{"_id":"5862b85a4f1c1b8940eecc63","slug":"mca-ambala-municipal-corporation-councilor-meeting-ambala","type":"story","status":"publish","title_hn":"पांच घोटालों पर पार्षदों के हंगामे से गरमाया सदन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पांच घोटालों पर पार्षदों के हंगामे से गरमाया सदन
ब्यूरो/अंबाला/अमर उजाला
Updated Wed, 28 Dec 2016 12:22 AM IST
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mca meeting
- फोटो : अमर उजाला
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म्यूनिसिपल कारपोरेशन अंबाला (एमसीए) में घटित हुए पांच घोटालों को लेकर मंगलवार को सदन की बैठक में जमकर हंगामा हुआ। पार्षदों ने साफ कहा कि इन घोटालों को उठाते हुए उन्हें महीनों गुजर चुके हैं, आखिर क्या वजह है कि एमसीए अफसर इन घोटालों की जांच करवाने से कतरा रहे हैं?
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पार्षदों ने अफसरों पर आरोप जड़ते हुए कहा कि प्रतीत होता है कि इन घोटालों में एमसीए के निचले कर्मचारियों और अफसरों के साथ-साथ आला अफसरों की भी मिलीभगत है, शायद इसलिए आला अफसर इन घोटालों की जांच करवाने की लगातार उठाई जा रही पार्षदों की मांग को टाल रहे हैं। पार्षदों के आरोपों की धार जब तीखी होती गई तो अंतत: एमसीए कमिश्नर सत्येंद्र दूहन को मोर्चा संभालना पड़ा और उन्होंने सभी पार्षदों के समक्ष दो ऑफर रखे।
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एमसीए कमिश्नर ने कहा कि पहला ऑफर यह है कि वे इन घोटालों की जांच विजिलेंस से करवा लें और दूसरा ऑफर यह है कि ये सदन खुद एक जांच कमेटी गठित कर विद टाइम बाउंड इन घोटालों की जांच करवा सकता है। एमसीए ने पार्षदों को समझाया कि विजिलेंस जांच में लंबा वक्त लग सकता है, लेकिन जांच कमेटी को हम टाइम बाउंड कर सकते हैं।
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पार्षदों ने एमसीए कमिश्नर की बात को समझा और यह तय हुआ कि एमसीए में घटित हुए पांच घोटालों की टीम पांच पार्षदों की टीम करेगी। इन पार्षदों में सोनिया रानी, रूपम गुगलानी, दलजीत सिंह भाटिया, डिप्टी मेयर सुधीर जयसवाल और सुरेंद्र बिंद्रा डब्बू को शामिल किया गया। इस जांच कमेटी के चेयरमैन मेयर रमेश लाल मल होंगे, जबकि दो सरकारी अफसर ज्वाइंट कमिश्नर और एसई भी इस कमेटी में सहयोग देंगे।
ये है एमसीए में घटित पांच घोटाले
-डस्टबीन घोटाला- पार्षद सोनिया रानी ने आरोप लगाया कि एमसीए ने 140 डस्टबिन खरीदे, एक डस्टबिन की कीमत 21 हजार के करीब है। लेकिन उन्होंने उसी जगह से किसी और रूप में जब डस्टबिन की कूटेशन मांगी, तो उन्हें अच्छी गेज की चादर और विद व्हील डस्टबिन साढ़े पंद्रह हजार रुपये में मिल रहे हैं। सोनिया ने सवाल खड़ा कि आखिरकार एमसीए ने फिर महंगे डस्टबिन क्यों खरीदे?
- स्टेशनरी घोटाला- मेयर समेत अन्य पार्षदों ने आरोप लगाया है कि पिछले तीन साल के कार्यकाल में एमसीए ने 70 लाख रुपये की स्टेशनरी खरीदी। लेकिन जब इसका हिसाब किताब मांगा गया तो आज तक ये नहीं मालूम बताया गया कि कितनी स्टेशनरी खरीदी, कहां से खरीदी और क्या खरीदा?
- स्क्रैप घोटाला- एमसीए में पड़ा स्क्रैप ही भारी मात्रा में पड़े-पड़े चोरी हो गया। पार्षद पुष्पिंद्र हरीश ने एक ट्रक स्क्रैप तो खुद पकड़वाया। कैंट में पड़ा स्क्रैप भी गायब है। पार्षदों ने आरोप लगाया कि सारा स्क्रैप मिलीभगत से गायब हुआ है।
- डोर-टू-डोर कांट्रेक्ट घोटाला- पार्षदों ने आरोप लगाया कि डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन करने में भी चहेते ठेकेदार पर अफसर मेहरबानी बरत रहे हैं। ठेकेदार पर आरोप लगाते हुए पार्षद सोनिया रानी ने कहा कि ठेकेदार लगातार कांट्रेक्ट की शर्तों की उल्लंघना कर रहा है। कई तरह की अनियमितता आ रही है, उसके बाद उसका ठेका रद होने के बाद अफसरों ने उसका ठेका एक्सटेंड कर दिया और उसे पेमेंट भी कर दी। इसमें भारी आर्थिक अनियमितता है और इससे एमसीए को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।
- स्ट्रीट लाइट घोटाला - आईएचएसडीपी के तहत वर्ष 2013 में एमसीए के पास दलित बस्तियों में लगाने के लिए सोडियम स्ट्रीट लाइट के सैट विद पोल आए थे। लेकिन एमसीए ने सोडियम स्ट्रीट लाइट की बजाए वहां साधारण सस्ती स्ट्रीट लाइटें लगवाकर खानापूर्ति कर ली। सोडियम सेट क्यों नहीं लगाए गए? सस्ती स्ट्रीट लाइट क्यों लगाई गई? और बिजली के खंभे कहां है और संबंधित एरिया में सभी जगह स्ट्रीट लाइटें लगी या नहीं?
