हरियाणा में किसानों की बल्ले-बल्ले: पराली प्रबंधन कर मुनाफा कमाएं, भूमि बंजर होने से बचाएं और जमीन होगी स्वस्थ
अंबाला में जिला कृषि उपनिदेशक डॉ. जसविंद्र सैनी ने बताया कि किसान नवंबर से पहले गेहूं की बिजाई नहीं करता था, अब यह अक्तूबर में ही शुरू हो जाता है। यह प्रकृति से खिलवाड़ है। जल्दी बिजाई न करें और पानी और जमीन को बचाएं। किसान फसल अवशेषों को आग न लगाएं।
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धान कटाई के बाद पराली प्रबंधन के लिए शहर के कृषि भवन में हरियाणा कृषि कल्याण विभाग के सहयोग से अमर उजाला किसान चौपाल कराई। इसमें भर से किसानों ने भाग लिया। पराली प्रबंधन के अनुभवों को साझा किया। अधिकारियों ने किसानों को पराली प्रबंधन के तरीकों से अवगत कराया। अगर जमीन स्वस्थ होगी तो ही हम सभी स्वस्थ रहेंगे।
अधिकारियों ने किसानों को खेती को व्यवसाय के तौर पर करने के लिए प्रेरित किया, जिससे कि किसानों की उन्नति हो सके। कई किसानों ने भी अपने सवाल विभागीय अधिकारियों से पूछे। विभागीय अधिकारियों ने किसानों को पराली प्रबंधन के बारे में जागरूक किया। साथ ही बताया कि वह किस तरह से पराली का प्रबंधन कर सकते हैं।
जिला कृषि उपनिदेशक डॉ. जसविंद्र सैनी ने बताया कि किसान नवंबर से पहले गेहूं की बिजाई नहीं करता था, अब यह अक्तूबर में ही शुरू हो जाता है। यह प्रकृति से खिलवाड़ है। जल्दी बिजाई न करें और पानी और जमीन को बचाएं। किसान फसल अवशेषों को आग न लगाएं। आग लगाने से जमीन की उपजाऊ शक्ति नष्ट होती है और हमारा स्वास्थ्य भी बिगड़ता है। जिन किसानों ने पराली प्रबंधन किया और आग नहीं लगाई। उनके लिए चार करोड़ 77 लाख का बजट आया है।
उपमंडल कृषि अधिकारी डॉ.सुनील मान का कहना है कि पिछले 30 वर्षों में आग से जितना नुकसान हुआ है, उतना पहले कभी नहीं हुआ। किसानों को पारंपरिक खेती के अलावा अन्य खेती करनी चाहिए। किसानों को अपनी जमीन के बारे में सोचना पड़ेगा। पराली अवशेषों को आग लगाने से जीवाणु नष्ट हो जाते हैं। इससे पौधे की बढ़वार नहीं होती, इसका असर फसल के उत्पादन पर पड़ता है। खेत में आग लगाने से एक नहीं बल्कि किसान की तीन वर्ष की मेहनत खराब हो जाती है। किसानों को जागरूक होकर पराली प्रबंधन करना चाहिए।
सहायक सांख्यिकी अधिकारी मनजीत कौर ने बताया कि फसल कटाई प्रयोग कृषि विभाग की तरफ से खेत में जाकर किया जाता है, मगर कई किसानों की तरफ से प्रयोग को लेकर सहयोग नहीं मिलता। इस प्रयोग से जिले में फसल उपज का सही आंकड़ा निकलकर सामने आता है। इससे सरकार को किसानों के लिए कल्याणकारी योजनाएं बनाने में मदद मिलती है। जब भी विभाग के अधिकारी व कर्मचारी किसानों के पास जाएं तो उनका सहयोग करें। फसल कटाई प्रयोग से किसानों को काफी लाभ मिलता है। योजना का लाभ उठाएं।
किसानों ने कहा
वह 50 एकड़ की खेती करते हैं। कई वर्षों से खेतों में पराली अवशेषों को आग नहीं लगाते। पराली की गांठ बनवाते हैं, ताकि भूमि की उपजाऊ शक्ति बनी रहे और प्रदूषण भी न हो।
-किसान कर्म सिंह, हिमांयुपुर गांव।
वह कई वर्षों से कृषि विभाग से जुड़े हैं। 20 एकड़ जमीन पर खेती करते हैं। वह पराली प्रबंधन को लेकर दूसरे किसानों को भी जागरूक कर रहे हैं। अधिकारियों का मार्गदर्शन मिल रहा है।
-किसान खुशप्रीत सिंह, धुराला गांव।
पराली प्रबंधन को लेकर विभाग के अधिकारी किसानों को जागरूक कर रहे हैं। वह भी पराली की गांठ बनवाएंगे और अन्य किसानों को भी मिलकर जागरूक करेंगे, ताकि प्रदूषण न हो।
-किसान बलविंद्र सिंह, तेजा गांव।
वह 15 एकड़ में खेती करते हैं। उनको खेती के बारे में कोई सहायता लेनी होती है तो अधिकारियों से संपर्क करते हैं। वह पराली के अवशेषों में आग नहीं लगाते। कई वर्ष से गांठ बनवा रहे हैं
-किसान दिलप्रीत सिंह, धुराला गांव।