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दत्तात्रेय के स्मरण मात्र से ज्ञान वैराग्य भक्ति की भावना की होती है प्राप्ती - गीता देवी महाराज
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अंबाला सिटी। नदी मोहल्ला स्थित श्री अनंत प्रेममंदिर में भागवत पुराण की परायण पाठ की कथा में वीरवार को मंदिर की परमाध्यक्ष गीता देवी महाराज ने कहा कि भगवान के कई अवतार हुए हैं। श्रीमद्भागवत पुराण में 24 अवतारों की कथा है। उन्हीं में एक त्रिदेव के स्वरूप भगवान दत्तात्रेय का अवतार है। दत्तात्रेय के स्मरण मात्र से हमारे अंदर ज्ञान, वैराग्य और भक्ति की भावना उत्पन्न होने लगती है।
महाराज ने कहा कि अत्री ऋषि व माता अनुसुइया के यहां भगवान दत्तात्रेय का अवतारण होता है। देवियों में एक बड़ी कमी यह होती है कि वे किसी अन्य देवी की प्रशंसा सुनना ज्यादा पसंद नहीं करती। इसी बात को लेकर उनमें ईर्ष्या होने लगती है। माता पार्वती, लक्ष्मी देवी व ब्रह्माणी भी नारद के मुंह से सति अनुसुइया की प्रशंसा सुन नहीं पाई। उनमें अनुसुइया के प्रति ईर्ष्या होने लगी। वह तीनों अपने-अपने पतियों से सति अनुसुइया की परीक्षा लेने के लिए भेजती हैं। अनुसुइया अपने पति को स्मरण कर अपनी तप से जल हथेली में लेकर अभिमंत्रित कर जल तीनों के ऊपर छिड़क देती हैं। वह तीनों देव बालक बन जाते हैं और अनुसुइया उन्हें दूध पिलाकर पालने में सुला देती है।
उसके बाद तीनों देवियां अपने-अपने पति की खोज में अत्री के आश्रम पहुंचकर अनुसुइया से क्षमा याचना कर अपने-अपने पति को प्राप्त करती हैं। इसके बाद तीनों देवों ने सति अनुसुइया को वरदान दिया कि वह तीनों उनके यहां जन्म लेंगे। इसके बाद वह जन्म लेते हैं और दत्तात्रेय में भगवान विष्णु, शंकर व ब्रह्मा की शक्ति विद्यमान है। तीनों देवों का समूचा रूप भगवान दत्तात्रेय है। इसी प्रकार परमाध्यक्ष गीता देवी महाराज ने 24 अवतारों का विस्तारपूर्वक व्याख्यान किया।
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महाराज ने कहा कि अत्री ऋषि व माता अनुसुइया के यहां भगवान दत्तात्रेय का अवतारण होता है। देवियों में एक बड़ी कमी यह होती है कि वे किसी अन्य देवी की प्रशंसा सुनना ज्यादा पसंद नहीं करती। इसी बात को लेकर उनमें ईर्ष्या होने लगती है। माता पार्वती, लक्ष्मी देवी व ब्रह्माणी भी नारद के मुंह से सति अनुसुइया की प्रशंसा सुन नहीं पाई। उनमें अनुसुइया के प्रति ईर्ष्या होने लगी। वह तीनों अपने-अपने पतियों से सति अनुसुइया की परीक्षा लेने के लिए भेजती हैं। अनुसुइया अपने पति को स्मरण कर अपनी तप से जल हथेली में लेकर अभिमंत्रित कर जल तीनों के ऊपर छिड़क देती हैं। वह तीनों देव बालक बन जाते हैं और अनुसुइया उन्हें दूध पिलाकर पालने में सुला देती है।
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उसके बाद तीनों देवियां अपने-अपने पति की खोज में अत्री के आश्रम पहुंचकर अनुसुइया से क्षमा याचना कर अपने-अपने पति को प्राप्त करती हैं। इसके बाद तीनों देवों ने सति अनुसुइया को वरदान दिया कि वह तीनों उनके यहां जन्म लेंगे। इसके बाद वह जन्म लेते हैं और दत्तात्रेय में भगवान विष्णु, शंकर व ब्रह्मा की शक्ति विद्यमान है। तीनों देवों का समूचा रूप भगवान दत्तात्रेय है। इसी प्रकार परमाध्यक्ष गीता देवी महाराज ने 24 अवतारों का विस्तारपूर्वक व्याख्यान किया।
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