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Ambala News: बैंक चोरी में तीन संदिग्धों पर नजर, भेदी पर शक
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अंबाला। बलदेव नगर के कोऑपरेटिव बैंक में चोरी में अभी बड़ी सफलता हाथ नहीं लगी है, लेकिन पुलिस की नजर में तीन संदिग्ध हैं। अभी यह पुष्टि नहीं हुई है कि आखिर ये कौन हैं और उनकी संलिप्तता है या नहीं।
दूसरी ओर, पुलिस इस पूरे मामले में किसी भेदी की संलिप्तता को देख रही है, जिसे बैंक के कमजोर सिस्टम के बारे में पूरी जानकारी थी। पता था कि आखिर बैंक के अलार्म और सीसीटीवी का कनेक्शन किसी मोबाइल से नहीं है। दो दिन की छुट्टी के बीच झाड़ियों वाले खाली प्लाॅट के रास्ते आसानी से वारदात को अंजाम दिया जा सकता है।
इतना ही नहीं, इस चोरी में बैंक की बड़ी लापरवाही भी सामने आई है, जिस जगह पर सीसीटीवी की एलसीडी लगी थी, ठीक उसी के पास ही डीवीआर रखा था। चोर वारदात को अंजाम देने के बाद वो भी ले गए और कोई ठोस सुराग नहीं बचा।
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डीवीआर से मिलेगा ठोस सुराग : एसपी
चोरी की वारदात से सबक लेने के बाद एसपी अंबाला जश्नदीप सिंह रंधावा का कहना है कि बैंकों में लगे सीसीटीवी के डीवीआर सुरक्षित हो तो उससे चोरों तक पहुंचा जा सकता है। वह अपने आप में ठोस सुराग होता है, जिससे आरोपी की लीड मिल सकती है। इसके लिए आलाधिकारियों से पत्राचार करेंगे, जिससे कि सभी बैंक सबसे पहले अपने डीवीआर को सुरक्षित करें।
बैंकों में सेफ्टी अलार्म की भी कमी
अधिकतर बैंकों में देखा गया कि हाईटेक सेफ्टी अलार्म नहीं है, जिससे सीधा दिए गए मोबाइल नंबरों पर अलर्ट आ जाता है। पुराने समय से अलार्म ही लगे हैं, जो केवल आवाज करते हैं और उनका तार काट दिया जाए तो वे नहीं बजते। जबकि मोबाइल वाले अलार्म से छोटी से छोटी छेड़छाड़ का पता चल जाता है। तुरंत ही कहीं से भी पुलिस को फोन कर बैंक भेज सकते हैं। यह सिस्टम 40 हजार रुपये का लगभग आता है। बैंक इसे लगवा कर सुरक्षा को और मजबूत कर सकते हैं।
बैंक में चोरी के मामले में तीन संदिग्ध पर नजर रखी जा रही है। सीसीटीवी के साथ ही डीवीआर रखा था और चोर उसे भी संग ले गए। सभी बैंकों को अपने-अपने डीवीआर सुरक्षित रखने और अलार्म सिस्टम को हाईटेक बनाने लिए विभाग को लिखा जाएगा, जिससे कि बैंकों को और सुरक्षित बनाया जा सके।
जश्नदीप सिंह रंधावा, एसपी अंबाला।
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दूसरी ओर, पुलिस इस पूरे मामले में किसी भेदी की संलिप्तता को देख रही है, जिसे बैंक के कमजोर सिस्टम के बारे में पूरी जानकारी थी। पता था कि आखिर बैंक के अलार्म और सीसीटीवी का कनेक्शन किसी मोबाइल से नहीं है। दो दिन की छुट्टी के बीच झाड़ियों वाले खाली प्लाॅट के रास्ते आसानी से वारदात को अंजाम दिया जा सकता है।
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इतना ही नहीं, इस चोरी में बैंक की बड़ी लापरवाही भी सामने आई है, जिस जगह पर सीसीटीवी की एलसीडी लगी थी, ठीक उसी के पास ही डीवीआर रखा था। चोर वारदात को अंजाम देने के बाद वो भी ले गए और कोई ठोस सुराग नहीं बचा।
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डीवीआर से मिलेगा ठोस सुराग : एसपी
चोरी की वारदात से सबक लेने के बाद एसपी अंबाला जश्नदीप सिंह रंधावा का कहना है कि बैंकों में लगे सीसीटीवी के डीवीआर सुरक्षित हो तो उससे चोरों तक पहुंचा जा सकता है। वह अपने आप में ठोस सुराग होता है, जिससे आरोपी की लीड मिल सकती है। इसके लिए आलाधिकारियों से पत्राचार करेंगे, जिससे कि सभी बैंक सबसे पहले अपने डीवीआर को सुरक्षित करें।
बैंकों में सेफ्टी अलार्म की भी कमी
अधिकतर बैंकों में देखा गया कि हाईटेक सेफ्टी अलार्म नहीं है, जिससे सीधा दिए गए मोबाइल नंबरों पर अलर्ट आ जाता है। पुराने समय से अलार्म ही लगे हैं, जो केवल आवाज करते हैं और उनका तार काट दिया जाए तो वे नहीं बजते। जबकि मोबाइल वाले अलार्म से छोटी से छोटी छेड़छाड़ का पता चल जाता है। तुरंत ही कहीं से भी पुलिस को फोन कर बैंक भेज सकते हैं। यह सिस्टम 40 हजार रुपये का लगभग आता है। बैंक इसे लगवा कर सुरक्षा को और मजबूत कर सकते हैं।
बैंक में चोरी के मामले में तीन संदिग्ध पर नजर रखी जा रही है। सीसीटीवी के साथ ही डीवीआर रखा था और चोर उसे भी संग ले गए। सभी बैंकों को अपने-अपने डीवीआर सुरक्षित रखने और अलार्म सिस्टम को हाईटेक बनाने लिए विभाग को लिखा जाएगा, जिससे कि बैंकों को और सुरक्षित बनाया जा सके।
जश्नदीप सिंह रंधावा, एसपी अंबाला।