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फर्जी दाखिला मामला : छुट्टियों में स्कूलों का रिकॉर्ड खंगाल रहे शिक्षक
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अंबाला सिटी। फर्जी दाखिला मामले में मौलिक शिक्षा विभाग ने राजकीय स्कूलों से पहली से आठवीं कक्षा तक मिड-डे-मील, छात्रवृत्ति एवं वर्दी भत्ता की जानकारी मांगी है। अब जानकारी देने के लिए शिक्षक ग्रीष्मकालीन अवकाश में भी स्कूलों का रिकॉर्ड खंगाल रहे हैं। ये रिकॉर्ड जिले के 764 स्कूलों के मुखियाओं से मांगा गया है। जानकारी एकत्रित होने पर विभाग की ओर से निदेशालय को आंकड़ा भेजा जाएगा।
जानकारी के अनुसार सीबीआई के नोटिस के बाद निदेशालय ने वर्ष 2014-15 और 2015-16 का रिकॉर्ड मांगा है। जुलाई 2024 में अंबाला में जांच में शामिल होने के लिए राजकीय स्कूलों को सीबीआई के नोटिस मिले थे। तब मिड डे मील प्रभारियों को जांच के लिए बुलाया गया था। वर्ष 2013-14 से पहले विद्यालयों में ऑफलाइन दाखिला हुआ होता था। उस समय आरटीई के तहत हर बच्चे को दाखिला देना अनिवार्य था। वर्ष 2013-2014 में एमआईएस पोर्टल शुरू होने के बाद जिन बच्चों का आधार कार्ड नहीं था, उनका दाखिला एमआईएस पोर्टल पर नहीं हुआ। इससे कई विद्यालयों के बच्चों का पोर्टल पर पंजीकरण नहीं हो पाया। अब इस मामले में सीबीआई जांच कराई जा रही है।
निदेशालय की ओर से 2014-15 और 2015-16 वर्ष की जानकारी मांगी गई है। यह जानकारी एकत्रित कर निदेशालय को भेजी जाएगी। -सुधीर कालड़ा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी
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रिपोर्ट देने के लिए स्कूलों को समय दिया जाना चाहिए ताकि सही आंकड़ा दिया जा सके। अमित छाबड़ा, राज्य प्रवक्ता, राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ
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जानकारी के अनुसार सीबीआई के नोटिस के बाद निदेशालय ने वर्ष 2014-15 और 2015-16 का रिकॉर्ड मांगा है। जुलाई 2024 में अंबाला में जांच में शामिल होने के लिए राजकीय स्कूलों को सीबीआई के नोटिस मिले थे। तब मिड डे मील प्रभारियों को जांच के लिए बुलाया गया था। वर्ष 2013-14 से पहले विद्यालयों में ऑफलाइन दाखिला हुआ होता था। उस समय आरटीई के तहत हर बच्चे को दाखिला देना अनिवार्य था। वर्ष 2013-2014 में एमआईएस पोर्टल शुरू होने के बाद जिन बच्चों का आधार कार्ड नहीं था, उनका दाखिला एमआईएस पोर्टल पर नहीं हुआ। इससे कई विद्यालयों के बच्चों का पोर्टल पर पंजीकरण नहीं हो पाया। अब इस मामले में सीबीआई जांच कराई जा रही है।
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निदेशालय की ओर से 2014-15 और 2015-16 वर्ष की जानकारी मांगी गई है। यह जानकारी एकत्रित कर निदेशालय को भेजी जाएगी। -सुधीर कालड़ा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी
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रिपोर्ट देने के लिए स्कूलों को समय दिया जाना चाहिए ताकि सही आंकड़ा दिया जा सके। अमित छाबड़ा, राज्य प्रवक्ता, राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