतान की लंबी आयु के लिए आज व्रत रखेंगी माताएं
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हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक वर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अहोई अष्टमी का व्रत किया जाता है। अहोई अष्टमी का व्रत करवा चौथ के चार दिन बाद आता है। इस बार अहोई अष्टमी का व्रत वीरवार यानी आज है। यह व्रत माताएं संतान प्राप्ति, संतान की लंबी आयु और उत्तम स्वास्थ्य की कामना के लिए करती हैं। इस व्रत को करने से संतान को लंबी आयु मिलती है। उसे जीवन में यश, कीर्ति, सौभाग्य और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। कई महिलाएं अपने बीमार बच्चों की निरोगी काया के लिए भी यह व्रत करती हैं। अहोई अष्टमी के व्रत का पारण तारों की छांव में अर्घ्य देकर किया जाता है।
ज्योतिषी गिरीश आहूजा ने बताया कि अहोई अष्टमी दोपहर 12.51 बजे से शुरू होकर कल 29 अक्टूबर रात 2.10 बजे तक रहेगी। शास्त्रों के अनुसार अहोई अष्टमी व्रत प्रदोष व्यापिनी अष्टमी को करने का विधान है। पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5.55 बजे से 7.08 बजे तक होगा। इस दिन गुरु पुष्य, अमृत और सर्वार्थ सिद्धि योग का अद्भुत संयोग होगा। गुरु पुष्य एवं अमृत योग सुबह 9.41 बजे से 29 अक्टूबर सुबह 6.24 बजे तक रहेगा। गुरुवार और पुष्य नक्षत्र से बनने वाला यह संयोग कई शुभ फलदायक होगा। सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 6.24 बजे से दूसरे दिन सुबह 6.24 तक रहेगा। रवि योग सुबह 6.24 बजे से 9.41 बजे तक रहेगा।
माता पार्वती का स्वरूप
अहोई अष्टमी पर्व और व्रत का संबंध महादेवी-पार्वती के अहोई स्वरूप से है। अहोई अष्टमी के उपवास को करने वाली माताएं इस दिन प्रात:काल में उठकर, एक करवे अर्थात मिट्टी के बर्तन में पानी भरकर माता अहोई का पूजन करती हैं। इस दिन महिलाएं बिना अन्न-जल ग्रहण किए निर्जल व्रत रखती हैं। सूर्यास्त के बाद संध्या के समय तारों को अर्घ्य देकर व्रत पूर्ण करती हैं। यह व्रत संतानहीन युगल के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
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आज है पुष्य नक्षत्र, खरीददारी सहित धार्मिक अनुष्ठान करना होगा फलदायी
ज्योतिष शास्त्र में नक्षत्रों का विशेष महत्व है। सभी 27 नक्षत्र किसी न किसी रूप में सभी के जीवन पर असर डालते हैं। इनमें पुष्य नक्षत्र का विशेष स्थान है। इसे नक्षत्रों का राजा भी कहा जाता है। दीपावली से पहले आने वाला पुष्य नक्षत्र बहुत ही शुभ फलदायक माना जाता है। इस बार 28 अक्टूबर को पूरा दिन और रात पुष्य नक्षत्र रहेगा। इस बार गुरु और शनि, शनि के स्वामित्व वाली मकर राशि में एक साथ स्थित हैं। दोनों ग्रह मार्गी रहेंगे और इन ग्रहों पर चंद्र की दृष्टि भी होगी। इससे गजकेसरी योग भी बनेगा। यह योग सभी प्रकार से मंगलकारी होगा। साथ ही इस दिन अमृत सिद्धि योग व सर्वार्थ सिद्धि योग भी रहेगा। इस दिन खरीदी गई वस्तुएं कई गुना शुभ फल देने वाली होती हैं। पुष्य नक्षत्र धर्म, कर्म, मंत्र जाप, अनुष्ठान, मंत्र दीक्षा अनुबंध, व्यापार आदि आरंभ करने के लिए अतिशुभ माना गया है। विवाह को छोड़कर अन्य कोई भी कार्य आरंभ करना हो तो पुष्य नक्षत्र श्रेष्ठ माना गया है।
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ज्योतिषी गिरीश आहूजा ने बताया कि अहोई अष्टमी दोपहर 12.51 बजे से शुरू होकर कल 29 अक्टूबर रात 2.10 बजे तक रहेगी। शास्त्रों के अनुसार अहोई अष्टमी व्रत प्रदोष व्यापिनी अष्टमी को करने का विधान है। पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5.55 बजे से 7.08 बजे तक होगा। इस दिन गुरु पुष्य, अमृत और सर्वार्थ सिद्धि योग का अद्भुत संयोग होगा। गुरु पुष्य एवं अमृत योग सुबह 9.41 बजे से 29 अक्टूबर सुबह 6.24 बजे तक रहेगा। गुरुवार और पुष्य नक्षत्र से बनने वाला यह संयोग कई शुभ फलदायक होगा। सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 6.24 बजे से दूसरे दिन सुबह 6.24 तक रहेगा। रवि योग सुबह 6.24 बजे से 9.41 बजे तक रहेगा।
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माता पार्वती का स्वरूप
अहोई अष्टमी पर्व और व्रत का संबंध महादेवी-पार्वती के अहोई स्वरूप से है। अहोई अष्टमी के उपवास को करने वाली माताएं इस दिन प्रात:काल में उठकर, एक करवे अर्थात मिट्टी के बर्तन में पानी भरकर माता अहोई का पूजन करती हैं। इस दिन महिलाएं बिना अन्न-जल ग्रहण किए निर्जल व्रत रखती हैं। सूर्यास्त के बाद संध्या के समय तारों को अर्घ्य देकर व्रत पूर्ण करती हैं। यह व्रत संतानहीन युगल के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
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आज है पुष्य नक्षत्र, खरीददारी सहित धार्मिक अनुष्ठान करना होगा फलदायी
ज्योतिष शास्त्र में नक्षत्रों का विशेष महत्व है। सभी 27 नक्षत्र किसी न किसी रूप में सभी के जीवन पर असर डालते हैं। इनमें पुष्य नक्षत्र का विशेष स्थान है। इसे नक्षत्रों का राजा भी कहा जाता है। दीपावली से पहले आने वाला पुष्य नक्षत्र बहुत ही शुभ फलदायक माना जाता है। इस बार 28 अक्टूबर को पूरा दिन और रात पुष्य नक्षत्र रहेगा। इस बार गुरु और शनि, शनि के स्वामित्व वाली मकर राशि में एक साथ स्थित हैं। दोनों ग्रह मार्गी रहेंगे और इन ग्रहों पर चंद्र की दृष्टि भी होगी। इससे गजकेसरी योग भी बनेगा। यह योग सभी प्रकार से मंगलकारी होगा। साथ ही इस दिन अमृत सिद्धि योग व सर्वार्थ सिद्धि योग भी रहेगा। इस दिन खरीदी गई वस्तुएं कई गुना शुभ फल देने वाली होती हैं। पुष्य नक्षत्र धर्म, कर्म, मंत्र जाप, अनुष्ठान, मंत्र दीक्षा अनुबंध, व्यापार आदि आरंभ करने के लिए अतिशुभ माना गया है। विवाह को छोड़कर अन्य कोई भी कार्य आरंभ करना हो तो पुष्य नक्षत्र श्रेष्ठ माना गया है।