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Ambala News: दोपहर में बस न मिलने से पैदल सफर करने को मजबूर विद्यार्थी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 11 Sep 2026 01:09 AM IST
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Students forced to travel on foot due to the unavailability of buses in the afternoon.
स्कूल से छुट्टी के बाद पैदल घर जाती छात्राएं। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
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अंबाला। घसीटपुर मार्ग पर रोडवेज बस का परिचालन नहीं होने से सेक्टर-34 और घसीटपुर के ग्रामीण, दैनिक यात्री और स्कूली विद्यार्थी परेशान हैं। पिछले करीब एक महीने से दोपहर के समय बस का संचालन न होने के कारण नन्हेड़ा स्थित स्कूलों में पढ़ने वाले लगभग 70 विद्यार्थियाें को रोजाना पैदल सफर तय करके घर लौटना पड़ रहा है।
इससे पहले यहां रोडवेज बस सुबह 7:45 बजे घसीटपुर और सेक्टर-34 के बस स्टॉप पर रुकती है। इसके बाद बस सभी यात्रियों व विद्यार्थियों को नन्हेड़ा स्टॉपेज तक पहुंचाती है। नन्हेड़ा से बच्चे रंगिया मंडी स्थित सीनियर सेकेंडरी, माध्यमिक और प्राथमिक पाठशाला में पढ़ाई के लिए जाते हैं। इसके बाद दोपहर में भी बस चलती थी लेकिन करीब एक माह से बस का संचालन नहीं हो रहा है। इससे स्कूल के बच्चाें को पैदल ही घर जाना पड़ रहा है।
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आधा किमी का सफर तय कर रहे बच्चे
ग्रामीण रमेश ने बताया कि दोपहर में जब स्कूल की छुट्टी होती है, तो धूप में छोटे-छोटे बच्चों को करीब आधा किमी पैदल चलना पड़ता है। प्राथमिक पाठशाला में पढ़ने वाले नन्हें बच्चे घर पहुंचते-पहुंचते निढाल हो जाते हैं। रोडवेज प्रशासन को बच्चों के लिए दोपहर वाली बस तुरंत शुरू करनी चाहिए।
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बस के नहीं आने से बढ़ी बच्चों की चिंता

रेखा रानी ने बताया कि पहले जब 2:30 बजे बस नन्हेड़ा आती थी, तो हमें बच्चों की कोई चिंता नहीं होती थी। अब एक महीने से बस बंद है, जिसकी वजह से बच्चियां पैदल ही घर लौट रही हैं। मुख्य मार्ग पर वाहनों की रफ्तार तेज होती है, जिससे हर पल किसी अनहोनी का डर लगा रहता है।
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स्कूल से पैदल आते हुए थक जाते हैं बच्चे
जय सिंह ने बताया कि दोपहर के समय कोई भी बस न मिलने से पूरी व्यवस्था बिगड़ गई है। उनके बच्चे रंगिया मंडी स्थित सीनियर सेकेंडरी और माध्यमिक स्कूल में पढ़ते हैं। स्कूल से लौटने के बाद वे इतने थक जाते हैं कि वे आगे ट्यूशन या खुद पढ़ाई भी नहीं कर पाते।


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मजदूरी के कारण नहीं जा सकती बच्चों को लेने

किरणवती ने बताया कि वह मजदूरी करती हैं और दोपहर में बच्चों को लेने स्कूल नहीं पहुंच सकते। रोडवेज की सुविधा ही हमारे लिए एकमात्र सहारा थी। एक तरफ सरकार सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने और शिक्षा का स्तर सुधारने के दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ बच्चों की सुध लेने वाला कोई नहीं है।
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वर्जन....

इसके बारे में पता किया जाएगा और अगर बस दोपहर के समय बंद है तो उसे दोबारा चालू करवाया जाएगा।
- संजीव बराड़, कार्यशाला इंचार्ज, रोडवेज वर्कशाप, अंबाला।
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