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Ambala News: किताब पढ़ाकर बच्चों से छुड़वा रहे मोबाइल फोन की लत

Fri, 06 Feb 2026 01:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला Updated Fri, 06 Feb 2026 01:47 AM IST
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Helping children get rid of mobile phone addiction by teaching them books
मानसी माैर्य
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करनाल। बच्चों में बढ़ती मोबाइल और सोशल मीडिया की लत को किताब या अखबार पढ़ने और अन्य गतिविधियों से छुड़वाया जा सकता है। जब बच्चा इस लत से पूरी तरह से घिर जाता है तो खुद अभिभावक भी उसे काउंसलिंग के लिए जिला बाल कल्याण विभाग के पास लाने लगे हैं। हर माह ऐसे दो से चार केस सामने आ रहे हैं। विभाग के काउंसलिंग सेंटर में सात दिनों में पांच चरणों की काउंसलिग की जाती है।

इस दौरान बच्चों को किताबें पढ़ाना, अखबार पढ़ाना, बच्चे की रुचि को जानकर उन्हें ड्राइंग, संगीत, नृत्य और अन्य कामों में लगाया जाता है ताकि मोबाइल व सोशल मीडिया की लत छूट सके। जिला बाल कल्याण समिति की बच्चों की परामर्शदाता पूनम ने बताया कि बच्चे मोबाइल की लत इतनी अधिक लगा चुके होते हैं कि उन्हें स्वयं के माता-पिता ही दुश्मन लगने लगते हैं, जिसे ठीक करने के लिए कई चरणों में काउंसलिंग की जाती है। इसके कारण बच्चे तनाव, गुस्से, अकेलेपन और आत्मघाती विचारों तक पहुंच चुके होते हैं। इन बच्चों को न केवल पढ़ाई से दूरी बनानी पड़ रही है, बल्कि वे परिवार, समाज और वास्तविक दुनिया से भी कटते जा रहे हैं। जिला बाल कल्याण समिति के माध्यम से उनकी काउंसलिंग, थेरेपी और पुनर्वास किया जाता है।
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स्कूल के वातावरण पर भी देना चाहिए ध्यान
समिति के अध्यक्ष चंद्रप्रकाश का कहना है कि बच्चों के व्यवहार और मोबाइल की लत में सबसे बड़ी भूमिका माता-पिता, स्कूल में दोस्तों व सहपाठियों का वातावरण और सोशल प्लेटफॉर्म है। आज के माता-पिता अधिक कामकाजी है जिसके कारण बच्चा स्वयं को अकेला पाकर मोबाइल में स्वयं को व्यस्त कर लेता है। वहीं स्कूल का वातावरण सबसे बड़ा कारण बनता है जिसमें दोस्तों के साथ मोबाइल को लेकर प्रतियोगिता रखना, गेम और अन्य सभी में, जिसके कारण बच्चा धीरे-धीरे स्वयं को बलशाली दिखाने के चक्कर में लत में पड़ जाता है।
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- मामलों के अध्ययन में सामने आए प्रमुख कारण : ऑनलाइन गेमिंग, जीत-हार से जुड़ा तनाव और आक्रामकता, सोशल मीडिया और वीडियो प्लेटफॉर्म, शॉर्ट वीडियो देखने की आदत, लाइक्स और फॉलोअर्स का दबाव, पैरेंटल निगरानी की कमी, माता-पिता का समय न दे पाना, मोबाइल को शांत रखने का साधन बनाना, अकेलापन और भावनात्मक कमी, दोस्ती में दूरी, घर में संवाद की कमी।

बच्चों की काउंसलिंग की प्रक्रिया

- पहला चरण : प्रारंभिक स्क्रीनिंग में माता-पिता व बच्चा दोनों की काउंसलिंग, बच्चे के व्यवहार का आकलन, मोबाइल उपयोग का समय और प्रकार, मानसिक स्थिति की जांच

- दूसरा चरण : काउंसलर से बातचीत में बच्चे को सुरक्षित माहौल देना, डर, गुस्सा और अकेलेपन पर खुलकर बात, भरोसे का रिश्ता बनाना

- तीसरा चरण : पैरेंट्स काउंसलिंग में माता-पिता को लत के संकेत समझाना, सख्ती नहीं, संवाद अपनाने की सलाह

- चौथा चरण : थेरेपी और डिजिटल डिटॉक्स में मोबाइल से धीरे-धीरे दूरी, खेल, कला और समूह गतिविधियां

- पांचवां चरण : फॉलो-अप में पहले लगातार सात सत्रों में काउंसलिंग करना, इसके बाद हर दस से पंद्रह दिन बाद फॉलोअप लेना

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माता-पिता ने फोन लिया तो बेटे ने कर दी पुलिस को शिकायत



करनाल। मोबाइल की लत इस कदर बढ़ गई कि शहर के एक 13 वर्षीय बेटे से मां-बाप ने मोबाइल फोन छीन लिया तो वह अपने ही अभिभावकों के खिलाफ हो गया। बेटे ने अपने माता-पिता के खिलाफ पुलिस को शिकायत कर दी। पुलिस ने शिकायत सीडब्ल्यूसी के पास भेजी। इसके बाद टीम ने माैके पर जाकर बच्चे की काउंसलिंग करने की प्रक्रिया शुरू की। पूछताछ में पता चला कि वह गेम खेलने पर काफी खुश रहता है। बच्चे ने बताया कि माता-पिता लगातार मोबाइल छीनने की बात कहते हैं और मोबाइल से दूर रहने के लिए कहते हैं तो उसे गुस्सा आ जाता है। बच्चे की काउंसलिंग की गई। बच्चे को आउटडोर खेल में व्यस्त कर और लगातार काउंसलिंग के जरिये ठीक किया गया। समिति के अध्यक्ष चंद्र प्रकाश ने बताया कि इस साल ऐसे तीन मामले समिति के पास आए हैं जिनमें बच्चे गंभीर रूप से मोबाइल की लत से पीड़ित पाए गए हैं।




माता-पिता को पीटने लगा



सीडब्ल्यूसी के काउंसलिंग केंद्र में पिछले दिनों एक मामला सामने आया, जिसमें 14 वर्षीय बच्चा दिन-रात मोबाइल गेम खेलता था, मोबाइल छीने जाने पर माता-पिता से मारपीट करने लगा। माता-पिता ने विभाग में आकर गुहार लगाई कि बच्चे को सुधारा जाए और उसके व्यवहार में बदलाव लाया जाए। ऐसे में समिति की ओर से सात सत्र में बच्चे की काउंसलिंग की गई जिसमें शुरुआत में पहले बच्चे का भरोसा जीता गया, जिसमें धीरे-धीरे मानसिक स्थिति को जाना गया। बच्चे की रुचि जानी गई जिसमे उसे स्केचिंग करना और कार्टून बनाना पसंद था।
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