{"_id":"6a8cab0511cd4184350f91c8","slug":"over-12000-transfers-stalled-due-to-patwari-kanungo-strike-ambala-news-c-36-1-sknl1003-168362-2026-08-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ambala News: पटवारी-कानूनगो ने की हड़ताल से अटके 12 हजार से अधिक इंतकाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ambala News: पटवारी-कानूनगो ने की हड़ताल से अटके 12 हजार से अधिक इंतकाल
विज्ञापन
सुरिंद्र कौर
- फोटो : Archive
जन्म प्रमाणपत्र से लेकर मूल निवास और इंतकाल के लिए भटकते रहे लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। जिले में सोमवार को पटवारी ओर कानूनगो की हड़ताल तीसरे दिन भी जारी रही। इस दौरान पटवारखानों में कामकाज ठप रहा। लोग सुबह से शाम तक परेशान होते रहे और पटवारखाने के चक्कर काटते रहे। लोगाें के मूल निवास प्रमाण पत्र, बैंक लोन, कोर्ट केस, इंतकाल, विरासत इंतकाल, जाति सत्यापन कराने के लिए पटवारखाने पहुंचे थे लेकिन पटवारियों के न मिलने से आम नागरिकों को परेशानी झेलनी पड़ी।
जिला के पटवारखानों में इंतकाल 12 हजार 200, मूल निवासी प्रमाण पत्र 450, पुरानी जमाबंदी और पुरानी नकल गिरदावरी की 350, कोर्ट केस 31, जाति प्रमाण पत्र का सत्यापन 390, लोन का काम 145 सहित अन्य काम अटके रहे।
30 साल बाद मायके से जाति प्रमाण पत्र बनवाने आईं
अंबाला सिटी के ठरवा गांव निवासी सुरिंद्र कौर ने बताया कि उनकी शादी को 30 साल हो चुके हैं और मेरा ससुराल पटियाला के पास है। उन्हें जाति प्रमाण पत्र की जरूरत थी, इसलिए पटियाला से अपने भतीजे के साथ अंबाला छावनी पटवारखाने आई थी। यहां आकर पता चला कि पटवारी हड़ताल पर हैं। उम्रदराज होने के कारण इतनी दूर सफर करके आना बेहद मुश्किल है, लेकिन यहां आकर भी खाली हाथ लौटना पड़ रहा।
विज्ञापन
बेटी की स्कूल से छुट्टी कराई, लेकिन पटवारखाने पर मिला ताला
टुंडला निवासी निशा ने बताया कि उन्हें अपनी बेटी प्रतिज्ञा का जाति प्रमाण पत्र बनवाना था। इसी काम के सिलसिले में सोमवार को बेटी की स्कूल से छुट्टी करवाकर पटवारखाने पटवारी के पास पहुंची थी। सोचा था काम आसानी से हो जाएगा, लेकिन यहां आकर देखा तो ताला लटका हुआ था। इस हड़ताल ने आम जनता का काम पूरी तरह अटका दिया।
निवास प्रमाण पत्र पर साइन कराने थे, अब बिना काम कराए जा रहे
मुनरहेड़ी निवासी संजीव ने बताया कि बेटी चाहत का मूल निवास प्रमाण पत्र बनवाने के लिए पटवारी के हस्ताक्षर कराने आए थे। पटवारखाने पहुंचे तो पता चला कि हड़ताल के कारण कोई काम नहीं हो रहा है। जरूरी दस्तावेज न बनने से आगे का काम रुक गया और अब बिना काम कराए ही वापस घर लौटना पड़ रहा।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। जिले में सोमवार को पटवारी ओर कानूनगो की हड़ताल तीसरे दिन भी जारी रही। इस दौरान पटवारखानों में कामकाज ठप रहा। लोग सुबह से शाम तक परेशान होते रहे और पटवारखाने के चक्कर काटते रहे। लोगाें के मूल निवास प्रमाण पत्र, बैंक लोन, कोर्ट केस, इंतकाल, विरासत इंतकाल, जाति सत्यापन कराने के लिए पटवारखाने पहुंचे थे लेकिन पटवारियों के न मिलने से आम नागरिकों को परेशानी झेलनी पड़ी।
जिला के पटवारखानों में इंतकाल 12 हजार 200, मूल निवासी प्रमाण पत्र 450, पुरानी जमाबंदी और पुरानी नकल गिरदावरी की 350, कोर्ट केस 31, जाति प्रमाण पत्र का सत्यापन 390, लोन का काम 145 सहित अन्य काम अटके रहे।
विज्ञापन
30 साल बाद मायके से जाति प्रमाण पत्र बनवाने आईं
अंबाला सिटी के ठरवा गांव निवासी सुरिंद्र कौर ने बताया कि उनकी शादी को 30 साल हो चुके हैं और मेरा ससुराल पटियाला के पास है। उन्हें जाति प्रमाण पत्र की जरूरत थी, इसलिए पटियाला से अपने भतीजे के साथ अंबाला छावनी पटवारखाने आई थी। यहां आकर पता चला कि पटवारी हड़ताल पर हैं। उम्रदराज होने के कारण इतनी दूर सफर करके आना बेहद मुश्किल है, लेकिन यहां आकर भी खाली हाथ लौटना पड़ रहा।
विज्ञापन
बेटी की स्कूल से छुट्टी कराई, लेकिन पटवारखाने पर मिला ताला
टुंडला निवासी निशा ने बताया कि उन्हें अपनी बेटी प्रतिज्ञा का जाति प्रमाण पत्र बनवाना था। इसी काम के सिलसिले में सोमवार को बेटी की स्कूल से छुट्टी करवाकर पटवारखाने पटवारी के पास पहुंची थी। सोचा था काम आसानी से हो जाएगा, लेकिन यहां आकर देखा तो ताला लटका हुआ था। इस हड़ताल ने आम जनता का काम पूरी तरह अटका दिया।
निवास प्रमाण पत्र पर साइन कराने थे, अब बिना काम कराए जा रहे
मुनरहेड़ी निवासी संजीव ने बताया कि बेटी चाहत का मूल निवास प्रमाण पत्र बनवाने के लिए पटवारी के हस्ताक्षर कराने आए थे। पटवारखाने पहुंचे तो पता चला कि हड़ताल के कारण कोई काम नहीं हो रहा है। जरूरी दस्तावेज न बनने से आगे का काम रुक गया और अब बिना काम कराए ही वापस घर लौटना पड़ रहा।

सुरिंद्र कौर- फोटो : Archive

सुरिंद्र कौर- फोटो : Archive