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Ambala News: मारकंडा में पानी छोड़ने से धड़कनें तेज
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मुलाना (अंबाला)। पहाड़ी क्षेत्र में बारिश से शुक्रवार को मुलाना में मारकंडा नदी का जलस्तर बढ़ गया। सुबह होते ही मारकंडा नदी उफान पर थी। जोकि सुबह करीब 10 बजे 6.5 फीट तक जा पहुंचा। ये करीब 24 हजार क्यूसेक था। हालांकि 11 बजे से जलस्तर घटना शुरू हो गया था।
इसी दौरान ग्रामीणों की धड़कनें तेज हो गईं। लोगों के माथे पर चिंता की रेखाएं बन गई। देखते ही आसपास के सभी गांवों में पानी के लिए चर्चा रही। 11 बजे मारकंडा नदी का जलस्तर करीब 5.7 फीट था। इसके बाद मारकंडा नदी का जलस्तर लगातार घटता गया। शाम छह बजे नदी का जलस्तर करीब 3.9 फीट था। जोकि करीब नौ हजार क्यूसेक पानी था।
पहाड़ी क्षेत्र में भी बारिश बंद होने की सूचना है। कालाअंब क्षेत्र में भी मारकंडा नदी का जलस्तर जोकि शुक्रवार सुबह उफान पर था। शाम को केवल एक फीट करीब 1500 क्यूसेक पानी रह गया था। गौरतलब है कि कुछ ही दिन सिंचाई विभाग ने कुछ ही दिन पहले बाढ़ से बचाव के लिए अपनी तैयारियां कि थी। नदी की खुदाई भी करवाई थी। इसके साथ ही तटबंधों को ऊंचा भी करवाया गया था। लेकिन अधिक पानी आएगा तो नदी में जलस्तर बढ़ने से परेशानी झेलनी पड़ सकती है।
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बीते वर्ष भी डूबे थे गांव
बीते वर्ष भी बरसात के समय आसपास के कई गांव में पानी भर गया था। कई दिनों तक लोगों को जलभराव के कारण परेशानी उठानी पड़ी थी। संपर्क भी टूट गया था। ग्रामीणों को डर है इस बार भी कुछ ऐसा हुआ तो क्या होगा।
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इसी दौरान ग्रामीणों की धड़कनें तेज हो गईं। लोगों के माथे पर चिंता की रेखाएं बन गई। देखते ही आसपास के सभी गांवों में पानी के लिए चर्चा रही। 11 बजे मारकंडा नदी का जलस्तर करीब 5.7 फीट था। इसके बाद मारकंडा नदी का जलस्तर लगातार घटता गया। शाम छह बजे नदी का जलस्तर करीब 3.9 फीट था। जोकि करीब नौ हजार क्यूसेक पानी था।
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पहाड़ी क्षेत्र में भी बारिश बंद होने की सूचना है। कालाअंब क्षेत्र में भी मारकंडा नदी का जलस्तर जोकि शुक्रवार सुबह उफान पर था। शाम को केवल एक फीट करीब 1500 क्यूसेक पानी रह गया था। गौरतलब है कि कुछ ही दिन सिंचाई विभाग ने कुछ ही दिन पहले बाढ़ से बचाव के लिए अपनी तैयारियां कि थी। नदी की खुदाई भी करवाई थी। इसके साथ ही तटबंधों को ऊंचा भी करवाया गया था। लेकिन अधिक पानी आएगा तो नदी में जलस्तर बढ़ने से परेशानी झेलनी पड़ सकती है।
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बीते वर्ष भी डूबे थे गांव
बीते वर्ष भी बरसात के समय आसपास के कई गांव में पानी भर गया था। कई दिनों तक लोगों को जलभराव के कारण परेशानी उठानी पड़ी थी। संपर्क भी टूट गया था। ग्रामीणों को डर है इस बार भी कुछ ऐसा हुआ तो क्या होगा।