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पंचायत चुनाव की आहट से गांवों में बढ़ी सरगर्मी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 30 May 2022 12:57 AM IST
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Due to the sound of Panchayat elections, the agitation in the villages increased
बराड़ा। हाईकोर्ट के आदेशों के बाद पंचायती चुनावों की आहट ने गांवों में राजनीतिक माहौल गर्मा दिया है। बताया जा रहा है कि प्रदेश में पंचायत चुनाव जुलाई के आसपास होंगे। इस खबर के बाद से चौपाल, चौराहे पर पंचायती चुनाव की चर्चा होने लगी है। गौरतलब है कि 23 फरवरी 2021 में सरपंचों का कार्यकाल पूरा हो चुका था।
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जानकारी के अनुसार पंचायती राज एक्ट में महिला आरक्षण (50 प्रतिशत) सहित कुछ अन्य संशोधन किए थे। इनके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर कर चुनौती दी गई थी। इन याचिकाओं पर हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए प्रदेश में करीब सवा साल बाद पंचायत चुनाव को हरी झंडी दी है। इसके बाद से ही क्षेत्र में चुनावी हलचल तेज हो गई है। गांवों में चाय व पार्टियों का दौर शुरू हो गया है। चुनाव लड़ने के इच्छुक व्यक्तियों ने गोटियां फिट करनी शुरू कर दी हैं व सरपंच बनने के लिए जोड़तोड़ शुरू हो गया है।
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नि:संदेह पंचायती चुनाव को कोई भी पार्टी अपनी प्रतिष्ठा का सवाल नहीं बनाती, लेकिन हर क्षेत्र की पार्टियों के नेता पंचायती चुनावों में रुचि जरूर लेते हैं। सत्ता पक्ष यह धारणा अवश्य रखता है कि उसकी पार्टी से संबंधित ज्यादा सरपंच चुने जाएं। खैर गांवों में कुछ लोग अब सरपंच का चुनाव लड़ने की तैयारी में जुट गए हैं। पंचायत चुनाव का परिणाम किस के पक्ष में जाएगा यह तो समय ही बताएगा, मगर यह तय है कि क्षेत्र में पंचायती चुनाव में कोई भी पार्टी कोई कसर नहीं छोड़ेगी।
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कांग्रेस ने हाल ही में अपनी राज्य इकाई में बड़ा बदलाव किया था। अब राज्य की कमान हुड्डा के करीबी हाथों में हैं। पार्टी को खोई हुई जमीन फिर से हासिल करने की उम्मीद है। वहीं, आम आदमी पार्टी ने भी पंजाब में शानदार जीत हासिल की है। इसके बाद राज्य में पैर जमाने के लिए वह भी उत्सुक है।

जनता को लुभा रही भाजपा-जजपा
प्रदेश में भाजपा और जजपा की गठबंधन की सरकार है। सरकार ग्रामीण मतदाताओं को लुभाने के लिए पहले से ही हर संभव प्रयास कर रही है। सरकार ने हाल ही में ग्रामीण मतदाताओं को खुश करने के लिए सरकारी स्कूलों के छात्रों को मुफ्त टैबलेट से लेकर गांवों के नंबरदारों को मोबाइल फोन मुफ्त दे रही है। दूसरी ओर, भाजपा के अकेले निकाय चुनाव लड़ने के फैसले ने जजपा को झटका दिया है। अब यह भी देखने वाली बात होगी कि पंचायत चुनाव में इन दोनों पार्टियों का क्या रुख होगा। वहीं इनेलो भी अपने भाग्य को आजमाने के लिए गोटियां फिट करने के जुगाड़ में लग गई है और लोगों के बीच जाकर संपर्क साध रही है।
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