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गेहूं में एक ही रसायन का छिड़काव न करें किसान
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गेहूं की बिजाई के बाद मंडूसी खरपतवार किसानों के लिए परेशानी बन गई है। इससे पैदावार अधिक प्रभावित होती है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि मंडूसी खरपतवार का मुख्य कारण बार-बार एक ही तरह के रसायन का प्रयोग करना है। इसके अलावा रसायन का छिड़काव करते समय पानी व रसायन को मिलाने की मात्रा में भी ऊंचनीच होने पर खरपतवार खेतों में पैदा हो जाती है। जो फसल के लिए नुकसानदेह साबित होती है। इस कारण कई बार 50 प्रतिशत व उससे अधिक तक फसल उत्पादन पर असर पड़ता है।
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सही मात्रा में रसायन का प्रयोग करने व समय-समय पर रसायन बदलने की सलाह दी है। साथ ही कृषि विशेषज्ञ ने बताया कि रसायन का स्प्रे उसी समय करना चाहिए, जब धूप अच्छी निकली हो। धुंध या फिर हवा चल रही है तो स्प्रे करने से बचना चाहिए।
ऐसे करें प्रयोग
कृषि विज्ञान केंद्र तेपला से विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र सिंह ने बताया कि गेहूं में सिंचाई का समय आ गया है। उम्मीद है कि जल्द ही बारिश भी आ जाएगी। इसलिए किसानों को फसल को खरपतवार से बचाने के लिए बारिश आने से दो दिन पहले पाईरोक्सासल्फान 85 प्रतिशत, डब्ल्यूडीजी केमिकल की उत्पाद मात्रा 60 ग्राम प्रति एकड़ को 120 से 150 लीटर पानी में घोलकर स्प्रे करें। अगर बारिश नहीं आती है तब भी सिंचाई से दो दिन पहले स्प्रे कर लेना चाहिए। इसके अलावा 30 से 35 दिन की अवस्था में क्लोडीनाफोप व मैट्रीविजीन केमिकल का तैयार मिश्रण 200 ग्राम प्रति एकड़ 120 से 150 लीटर पानी में घोलकर स्प्रे कर सकते हैं। जो कि फसल के लिए काफी लाभकारी सिद्ध होगा।
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कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सही मात्रा में रसायन का प्रयोग करने व समय-समय पर रसायन बदलने की सलाह दी है। साथ ही कृषि विशेषज्ञ ने बताया कि रसायन का स्प्रे उसी समय करना चाहिए, जब धूप अच्छी निकली हो। धुंध या फिर हवा चल रही है तो स्प्रे करने से बचना चाहिए।
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ऐसे करें प्रयोग
कृषि विज्ञान केंद्र तेपला से विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र सिंह ने बताया कि गेहूं में सिंचाई का समय आ गया है। उम्मीद है कि जल्द ही बारिश भी आ जाएगी। इसलिए किसानों को फसल को खरपतवार से बचाने के लिए बारिश आने से दो दिन पहले पाईरोक्सासल्फान 85 प्रतिशत, डब्ल्यूडीजी केमिकल की उत्पाद मात्रा 60 ग्राम प्रति एकड़ को 120 से 150 लीटर पानी में घोलकर स्प्रे करें। अगर बारिश नहीं आती है तब भी सिंचाई से दो दिन पहले स्प्रे कर लेना चाहिए। इसके अलावा 30 से 35 दिन की अवस्था में क्लोडीनाफोप व मैट्रीविजीन केमिकल का तैयार मिश्रण 200 ग्राम प्रति एकड़ 120 से 150 लीटर पानी में घोलकर स्प्रे कर सकते हैं। जो कि फसल के लिए काफी लाभकारी सिद्ध होगा।
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