फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Ambala News ›   guru gobind singh, dastar, first time, religious, ambala

गुरु गोबिंद ने अंबाला में पहनी थी सबसे पहली दस्तार

Tue, 11 Oct 2016 12:41 AM IST
ब्यूरो/अंबाला/अमर उजाला
ब्यूरो/अंबाला/अमर उजाला Updated Tue, 11 Oct 2016 12:41 AM IST
विज्ञापन
guru gobind singh, dastar, first time, religious, ambala
ऐतिहासिक गुरुद्वारा - फोटो : अमर उजाला

दशहरे पर्व का ताल्लुक भले ही हिंदू धर्म से हो, लेकिन यहां अंबाला में दशहरा का एक और रोचक इतिहास है और ये इतिहास सिख धर्म से जुड़ा है। यहां दशहरा के दिन ही सिखों के दसवें गुरु गोबिंद सिंह जी को बाल अवस्था में सबसे पहले दस्तार पहनाई गई थी। उनके मामा कृपाल चंद ने विधिविधान के साथ अपने भांजे बाल गोबिंद की दस्तारबंदी की थी।

विज्ञापन


तभी से अंबाला में गुरुगोबिंद सिंह जी के ननिहाल गांव लखनौर साहब में दशहरे वाले दिन न केवल जबरदस्त मेला भरता है, बल्कि पंजाब, हरियाणा, यूपी, समेत विदेशों से एनआईआर सिख परिवार के लोग अपने बच्चों को इसी दिन यहां गुरुद्वारा साहिब में लाते हैं और उनकी पहली बार दस्ताबंदी करवाई जाती है। दशहरे वाले दिन यहां मेले में उमड़ती भीड़ और दस्तारबंदी का नजारा देखने लायक होता है।
विज्ञापन


उल्लेखनीय है कि दसवें गुरु गोबिंद सिंह जी की माता गुज्जर कौर अंबाला के लखनौर गांव से ताल्लुक रखती थी। गुरुगोबिंद सिंह जी जब पैदा हुए तो कुछ सालों बाद वे पटना से वापस पंजाब जा रहे थे। तभी गुरुगोबिंद सिंह ने करीबन छह माह यहां अंबाला में अपने ननिहाल गांव लखनौर साहिब में अपनी माता के साथ रुके थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


गुरुगोबिंद सिंह जी की उम्र करीबन नौ साल की थी। सिख धर्म के मुताबिक ये रिवाज है कि भांजा की सबसे पहले दस्तारबंदी उसका मामा अपने हाथों से करता है। इसलिए माता गुज्जर कौर ने अपने बेटे गुरुगोबिंद सिंह जी की दस्तारबंदी यहीं लखनौर साहब में विजयदशमी यानी दशहरे वाले दिन करवाने का फैसला किया और बहुत ही शान से विधिविधान के साथ यहां गुरुगोबिंद सिंह जी के मामा कृपाल चंद ने उन्हे सबसे पहले दस्तार पहनाई।
जिस दिन गुरुगोबिंद सिंह जी की पहली बार दस्तारबंदी हुई, उस दिन चूंकि दशहरा था, इसलिए सिख धर्म में दशहरे के पर्व को इस आस्था से जोड़कर देखा जाता है और यहां गुरुगोबिंद सिंह जी के ननिहाल गांव में बने लखनौर साहब गुरुद्वारे में जबरदस्त मेले का आयोजन किया जाता है।


श्री लखनौर साहिब गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी मास्टर महेंद्र सिंह, मैनेजर शमशेर सिंह, गुरदीप सिंह भानोखेड़ी, सुखदेव सिंह गोबिंदगढ़, परमजीत सिंह बड़ौला, सुखविंद्र सिंह भानोखेड़ी ने बताया कि यहां बहुत दूर-दूर से लोग अपने बच्चों की दस्तारबंदी के लिए यहां आते हैं और अरदास करते हैं। उनके अनुसार यहां गुरुगोबिंद सिंह जी से जुड़ी कई घटनाएं हैं, लेकिन दशहरे वाले दिन दस्तारबंदी अपने आप में खास होती है। उनके अनुसार यहां गांव में मेले की पूरी तैयारियां कर ली गई हैं और इस अवसर पर प्रसाद भी बरताया जाएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed