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चुनावी मिसाल बनी पूर्णी और प्रेमी की वोट
ब्यूरो/अमर उजाला अंबाला
Updated Mon, 25 Jan 2016 01:23 AM IST
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पंचायत चुनाव में जहां भले ही मतदान 87.5 प्रतिशत रहा, लेकिन इस दौरान बुजुर्गों का जोश भी देखने लायक था। कोई बुजुर्ग हाथों में लाठी लेकर खुद मतदान केंद्र तक वोट करने पहुंच रहे थे, तो कई बुजुर्ग किसी दूसरे के सहारे से मतदान केंद्र तक पहुंचे। बस, उनमें एक ही जोश था कि उम्र के इस आखिरी पड़ाव में आकर भी वे चुनाव पर्व में शामिल हो और एक जागरूक मतदाता का फर्ज अदा करते हुए मतदान जरूर करें।
इसी मतदान में दोनों ब्लॉक में चर्चा और कौतुहल का विषय बनी रही पूर्णी (103 साल, गांाव भड़ौग) और प्रेमी देवी (102, गांव बहलौली) की वोट। क्योंकि इन दोनों बुजुर्ग माताएं सौ साल से ऊपर पार हो चुकी है, लेकिन फिर भी मतदान केंद्र पर चुनाव करने पहुंची। प्रशासनिक अफसरों ने भी उनके जज्बे को सलाम किया, जबकि इन बुजुर्ग महिलाओं के मतदान के दौरान प्रत्याशियों में भी काफी उत्साह दिखा। वे भी इन बुजुर्ग माताओं का वोट आशीर्वाद स्वरूप प्राप्त करना चाहते थे, लेकिन चुनाव करवा रहे अफसरों व कर्मचारियों ने उनकी वोट के दौरान पूरी गोपनीयता बरती। इन दोनों महिलाओं से पूछने के बाद अफसरों ने उनका वोट करवाया।
पूर्णी भी बोली, पढ़ा-लिखे हौवे सरपंच
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भड़ौग में स्थापित मतदान केन्द्र पर अपने परिजनों के सहयोग से 103 वर्षीय पुर्णी देवी भी मतदान करने पहुंची। पुर्णी देवी ने भी इस बात को स्वीकार किया कि पंचायत प्रतिनिधियों का पढ़ा-लिखा होना जरूरी है, क्योंकि वह अनपढ़ होने के कारण कभी भी अपने अधिकारों के बारे में नहीं जान पाई।
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उधर, गांव बहलौली में 102 वर्षीय प्रेमी देवी को चारपाई पर चुनाव करवाने के लिए लाया गया। लेटे हुए ही उन्होंने चुनाव अफसरों को उस प्रत्याशी का नाम बताया, जिसे उन्होंने वोट देनी है, उसके बाद चुनाव अफसर ने उनसे वोट करवाया और चारपाई पर उन्हें वापस ले जाया गया। उन्होंने भी कहा कि सरपंच और पंच पढ़े-लिखे होंगे तो गांव और तरक्की करेगा। दोनों बुजुर्ग महिलाओं का कहना है कि वे हर बार अपना वोट जरूर देती है, इसलिए वे इस कड़ाके की सर्दी में भी वोट करने पहुंची है।
रांझा और सरदारा भी बोला, पढ़ाई जरूरी
उधर, गांव बहलौली में वयोवृद्ध जोगिंद्र सिंह रांझा चलने-फिरने से लाचार थे, लेकिन फिर भी वे रेहड़ी पर वोट करने पहुंचे। उधर, कड़ासन गांव में भी वयोवृद्ध सरदारा राम ने कहा कि उन्होंने हमेशा अपने मत का इस्तेमाल किया है, इसलिए आज वे पीछे कैसे रह जाते। दोनों बुजुर्गों ने कहा कि जनप्रतिनिधियों का पढना-लिखना जरूरी होना चाहिए। उधर गांव कोड़वा खुर्द में युवती बलजिंद्र कौर, अधेड़ रंजीत कौर व बुजुर्ग शीला देवी ने एक साथ चुनाव कर पीढ़ी-दर-पीढ़ी चुनाव परंपरा जारी रखने की मिसाल पेश की। इसी तरह कई और भी बुजुर्ग सर्दी को मात देकर मतदान केंद्रों पर अपना वोट देने पहुंचे।
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इसी मतदान में दोनों ब्लॉक में चर्चा और कौतुहल का विषय बनी रही पूर्णी (103 साल, गांाव भड़ौग) और प्रेमी देवी (102, गांव बहलौली) की वोट। क्योंकि इन दोनों बुजुर्ग माताएं सौ साल से ऊपर पार हो चुकी है, लेकिन फिर भी मतदान केंद्र पर चुनाव करने पहुंची। प्रशासनिक अफसरों ने भी उनके जज्बे को सलाम किया, जबकि इन बुजुर्ग महिलाओं के मतदान के दौरान प्रत्याशियों में भी काफी उत्साह दिखा। वे भी इन बुजुर्ग माताओं का वोट आशीर्वाद स्वरूप प्राप्त करना चाहते थे, लेकिन चुनाव करवा रहे अफसरों व कर्मचारियों ने उनकी वोट के दौरान पूरी गोपनीयता बरती। इन दोनों महिलाओं से पूछने के बाद अफसरों ने उनका वोट करवाया।
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पूर्णी भी बोली, पढ़ा-लिखे हौवे सरपंच
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भड़ौग में स्थापित मतदान केन्द्र पर अपने परिजनों के सहयोग से 103 वर्षीय पुर्णी देवी भी मतदान करने पहुंची। पुर्णी देवी ने भी इस बात को स्वीकार किया कि पंचायत प्रतिनिधियों का पढ़ा-लिखा होना जरूरी है, क्योंकि वह अनपढ़ होने के कारण कभी भी अपने अधिकारों के बारे में नहीं जान पाई।
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उधर, गांव बहलौली में 102 वर्षीय प्रेमी देवी को चारपाई पर चुनाव करवाने के लिए लाया गया। लेटे हुए ही उन्होंने चुनाव अफसरों को उस प्रत्याशी का नाम बताया, जिसे उन्होंने वोट देनी है, उसके बाद चुनाव अफसर ने उनसे वोट करवाया और चारपाई पर उन्हें वापस ले जाया गया। उन्होंने भी कहा कि सरपंच और पंच पढ़े-लिखे होंगे तो गांव और तरक्की करेगा। दोनों बुजुर्ग महिलाओं का कहना है कि वे हर बार अपना वोट जरूर देती है, इसलिए वे इस कड़ाके की सर्दी में भी वोट करने पहुंची है।
रांझा और सरदारा भी बोला, पढ़ाई जरूरी
उधर, गांव बहलौली में वयोवृद्ध जोगिंद्र सिंह रांझा चलने-फिरने से लाचार थे, लेकिन फिर भी वे रेहड़ी पर वोट करने पहुंचे। उधर, कड़ासन गांव में भी वयोवृद्ध सरदारा राम ने कहा कि उन्होंने हमेशा अपने मत का इस्तेमाल किया है, इसलिए आज वे पीछे कैसे रह जाते। दोनों बुजुर्गों ने कहा कि जनप्रतिनिधियों का पढना-लिखना जरूरी होना चाहिए। उधर गांव कोड़वा खुर्द में युवती बलजिंद्र कौर, अधेड़ रंजीत कौर व बुजुर्ग शीला देवी ने एक साथ चुनाव कर पीढ़ी-दर-पीढ़ी चुनाव परंपरा जारी रखने की मिसाल पेश की। इसी तरह कई और भी बुजुर्ग सर्दी को मात देकर मतदान केंद्रों पर अपना वोट देने पहुंचे।