साठ दिन में कमेटी पूरी करेगी जांच
एमसीए कमिश्नर सत्येंद्र दूहन ने कहा कि इस जांच को कम से कम 90 दिनों का समय देना चाहिए, क्योंकि जांच कमेटी को पांच घोटालों की जांच करनी है। लेकिन पार्षद इस जिद पर अड़ गए कि पहले ही जांच की मांग को महीनों गुजर चुके हैं, इसलिए इस जांच को 30 दिन में पूरा किया जाए, लेकिन बाद में एमसीए कमिश्नर के आग्रह पर इस जांच को पूरा करने का समय 60 दिन रखा गया है। यानी 28 फरवरी 2017 को इन घोटालों की जांच को पूरा करना होगा।
स्ट्रीट लाइट खरीद घोटाले की जांच विजिलेंस को
जनवरी 2014 में हुए एक घोटाले की जांच को एमसीए सदन की अनुमति से विजिलेंस को भेज दिया गया है। पार्षद दलजीत सिंह भाटिया ने आरोप लगाया था कि एमसीए सदन ने लाखों रुपये में स्ट्रीट लाइटें खरीदी है, ये स्ट्रीट लाइटें प्रशासन के अधिकृत सुपर बाजार से खरीदी गई थी। लेकिन पार्षद ने अन्य जगहों से ली कुटेशन पेश करते हुए आरोप लगाया कि जो लाइटें सुपर बाजार ने खरीदी है, वही ब्राडिंड स्ट्रीट लाइटें अपेक्षाकृत सस्ती बाजार में उपलब्ध है तो सुपर बाजार ने महंगी स्ट्रीट लाइटें खरीदकर एमसीए का राजस्व नुकसान क्यों किया? इस घोटाले की जांच अब विजिलेंस को सौंप दी गई है। पार्षद दलजीत सिंह भाटिया के अनुसार अभी तक विजिलेंस ने उनके बयान दर्ज नहीं किए हैं।
एनओसी घोटाले में पूर्व सचिव फंसे
कुछ समय पूर्व निगम में शामिल हुए नई कॉलोनियों को एनओसी जारी करने में बरती गई अनियमितताओं में फंसे एमसीए के ही पूर्व सचिव केके यादव पर गाज गिर सकती है। उन पर पार्षदों ने ही एनओसी जारी करने में भारी गोलमाल करने का आरोप लगाया था। अब एमसीए कमिश्नर सत्येंद्र दूहन ने सदन में इसी मसले पर जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करते हुए पार्षदों को बताया कि पूर्व में सचिव रह चुके केके यादव के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए एमसीए ने सरकार को लिख दिया है और इस बारे में पत्र भी सरकार को भेजा जा चुका है। अब सचिव केके यादव के खिलाफ इस मसले पर सरकार ने क्या कार्रवाई करनी है? वो सरकार देखेगी? लेकिन इसी मसले पर केके यादव पहले अपने ऊपर लगाए गए तमाम आरोपों को सिरे से खारिज कर चुके हैं, उनका कहना था कि उन पर लगे आरोप गलत है।
कमिश्नर चाहते हैं ट्रांसफर! भिड़ गए पार्षद
बात चल रही थी घोटालों की जांच की। पार्षद सोनिया ने एमसीए कमिश्नर सत्येंद्र दूहन से कहा कि सर, आप 60 दिन में जांच पूरी करने की बात कर रहे हैं, इसकी क्या गारंटी है कि आप यहां 60 दिन तक रहोगे? पहले भी कई कमिश्नर थोड़े-थोड़े समय के लिए आ चुके हैं और तबादला करवाकर यहां से जा चुके हैं। पार्षद का इतना कहना था कि एमसीए कमिश्नर भी मजाक के मूड में कह बैठे कि पार्षद महोदया आपके मुंह में घी शक्कर, आप मेरा यहां से तबादला करवा दें, मिठाई मैं आपको खिला दूंगा...। एक मजाक की बात का जवाब मजाक में आ गया...बात खत्म। लेकिन इस बात को लेकर दूसरे पार्षद आपस में भिड़ गए।
भाजपा पार्षदों सुरेंद्र बिंद्रा, सतपाल ढल, जसबीर सिंह जस्सी ने एमसीए कमिश्नर से सवाल किया कि आप अभी तो यहां आए हैं और अभी यहां से तबादला क्यों चाहते हैं? उन्होंने कहा कि आपको सदन को बताना पड़ेगा कि आप ऐसा क्यों चाहते हैं? इसी बात पर कांग्रेसी डिप्टी मेयर सुधीर जयसवाल, ललिता प्रसाद और हिम्मत सिंह उठ खड़े हुए और भाजपा पार्षदों से बहस करते हुए बोले, क्या आप सदन में सुन सकेंगे कि आखिरकार अंबाला से पार्षद अपना तबादला क्यों चाहते हैं?
