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रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर तो डेंगू होने की आशंका ज्यादा
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शहजादपुर। जुलाई को डेंगू रोधी माह के तौर पर मनाया जा रहा है। लोगों को स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां रखने और डेंगू से बचाव के बारे में जागरूक किया जा रहा है। जानकारी देते हुए पीएचसी पतरेहड़ी के प्रभारी डॉ. विनोद सैनी ने बताया कि जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है, उनमें डेंगू होने की संभावना अधिक होती है। ऐसे में बुजुर्गों को अधिक सावधानी बरतनी चाहिए।
साथ ही मधुमेह, फेफड़ों के रोग और हृदय रोग से पीड़ित लोगों में डेंगू होने की आशंका बढ़ जाती है। डेंगू तब और अधिक गंभीर हो जाता है, जब पीड़ित व्यक्ति के रक्त में प्लेटलेट्स (थक्का बनाने वाली कोशिकाएं) काफी कम होने लगता है। ऐसे में यदि आपका प्लेटलेट्स कम है तो दूसरों की तुलना में डेंगू से जल्दी संक्रमित हो सकते हैं। डॉ. विनोद ने बताया कि डेंगू एक मच्छर जनित वायरल इंफेक्शन या डिजीज है। डेंगू एडीज मच्छर के काटने से होता है।
उन्होंने बताया कि डेंगू होने पर तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों व जोड़ों में दर्द, त्वचा पर चकत्ते आदि निकल आते हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में डेंगू रोधी माह के दौरान स्वास्थ्य कर्मी ग्रामीणों के साथ पानी की होदियां, टब, टंकियां, टायर आदि जांच रहे हैं। उन्होंने बताया कि संक्रमित होने के बाद डेंगू के हल्के लक्षण चार से सात दिनों में नजर आने लगते हैं। बच्चों और किशोरों में माइल्ड डेंगू होने पर कई बार कोई लक्षण नजर नहीं आता।
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बचाव के उपाय
शरीर को हाइड्रेटेड रखकर डेंगू को कंट्रोल में रखा जा सकता है। ऐसे में पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पानी पीना चाहिए। डेंगू से बचने के लिए खुद को मच्छरों से बचाकर रखना जरूरी है। जितना हो सके व्यक्ति को मॉस्किटो रेपलेंट्स, मच्छरदानी का इस्तेमाल करना चाहिए। अपने घर के दरवाजे और खिड़कियों को शाम होने से पहले बंद कर दें। शरीर को पूरी तरह से कवर करने वाले कपड़े पहनें।
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साथ ही मधुमेह, फेफड़ों के रोग और हृदय रोग से पीड़ित लोगों में डेंगू होने की आशंका बढ़ जाती है। डेंगू तब और अधिक गंभीर हो जाता है, जब पीड़ित व्यक्ति के रक्त में प्लेटलेट्स (थक्का बनाने वाली कोशिकाएं) काफी कम होने लगता है। ऐसे में यदि आपका प्लेटलेट्स कम है तो दूसरों की तुलना में डेंगू से जल्दी संक्रमित हो सकते हैं। डॉ. विनोद ने बताया कि डेंगू एक मच्छर जनित वायरल इंफेक्शन या डिजीज है। डेंगू एडीज मच्छर के काटने से होता है।
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उन्होंने बताया कि डेंगू होने पर तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों व जोड़ों में दर्द, त्वचा पर चकत्ते आदि निकल आते हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में डेंगू रोधी माह के दौरान स्वास्थ्य कर्मी ग्रामीणों के साथ पानी की होदियां, टब, टंकियां, टायर आदि जांच रहे हैं। उन्होंने बताया कि संक्रमित होने के बाद डेंगू के हल्के लक्षण चार से सात दिनों में नजर आने लगते हैं। बच्चों और किशोरों में माइल्ड डेंगू होने पर कई बार कोई लक्षण नजर नहीं आता।
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बचाव के उपाय
शरीर को हाइड्रेटेड रखकर डेंगू को कंट्रोल में रखा जा सकता है। ऐसे में पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पानी पीना चाहिए। डेंगू से बचने के लिए खुद को मच्छरों से बचाकर रखना जरूरी है। जितना हो सके व्यक्ति को मॉस्किटो रेपलेंट्स, मच्छरदानी का इस्तेमाल करना चाहिए। अपने घर के दरवाजे और खिड़कियों को शाम होने से पहले बंद कर दें। शरीर को पूरी तरह से कवर करने वाले कपड़े पहनें।