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Ambala News: रामबाग गोशाला में दो गायों के सैंपल जांच के लिए भेजे लुवास
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गाय में लंपी स्किन डिजीज को रोकने के लिए वैक्सीन लगाते पशुपालन विभाग के कर्मचारी। विभाग
माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला। लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी) की संभावना को देखते हुए अंबाला कैंट की रामबाग गोशाला से दाे गायों के सैंपल जांच के लिए हिसार स्थित लैब में भेजे गए हैं। इन सैंपलों की जांच लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय की लैब में जांचा जायगा। अभी पशुपालन विभाग सैंपलों की रिपाेर्ट आने का इंतजार कर रहा है। वहीं गोशाला में एहतियातन तौर पर बीमार गायों को अलग-थलग कर दिया गया है, ताकि बीमारी हो तो अन्य पशुओं में संक्रमण न फैल सके।
91 प्रतिशत गायों को लगाई गोट पॉक्स की वैक्सीन एलएसडी वायरस से गायों को बचाने के लिए पशुपालन विभाग गोट पॉक्स की वैक्सीन का प्रयोग कर रहा है। अंबाला में इस साल 25 जुलाई से गायाें को यह वैक्सीन देने का काम शुरू किया गया था। पशुपालन विभाग का दावा है कि जिला के 91 प्रतिशत गायों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है। वैक्सीन लगाने की प्रक्रिया लगातार जारी है।
क्या होती है लंपी स्किन डिजीज
लंपी स्किन डिजीज मुख्य रूप से गाय और भैंस में होने वाली एक संक्रामक वायरल बीमारी है। यह बीमारी कैप्रिपॉक्स वायरस से फैलती है, जो गोटपॉक्स और शीपपॉक्स वायरस के परिवार का ही एक हिस्सा है। यह बीमारी जानवरों से इंसानों में नहीं फैलती है, इसलिए यह गैर-जूनोटिक है। इस बीमारी के मच्छर, मक्खियाें, जूं और टिक जैसे खून चूसने वाले कीट मुख्य वाहक हैं। इसमें पशु के पूरे शरीर विशेषकर गर्दन, सिर, थन और पैरों पर 2 से 5 सेमी व्यास की कठोर गांठें बन जाती हैं। पशु को तेज बुखार आता है और वह सुस्त हो जाता है। आंखों और नाक से पानी/तरल बहना तथा मुंह से अत्यधिक लार टपकना शुरू हो जाता है। अंत में पशु की मृत्यु भी हो सकती है।
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अंबाला। लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी) की संभावना को देखते हुए अंबाला कैंट की रामबाग गोशाला से दाे गायों के सैंपल जांच के लिए हिसार स्थित लैब में भेजे गए हैं। इन सैंपलों की जांच लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय की लैब में जांचा जायगा। अभी पशुपालन विभाग सैंपलों की रिपाेर्ट आने का इंतजार कर रहा है। वहीं गोशाला में एहतियातन तौर पर बीमार गायों को अलग-थलग कर दिया गया है, ताकि बीमारी हो तो अन्य पशुओं में संक्रमण न फैल सके।
91 प्रतिशत गायों को लगाई गोट पॉक्स की वैक्सीन एलएसडी वायरस से गायों को बचाने के लिए पशुपालन विभाग गोट पॉक्स की वैक्सीन का प्रयोग कर रहा है। अंबाला में इस साल 25 जुलाई से गायाें को यह वैक्सीन देने का काम शुरू किया गया था। पशुपालन विभाग का दावा है कि जिला के 91 प्रतिशत गायों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है। वैक्सीन लगाने की प्रक्रिया लगातार जारी है।
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क्या होती है लंपी स्किन डिजीज
लंपी स्किन डिजीज मुख्य रूप से गाय और भैंस में होने वाली एक संक्रामक वायरल बीमारी है। यह बीमारी कैप्रिपॉक्स वायरस से फैलती है, जो गोटपॉक्स और शीपपॉक्स वायरस के परिवार का ही एक हिस्सा है। यह बीमारी जानवरों से इंसानों में नहीं फैलती है, इसलिए यह गैर-जूनोटिक है। इस बीमारी के मच्छर, मक्खियाें, जूं और टिक जैसे खून चूसने वाले कीट मुख्य वाहक हैं। इसमें पशु के पूरे शरीर विशेषकर गर्दन, सिर, थन और पैरों पर 2 से 5 सेमी व्यास की कठोर गांठें बन जाती हैं। पशु को तेज बुखार आता है और वह सुस्त हो जाता है। आंखों और नाक से पानी/तरल बहना तथा मुंह से अत्यधिक लार टपकना शुरू हो जाता है। अंत में पशु की मृत्यु भी हो सकती है।
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