भाजपा पार्षदों ने जब कांग्रेसी पार्षदों से वजह बताने को कहा तो कांग्रेसियों ने साफ आरोप लगाया कि भाजपा के आला नेता अफसरों पर अनावश्यक दबाव बनाते हैं, इसलिए अफसर अंबाला में टिकना ही नहीं चाहते। बस, इतनी बात करते हुए भाजपा और कांग्रेसी पार्षदों में तीखी बहस छिड़ गई। जमकर तू-तू, मैं-मैं हुई, अंतत: कमिश्नर ने पार्षदों को शांत करवाया।
भड़के डिप्टी मेयर, अफसरों और पार्षदों से उलझे
डिप्टी मेयर सुधीर जायसवाल ने एमसीए कमिश्नर से कहा कि आपके निचले अफसर और कर्मचारी हमारी नहीं सुनते तो जनता की क्या सुनेंगे। डिप्टी मेयर ने कहा कि उन्होंने नाली का गंद उठाने को सात दिन पहले सेनेटरी इंस्पेक्टर को शिकायत दी थी, आज तक नहीं उठा। इस पर एमसीए कमिश्नर ने सेनेटरी इंस्पेक्टर की खिंचाई की। उसके बाद डिप्टी मेयर ने कहा कि पार्षद तो वार्डों में एलईडी लाइटें मांग रहे हैं, लेकिन अफसर कहते हैं कि इन लाइटों के लिए बजट नहीं है, लेकिन उसके बावजूद कमिश्नर सदन को ये बता दें कि कैंट के सौदागर बाजार में छह एलईडी किस बजट से और किसके कहने पर लगी है? इतनी बात कहनी थी कि सभी भाजपा पार्षद डिप्टी मेयर पर बरस पड़े। खूब हंगामा हुआ, डिप्टी मेयर ने कहा कि अफसर नेताओं के दबाव में अन्य पार्षदों से दोहरी पॉलिसी न अपनाएं। सीनियर डिप्टी मेयर दुर्गा सिंह अत्रेय और मेयर रमेश लाल मल ने हस्तक्षेप कर मामला शांत करवाया।
मिड्डा साहब देखकर नहीं, काम के बाद रिपोर्ट चाहिए
पार्षदों ने हिंदू हाल सिटी के पास सड़क पर बने बहुत बड़े गड्ढे की शिकायत जब एमसीए कमिश्नर को दी तो कमिश्नर ने तुरंत एमई मिड्डा को इस मामले के समाधान को कहा। इस पर एमई कमिश्नर से बोले, सर मैं मौका देखकर आपको रिपोर्ट कर दूंगा। इस पर कमिश्नर ने साफ कहा कि मिड्डा साहब देखकर नहीं, काम निपटाकर रिपोर्ट करना। कमिश्नर ने कहा कि हाउस के पार्षद यदि कोई जनहित में शिकायत करता है और वो काम लटक जाए तो ये बहुत शर्म की बात है। उन्होंने कहा कि सभी पार्षदों की शिकायत को गंभीरता से लिया जाए।
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सदन में पार्षदों ने जनहित के मुद्दे उठाए, सभी मसलों पर गंभीरता से विचार किया गया है। कुछ अनियमितताओं और घोटालों की शिकायतें पेडिंग थी, उनकी जांच के लिए विशेष कमेटी बैठा दी है, एक जांच विजिलेंस को सौंप दी है। निचले अफसरों और कर्मचारियों को भी निर्देश दिए हैं कि पार्षदों के वार्डों में लोगों की समस्याओं पर गंभीरता बरती जाए।
-सत्येंद्र दूहन, कमिश्नर, एमसीए
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बड़े शर्म की बात है कि पार्षदों की जनहित में शिकायत भी रजिस्टरों में ही दर्ज रह जाती है। निचले अफसर साफ टालमटौल रवैया अपनाते हैं। एमसीए के आला अफसरों को इस माहौल में सुधार लाना होगा। क्योंकि एक-एक पार्षद हजारों लोगों का प्रतिनिधित्व करता है।
-रमेश लाल मल, मेयर, एमसीए