अंबाला: मंत्री विज का राहुल गांधी पर तंज, बोले- संवैधानिक संस्थाओं पर हमला करना विपक्ष के अभियान का हिस्सा बना
मंत्री अनिल विज ने कहा कि राहुल गांधी कभी ईडी, कभी सीबीआई तो कभी भारत निर्वाचन आयोग को कठघरे में खड़ा करते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे अधिकारियों और संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठाना अस्वीकार्य है।
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हरियाणा के कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और विपक्षी दलों पर लोकतांत्रिक व संवैधानिक संस्थाओं की साख गिराने का गंभीर आरोप लगाया है। अंबाला में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि देश की प्रतिष्ठित और स्वतंत्र जांच एवं चुनाव एजेंसियों पर लगातार उंगली उठाना राहुल गांधी के एक सोचे-समझे राजनीतिक अभियान का हिस्सा बन चुका है।
हार से हताश होकर संस्थाओं पर फोड़ रहे ठीकरा
कैबिनेट मंत्री ने कहा कि राहुल गांधी कभी ईडी, कभी सीबीआई तो कभी भारत निर्वाचन आयोग को कठघरे में खड़ा करते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि लोकतंत्र में विरोध दर्ज कराने का अधिकार सभी को है, लेकिन संवैधानिक पदों पर बैठे अधिकारियों और संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठाना अस्वीकार्य है।
#WATCH अंबाला: हरियाणा के मंत्री अनिल विज ने कहा, "...राहुल गांधी एक-एक करके लोकतांत्रिक संस्थाओं पर हमला कर रहे हैं। कभी वे चुनाव आयोग को निशाना बनाते हैं, कभी ED को और कभी CBI को निशाना बनाते हैं। यह उनके अभियान का हिस्सा है। लोकतंत्र में विरोध करना एक अधिकार है। लेकिन ये पार्टियां ज्ञानेश कुमार का विरोध इसलिए कर रही हैं क्योंकि लोगों ने उन्हें नकार दिया है। चुनाव आयोग का काम यह सुनिश्चित करना है कि वोट सही हों, और वह अपना काम कर रहा है..."
— ANI_HindiNews (@AHindinews) September 26, 2026
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर विपक्ष द्वारा साधे जा रहे निशानों पर पलटवार करते हुए विज ने कहा कि विपक्षी दल और राहुल गांधी इसलिए विरोध कर रहे हैं क्योंकि देश की जनता चुनावों में उन्हें बार-बार नकार चुकी है। जनता का समर्थन खो चुकी पार्टियां अब अपनी चुनावी विफलताओं का ठीकरा संस्थाओं पर फोड़ने की कोशिश कर रही हैं।
चुनाव आयोग कर रहा अपना संवैधानिक काम
अनिल विज ने कहा कि चुनाव आयोग का प्राथमिक और संवैधानिक दायित्व यह सुनिश्चित करना है कि देश में निष्पक्ष, पारदर्शी और सही तरीके से मतदान हो। आयोग बिना किसी दबाव के अपनी तय प्रक्रिया के तहत अपना काम कर रहा है, लेकिन राजनीतिक लाभ के लिए उस पर अनर्गल आरोप मढ़ना देश के लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर करने जैसा है।