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Ambala News: कागजों में कुत्तों को पकड़ने का अनुबंध
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अंबाला सिटी। कुत्तों के खौफ का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि सिटी नागरिक अस्पताल में दवाओं के लिए जारी होने वाले खर्च का 10 फीसद सिर्फ रैबीज वैक्सीन पर हो रहा है। प्रत्येक माह विभाग की ओर से अस्पताल के लिए 10 लाख रुपये की दवाएं खरीदी जाती हैं।
इसमें से करीब एक लाख 15 हजार रुपये सिर्फ कुत्ते के काटे हुए मरीजों को लगने वाली वैक्सीन पर ही खर्च हो रहे हैं। निगम की ओर से कुत्तों को पकड़ने के लिए एक वर्ष का अनुबंध भी दिया है। बावजूद इसके भी कुत्तों की तादाद में कमी नहीं आई। अब आलम ये हो गया है कि आए दिन कुत्ते लोगों को काट रहे हैं। पूरे वर्ष के आंकड़े को देखें तो करीब 12 लाख रुपये सिर्फ कुत्ते के काटे मरीजों की वैक्सीन पर ही खर्च हो रहे हैं।
रोजाना आते हैं 10 से 15 मामले
सिटी नागरिक अस्पताल में रोजाना 10 से 15 मामले कुत्ते के काटने के आते हैं। इन्हें रैबीज और टेटनेस का टीका लगाया जाता है। कुत्ते के काटने से मरीज का समय भी खराब होता है। मरीज को शारीरिक के साथ मानसिक पीड़ा भी झेलनी पड़ती है। अगर किसी मरीज को गहरा जख्म हो तो उसे कम से कम चार बार अस्पताल में टीके लगाने के लिए आना पड़ता है।
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दो हजार रुपये की आती है वैक्सीन
मेडिकल स्टोर अधिकारी डॉ. राहुल ने बताया कि जिस मरीज को कुत्ते के काटने से अधिक गहरा घाव होता है। उसके घाव में ही एंटी रैबीज इम्युनोग्लोबुलिन वैक्सीन लगाई जाती है। इसकी कीमत करीब 2200 रुपये है। इसके साथ ही प्रत्येक मामले में रैबीज वैक्सीन लगाई जाती है। इसकी कीमत करीब 250 रुपये है। हालांकि बाजार में इनकी कीमत इससे भी अधिक है। एंटी रैबीज वैक्सीन की एक यूनिट से तीन से पांच लोगों को वैक्सीन लगाई जा सकती है।
वर्जन
हमारी ओर से कुत्तों को पकड़ने के लिए एक वर्ष के लिए अनुबंध दिया हुआ है। इसके तहत ही कुत्तों की नसबंदी का कार्य किया जा रहा है।
मुकेश कुमार, मुख्य सफाई निरीक्षक, नगर निगम अंबाला
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इसमें से करीब एक लाख 15 हजार रुपये सिर्फ कुत्ते के काटे हुए मरीजों को लगने वाली वैक्सीन पर ही खर्च हो रहे हैं। निगम की ओर से कुत्तों को पकड़ने के लिए एक वर्ष का अनुबंध भी दिया है। बावजूद इसके भी कुत्तों की तादाद में कमी नहीं आई। अब आलम ये हो गया है कि आए दिन कुत्ते लोगों को काट रहे हैं। पूरे वर्ष के आंकड़े को देखें तो करीब 12 लाख रुपये सिर्फ कुत्ते के काटे मरीजों की वैक्सीन पर ही खर्च हो रहे हैं।
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रोजाना आते हैं 10 से 15 मामले
सिटी नागरिक अस्पताल में रोजाना 10 से 15 मामले कुत्ते के काटने के आते हैं। इन्हें रैबीज और टेटनेस का टीका लगाया जाता है। कुत्ते के काटने से मरीज का समय भी खराब होता है। मरीज को शारीरिक के साथ मानसिक पीड़ा भी झेलनी पड़ती है। अगर किसी मरीज को गहरा जख्म हो तो उसे कम से कम चार बार अस्पताल में टीके लगाने के लिए आना पड़ता है।
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दो हजार रुपये की आती है वैक्सीन
मेडिकल स्टोर अधिकारी डॉ. राहुल ने बताया कि जिस मरीज को कुत्ते के काटने से अधिक गहरा घाव होता है। उसके घाव में ही एंटी रैबीज इम्युनोग्लोबुलिन वैक्सीन लगाई जाती है। इसकी कीमत करीब 2200 रुपये है। इसके साथ ही प्रत्येक मामले में रैबीज वैक्सीन लगाई जाती है। इसकी कीमत करीब 250 रुपये है। हालांकि बाजार में इनकी कीमत इससे भी अधिक है। एंटी रैबीज वैक्सीन की एक यूनिट से तीन से पांच लोगों को वैक्सीन लगाई जा सकती है।
वर्जन
हमारी ओर से कुत्तों को पकड़ने के लिए एक वर्ष के लिए अनुबंध दिया हुआ है। इसके तहत ही कुत्तों की नसबंदी का कार्य किया जा रहा है।
मुकेश कुमार, मुख्य सफाई निरीक्षक, नगर निगम अंबाला