{"_id":"0e31d1ee3eb2f4ea0acb7598fd329ed2","slug":"fraud-in-mc-empployees-epf","type":"story","status":"publish","title_hn":"सफाई कर्मियों के ईपीएफ में 20 लाख का घपला!","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सफाई कर्मियों के ईपीएफ में 20 लाख का घपला!
अंबाला
Updated Fri, 29 Nov 2013 04:29 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अंबाला नगर निगम कैंट जोन में निगम के अधीनस्थ ठेके पर रखे गए सफाई कर्मचारियों के ईपीएफ में करीब बीस लाख रुपये की गड़बड़ी का मामला सामने आया है।
सात साल से करीब 170 सफाई कर्मचारियों का ईपीएफ तो काटा जा रहा है, मगर इसे कहां जमा करवाया जा रहा है। इसकी कोई जानकारी नहीं दी जा रही है। नगर निगम अफसर व मेयर भी इस बारे में अनभिज्ञता जता रहे हैं।
मेयर ने इस मामले में जांच करवाने की बात कही है, जबकि सफाई कर्मियों ने इस मामले को लेकर अदालत जाने का मन बना लिया है।
उल्लेखनीय है कि कैंट के बहुत बड़े हिस्से में पिछले कई सालों से सफाई का काम ठेके पर दिया जा रहा है। नगर निगम के एक ठेकेदार के माध्यम से सफाई कर्मचारियों को विभिन्न इलाकों के लिए सफाई को रखती है और ठेकेदारों के माध्यम से ही उन्हें हर माह वेतन भी दिया जाता है।
वर्ष 2007 से इन सफाई कर्मचारियों ईपीएफ तो कटता जा रहा है, मगर ये कहां जमा हो रहा है? ये आज तक इन्ही सफाई कर्मचारियों को ही मालूम नहीं है। सफाई कर्मचारियों की माने तो तीन-चार ठेकेदार बदल चुके हैं। वह पुराने ठेकेदारों से लगातार संपर्क बनाकर उनसे इस बारे में जानकारी मांग रहे हैं, मगर उन्हें लगातार टरकाया जा रहा है।
विज्ञापन
सफाई कर्मचारियों का सात साल से ईपीएफ काटा जा रहा है और उन्हें गुमराह करते हुए कहा जा रहा है कि उनके करनाल में अकाउंट खोले हुए हैं। लेकिन वे लोग वहां जाकर भी चेक कर आएं हैं, मगर वहां भी उन्हे कोई जानकारी नहीं मिली।
कर्मचारियों का करीबन 20 लाख रुपये जो ईपीएफ के रूप में पिछले सात से काटा जा चुका है। सफाई कर्मचारी अब अफसरों व ठेकेदार के खिलाफ कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं।
-मनोज कुमार, प्रधान, सफाई कर्मचारी यूनियन
विज्ञापन
सात साल से करीब 170 सफाई कर्मचारियों का ईपीएफ तो काटा जा रहा है, मगर इसे कहां जमा करवाया जा रहा है। इसकी कोई जानकारी नहीं दी जा रही है। नगर निगम अफसर व मेयर भी इस बारे में अनभिज्ञता जता रहे हैं।
मेयर ने इस मामले में जांच करवाने की बात कही है, जबकि सफाई कर्मियों ने इस मामले को लेकर अदालत जाने का मन बना लिया है।
उल्लेखनीय है कि कैंट के बहुत बड़े हिस्से में पिछले कई सालों से सफाई का काम ठेके पर दिया जा रहा है। नगर निगम के एक ठेकेदार के माध्यम से सफाई कर्मचारियों को विभिन्न इलाकों के लिए सफाई को रखती है और ठेकेदारों के माध्यम से ही उन्हें हर माह वेतन भी दिया जाता है।
विज्ञापन
वर्ष 2007 से इन सफाई कर्मचारियों ईपीएफ तो कटता जा रहा है, मगर ये कहां जमा हो रहा है? ये आज तक इन्ही सफाई कर्मचारियों को ही मालूम नहीं है। सफाई कर्मचारियों की माने तो तीन-चार ठेकेदार बदल चुके हैं। वह पुराने ठेकेदारों से लगातार संपर्क बनाकर उनसे इस बारे में जानकारी मांग रहे हैं, मगर उन्हें लगातार टरकाया जा रहा है।
विज्ञापन
सफाई कर्मचारियों का सात साल से ईपीएफ काटा जा रहा है और उन्हें गुमराह करते हुए कहा जा रहा है कि उनके करनाल में अकाउंट खोले हुए हैं। लेकिन वे लोग वहां जाकर भी चेक कर आएं हैं, मगर वहां भी उन्हे कोई जानकारी नहीं मिली।
कर्मचारियों का करीबन 20 लाख रुपये जो ईपीएफ के रूप में पिछले सात से काटा जा चुका है। सफाई कर्मचारी अब अफसरों व ठेकेदार के खिलाफ कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं।
-मनोज कुमार, प्रधान, सफाई कर्मचारी यूनियन